देवास: स्वामित्व योजना में शून्य प्रगति पर कलेक्टर की सख्त कार्रवाई, तीन प्रोबेशनर पटवारियों की सेवाएं तत्काल प्रभाव से समाप्त

वन्दे भारत न्यूज़, देवास। मध्य प्रदेश के देवास जिले में राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली और सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन को लेकर प्रशासन ने बेहद सख्त रुख अपनाया है। देवास जिला कलेक्टर ऋतुराज सिंह ने स्वामित्व योजना (SVAMITVA Yojana) में घोर लापरवाही बरतने और कामकाज में शून्य प्रगति (जीरो प्रोग्रेस) पाए जाने पर तीन प्रोबेशनर पटवारियों की सेवाएं तत्काल प्रभाव से समाप्त कर दी हैं। यह कार्रवाई जिले के राजस्व अमले में हड़कंप मचा देने वाली है और अन्य कर्मचारियों के लिए एक स्पष्ट संदेश है कि शासकीय योजनाओं के क्रियान्वयन में किसी भी प्रकार की कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
जिन तीन प्रोबेशनर पटवारियों की सेवाएं समाप्त की गई हैं, उनमें सोनकच्छ तहसील क्षेत्र में पदस्थ नितिन विश्वकर्मा, देवास ग्रामीण क्षेत्र में कार्यरत अजय नागर और टोंकखुर्द तहसील में तैनात विशाल टईया शामिल हैं। प्राप्त जानकारी के अनुसार, इन तीनों ही पटवारियों की नियुक्ति वर्ष 2024 में हुई थी और ये सभी अपने-अपने क्षेत्रों में प्रोबेशन अवधि (परिवीक्षा काल) में कार्यरत थे। प्रोबेशन अवधि के दौरान कर्मचारी के कार्य निष्पादन का नियमित मूल्यांकन किया जाता है, और इन्हीं मूल्यांकन मानकों पर खरे न उतरने के कारण इनके खिलाफ यह कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई की गई है।
कलेक्टर ऋतुराज सिंह द्वारा की गई इस कार्रवाई का मुख्य आधार केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी ‘स्वामित्व योजना’ में इन तीनों पटवारियों द्वारा दिखाई गई उदासीनता है। सूत्रों के मुताबिक, समीक्षा के दौरान यह पाया गया कि इन तीनों अधिकार क्षेत्रों में स्वामित्व योजना के तहत किए जाने वाले कार्यों में जीरो प्रोग्रेस रही है। यानी आवंटित लक्ष्यों के सापेक्ष कोई ठोस प्रगति दर्ज नहीं की जा सकी। इसके अलावा, इन पर सामान्य राजस्व कार्यों में भी लापरवाही से काम करने के गंभीर आरोप लगे थे। जब जिला स्तर पर इनकी कार्यप्रणाली की बारीकी से जांच की गई, तो उनके कामकाज का तरीका संतोषजनक नहीं पाया गया, जिसके बाद कलेक्टर ने बिना किसी देरी के उनकी सेवाएं समाप्त करने का निर्णय लिया।
उल्लेखनीय है कि स्वामित्व योजना (ग्राम पंचायतों में सर्वेक्षण और ड्रोन तकनीक के माध्यम से गांवों का मैपिंग और ग्रामीणों को संपत्ति कार्ड/अधिकार अभिलेख वितरण करने की योजना) प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा शुरू की गई एक अत्यंत महत्वपूर्ण राष्ट्रीय पहल है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण आबादी क्षेत्रों (आभास) में रहने वाले लोगों को उनकी संपत्ति का वैध दस्तावेज (स्वामित्व कार्ड) उपलब्ध कराना है, ताकि वे अपनी संपत्ति का उपयोग आर्थिक गतिविधियों और बैंक से ऋण प्राप्त करने के लिए कर सकें। साथ ही, इससे ग्राम पंचायतों को संपत्ति कर वसूलने और विकास योजनाओं के लिए बेहतर राजस्व जुटाने में मदद मिलती है। चूंकि पटवारी राजस्व विभाग की रीढ़ होते हैं और जमीनी स्तर पर किसी भी भूमि संबंधी योजना के क्रियान्वयन में उनकी भूमिका सबसे अहम होती है, इसलिए इस योजना में उनकी लापरवाही को प्रशासन ने सीधे तौर पर जनहित और शासन की प्राथमिकताओं के साथ खिलवाड़ माना।
राजस्व विभाग के जानकारों का कहना है कि प्रोबेशन अवधि के दौरान किसी भी कर्मचारी का व्यवहार, कार्यक्षमता और ईमानदारी का परीक्षण होता है। यदि कोई कर्मचारी इस अवधि में अपने दायित्वों का निर्वहन ठीक से नहीं करता है या सरकारी नीतियों के प्रति उदासीनता दिखाता है, तो नियमानुसार उसकी सेवाएं बिना किसी लंबी विभागीय जांच प्रक्रिया के समाप्त की जा सकती हैं। वर्ष 2024 में जॉइनिंग लेने वाले इन तीनों पटवारियों ने अपने कार्यकाल के शुरुआती दौर में ही ऐसी लापरवाही दिखाई कि प्रशासन को उन्हें बाहर का रास्ता दिखाना पड़ा।
देवास कलेक्टर की इस सख्त कार्रवाई से जिले के समस्त तहसीलों और अनुविभागों में पदस्थ राजस्व कर्मचारियों, विशेषकर नवनियुक्त पटवारियों और प्रोबेशनर अधिकारियों में खलबली मची हुई है। प्रशासनिक स्तर पर यह स्पष्ट संदेश दिया गया है कि अब फाइलों पर धूल जमने या योजनाओं के आंकड़ों में शून्य प्रगति दिखाए जाने की छूट किसी को नहीं दी जाएगी। कलेक्टर ऋतुराज सिंह ने यह भी संकेत दिए हैं कि आगे भी जिले में चल रही विभिन्न शासकीय योजनाओं की नियमित समीक्षा की जाएगी और जो भी अधिकारी या कर्मचारी अपने लक्ष्यों को पूरा करने में विफल रहेंगे या कार्य में लापरवाही बरतेंगे, उनके खिलाफ भी इसी तरह की कठोर अनुशासनात्मक कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
हालांकि, अभी यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि क्या इन तीनों बर्खास्त प्रोबेशनर पटवारियों को अपील का कोई विकल्प दिया गया है या नहीं। लेकिन वर्तमान आदेश के अनुसार उनकी सेवाएं तत्काल प्रभाव से समाप्त मानी गई हैं। अब देखना यह होगा कि सोनकच्छ, देवास ग्रामीण और टोंकखुर्द में रिक्त हुए इन पदों पर नई नियुक्ति कब तक होती है और वहां स्वामित्व योजना के लंबित कार्यों को कैसे गति दी जाती है। वन्दे भारत न्यूज़ इस मामले में जिला प्रशासन से और अधिक जानकारी प्राप्त करने का प्रयास कर रहा है।

