Wed, 07 Oct 20261:53 PM
Wed, Oct 7, 2026Updated 1:53 PM IST
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धार: तीन गांवों के ग्रामीणों ने कलेक्टर कार्यालय पहुंचकर की 6 किमी सड़क और 24 घंटे बिजली की मांग, आंदोलन की दी चेतावनी

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मध्य प्रदेश के धार जिले में मूलभूत सुविधाओं को लेकर ग्रामीणों का गुस्सा सामने आया है। जिले के चांदुड़ी, गुनियारा और कालूखेड़ी गांव के निवासियों ने अपनी लंबित समस्याओं के समाधान की मांग को लेकर कलेक्टर कार्यालय का रुख किया। ग्रामीणों ने मुख्य रूप से छह किलोमीटर लंबी सड़क के निर्माण और चौबीस घंटे बिजली आपूर्ति सुनिश्चित किए जाने की मांग रखी है। इस दौरान उन्होंने प्रशासन को स्पष्ट चेतावनी देते हुए कहा कि यदि उनकी मांगों पर समय रहते उचित कार्रवाई नहीं की गई, तो वे बड़े स्तर पर आंदोलन करने के लिए बाध्य होंगे। यह पूरा मामला मंगलवार रात का है, जब तीनों गांवों के ग्रामीण एक साथ कलेक्टर कार्यालय पहुंचे और अपनी आवाज बुलंद की।

ग्रामीणों ने कलेक्टर कार्यालय पहुंचकर अपनी समस्याओं से अवगत कराने के लिए एक विस्तृत ज्ञापन भी सौंपा। यह ज्ञापन मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नाम से तैयार किया गया था। ग्रामीणों ने यह ज्ञापन मौके पर उपस्थित तहसीलदार दिनेश कुमार उईके को सौंपा, ताकि इसे उच्च अधिकारियों तक पहुंचाया जा सके और उनके गांवों की दयनीय स्थिति पर संज्ञान लिया जा सके। तहसीलदार दिनेश कुमार उईके ने ग्रामीणों से ज्ञापन प्राप्त किया और उनकी बातों को ध्यानपूर्वक सुना।

ग्रामीणों की सबसे प्रमुख मांगों में से एक उनके गांवों तक पहुंचने वाली सड़क का निर्माण है। चांदुड़ी, गुनियारा और कालूखेड़ी गांव के लोगों ने बताया कि लगभग छह किलोमीटर लंबी सड़क की हालत अत्यंत खराब है। इस सड़क के न होने या खराब होने के कारण ग्रामीणों को रोजमर्रा के कार्यों में भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है। बारिश के मौसम में यह सड़क पूरी तरह से कीचड़ में तब्दील हो जाती है, जिससे आवागमन लगभग ठप हो जाता है। ऐसे में गांव के मरीजों को अस्पताल ले जाना, बच्चों का स्कूल जाना और किसानों का अपनी उपज को मंडी तक पहुंचाना बेहद मुश्किल हो जाता है। ग्रामीणों ने मांग की है कि इस छह किलोमीटर लंबी सड़क का शीघ्र अति शीघ्र पक्का निर्माण कराया जाए, ताकि उन्हें इस परेशानी से स्थायी निजात मिल सके।

सड़क के साथ ही ग्रामीणों ने बिजली की समस्या को भी गंभीरता से उठाया। तीनों गांवों के निवासियों का कहना है कि उन्हें चौबीस घंटे बिजली आपूर्ति नहीं मिल पा रही है। आए दिन बिजली गुल होने और लो वोल्टेज की समस्या से ग्रामीण परेशान हैं। बिजली की अनियमित आपूर्ति के कारण न केवल घरेलू कामकाज प्रभावित हो रहा है, बल्कि खेती-किसानी के काम भी बाधित हो रहे हैं। किसानों को अपने खेतों में सिंचाई के लिए बिजली की सख्त जरूरत होती है, लेकिन बिजली न होने के कारण फसलों को समय पर पानी नहीं मिल पाता, जिससे पैदावार पर सीधा असर पड़ता है। इसके अलावा, छात्रों को पढ़ाई करने में भी काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि उनके क्षेत्र में चौबीस घंटे निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित की जाए, ताकि उनका जनजीवन सामान्य रूप से चल सके।

मंगलवार रात को कलेक्टर कार्यालय में जुटे ग्रामीणों ने प्रशासन के सामने अपना रोष व्यक्त किया। उनका कहना था कि वे पिछले लंबे समय से इन मूलभूत समस्याओं से जूझ रहे हैं और कई बार संबंधित विभागों को इस बारे में अवगत भी कराया जा चुका है, लेकिन अभी तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। समस्याओं के निराकरण में हो रही देरी से ग्रामीणों में निराशा और आक्रोश व्याप्त है।

इस दौरान ग्रामीणों ने प्रशासन को स्पष्ट शब्दों में चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर जल्द ही ध्यान नहीं दिया गया और सड़क निर्माण तथा बिजली आपूर्ति को लेकर कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो वे शांतिपूर्ण तरीके से बड़ा आंदोलन शुरू करेंगे। ग्रामीणों ने कहा कि वे अपनी मांगों को लेकर पूरी तरह से प्रतिबद्ध हैं और जब तक उनका समाधान नहीं होता, वे पीछे नहीं हटेंगे।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नाम तहसीलदार दिनेश कुमार उईके को सौंपे गए इस ज्ञापन के माध्यम से ग्रामीणों ने राज्य सरकार से हस्तक्षेप की अपील की है। अब देखना यह होगा कि जिला प्रशासन और राज्य सरकार इस मामले में कितनी तेजी से संज्ञान लेती है और चांदुड़ी, गुनियारा तथा कालूखेड़ी गांव के ग्रामीणों की लंबित मांगों को कब तक पूरा किया जाता है। ग्रामीणों की इस पहल ने एक बार फिर जिले के दूरदराज इलाकों में मूलभूत सुविधाओं की कमी के मुद्दे को प्रमुखता से सामने ला दिया है।