खरगोन में VNR-1064 बीज से टमाटर फसल चौपट: 70 से अधिक किसानों को 50 लाख रुपये से ज्यादा का नुकसान, कंपनी पर खराब किस्म का आरोप

मध्य प्रदेश के खरगोन जिले में टमाटर की खेती करने वाले किसानों को इस बार भारी आर्थिक संकट का सामना करना पड़ रहा है। जिले के टांडा बरुड़ क्षेत्र में 70 से अधिक किसानों की टमाटर फसल पूरी तरह से खराब हो गई है, जिससे अनुमानित नुकसान 50 लाख रुपये से अधिक बताया जा रहा है। किसानों ने फसल विफलता के लिए सीधे तौर पर वीएनआर (VNR) कंपनी द्वारा बाजार में उपलब्ध कराए गए ‘वीएनआर-1064’ प्रजाति के बीजों को जिम्मेदार ठहराया है। उनका आरोप है कि यह बीज खराब निकला है और इसमें अंकुरण तथा उत्पादन क्षमता का पूर्णतः अभाव रहा, जिसके कारण उनकी मेहनत और पूंजी दोनों बर्बाद हो गई हैं।
टांडा बरुड़ क्षेत्र मध्य प्रदेश में टमाटर उत्पादन के लिए जाना जाता है और यहाँ के किसान व्यावसायिक स्तर पर टमाटर की खेती करते हैं। इस बार कई किसानों ने उच्च गुणवत्ता और बेहतर पैदावार की उम्मीद में वीएनआर-1064 किस्म के बीजों की बुवाई की थी। हालाँकि, फसल के विकास चरण में ही समस्याएं सामने आने लगीं। किसानों के अनुसार, पौधों में अपेक्षित वृद्धि नहीं हुई और फूल-फल लगने की प्रक्रिया भी सामान्य नहीं रही। जिन खेतों में इस विशेष किस्म की बुवाई की गई थी, वहां फसल का स्वरूप अन्य स्वस्थ फसलों की तुलना में पूरी तरह भिन्न और निराशाजनक रहा। प्रभावित किसानों का कहना है कि उन्होंने खाद, दवाइयों, सिंचाई और श्रम पर कोई कमी नहीं छोड़ी थी, फिर भी परिणाम शून्य के करीब है।
प्रभावित किसानों ने बताया कि टमाटर की खेती में लागत पहले से ही बहुत अधिक होती है। बीज, उर्वरक, कीटनाशक और मजदूरी पर प्रति एकड़ लाखों रुपये का खर्च आता है। जब फसल पकने से पहले ही खराब हो जाती है, तो किसान न केवल अपनी लागत गंवा देते हैं, बल्कि वे कर्ज के बोझ तले भी दब जाते हैं। टांडा बरुड़ के प्रभावित किसानों का अनुमान है कि समग्र रूप से इस क्षेत्र में 50 लाख रुपये से अधिक का सीधा आर्थिक नुकसान हुआ है। यह राशि केवल इनपुट लागत की है; यदि फसल सामान्य रहती तो होने वाली संभावित आय इससे कई गुना अधिक होती। ऐसे में वास्तविक अवसर हानि (opportunity loss) का आंकड़ा और भी बड़ा है।
किसानों ने वीएनआर कंपनी पर निम्न गुणवत्ता वाले बीज बेचने का गंभीर आरोप लगाया है। उनका कहना है कि बीज विक्रेताओं और कंपनी प्रतिनिधियों ने इस किस्म को उच्च उपज देने वाला और रोग प्रतिरोधी बताकर बेचा था, लेकिन वास्तविकता इसके विपरीत साबित हुई है। किसानों ने मांग की है कि कंपनी को उनके नुकसान की भरपाई करनी चाहिए और संबंधित बीज बैच की जांच होनी चाहिए ताकि यह पता चल सके कि क्या यह समस्या केवल उनके क्षेत्र तक सीमित है या अन्य स्थानों पर भी इसी किस्म के बीजों से类似的 समस्याएं रिपोर्ट हुई हैं। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, किसी भी बीज किस्म की विफलता के पीछे कई कारण हो सकते हैं, जैसे कि बीज का खराब होना, मौसम की प्रतिकूलता, मिट्टी की असंगति या रोग का प्रकोप। हालाँकि, जब बड़े पैमाने पर एक ही किस्म के बीज से एक ही क्षेत्र में असफलता मिलती है, तो बीज की गुणवत्ता पर संदेह स्वाभाविक है।
खरगोन जिला प्रशासन और कृषि विभाग से भी किसानों ने मदद की गुहार लगाई है। उनका कहना है कि सरकारी तंत्र को तत्काल प्रभाव से खेतों का सर्वेक्षण करना चाहिए और नुकसान का आकलन करना चाहिए। यदि बीज दोषपूर्ण पाया जाता है, तो बीज अधिनियम के तहत कार्रवाई होनी चाहिए और पीड़ित किसानों को मुआवजा दिया जाना चाहिए। किसानों ने यह भी स्पष्ट किया है कि वे केवल मुआवजे के लिए नहीं, बल्कि भविष्य में अन्य किसानों को इसी तरह के नुकसान से बचाने के लिए भी न्याय चाहते हैं। यदि बाजार में खराब बीजों की बिक्री बिना किसी जांच के जारी रही, तो क्षेत्र की कृषि अर्थव्यवस्था को दीर्घकालिक क्षति हो सकती है।
यह घटना मध्य प्रदेश में बीज नियमन और गुणवत्ता नियंत्रण प्रणाली पर भी सवाल खड़े करती है। राज्य में समय-समय पर नकली या निम्न गुणवत्ता वाले बीजों की बिक्री की शिकायतें आती रही हैं, लेकिन प्रभावी रोकथाम और उत्तरदायित्व तय करने की प्रक्रिया अभी भी धीमी मानी जाती है। टांडा बरुड़ के किसानों का मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इसमें नुकसान का दायरा बड़ा है और प्रभावित किसानों की संख्या 70 से अधिक है। यह कोई व्यक्तिगत कृषि विफलता नहीं, बल्कि एक सामूहिक समस्या है जो व्यवस्थागत खामी की ओर इशारा करती है।
फिलहाल, प्रभावित किसानों ने अपने खेतों की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया और स्थानीय मीडिया के माध्यम से साझा किए हैं ताकि उनकी व्यथा प्रशासन और कंपनी तक पहुंच सके। उनका कहना है कि वे सभी कानूनी और प्रशासनिक विकल्पों का उपयोग करेंगे। कृषि विभाग के अधिकारियों से अपेक्षा की जा रही है कि वे शीघ्र ही मौके का निरीक्षण करेंगे और तकनीकी रिपोर्ट तैयार करेंगे। जब तक कोई आधिकारिक पुष्टि या कंपनी की प्रतिक्रिया नहीं आती, तब तक यह मामला बीज की गुणवत्ता पर आधारित किसानों के आरोप के रूप में ही दर्ज रहेगा। खरगोन जिले की यह घटना राज्य भर के सब्जी उत्पादकों के लिए एक चेतावनी भी है कि वे बीज खरीदते समय सतर्क रहें और विश्वसनीय स्रोतों से ही खरीदारी करें, साथ ही खरीद के उचित दस्तावेज सुरक्षित रखें ताकि विवाद की स्थिति में कानूनी सहारा लिया जा सके।

