Wed, 07 Oct 202610:12 AM
Wed, Oct 7, 2026Updated 10:12 AM IST
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दिल्ली सरकार ने मिशन अनमोल का किया विस्तार: जन्म के 24-72 घंटे में अब 63 बीमारियों की होगी स्क्रीनिंग, सालाना कवरेज 2.5 लाख करने का लक्ष्य

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नई दिल्ली। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में नवजात शिशुओं के स्वास्थ्य सुरक्षा तंत्र को और अधिक सशक्त बनाने की दिशा में दिल्ली सरकार ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। सरकार ने ‘मिशन अनमोल’ कार्यक्रम का विस्तार करते हुए नवजातों में गंभीर लेकिन उपचार योग्य बीमारियों की समय रहते पहचान और उनके समुचित इलाज की व्यवस्था को व्यापक स्तर पर सुदृढ़ किया है। इस विस्तारित कार्यक्रम के तहत अब नवजात शिशुओं के जन्म के 24 से 72 घंटे की निश्चित समय सीमा के भीतर ही 63 प्रकार की जन्मजात, आनुवंशिक और मेटाबॉलिक बीमारियों की अनिवार्य स्क्रीनिंग की जाएगी। यह निर्णय दिल्ली के सार्वजनिक स्वास्थ्य ढांचे में नवजात देखभाल के मानकों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्थापित करने की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

सरकारी सूत्रों और जारी जानकारी के अनुसार, मिशन अनमोल के इस नए चरण में वार्षिक स्क्रीनिंग कवरेज को बढ़ाकर 2.5 लाख नवजात शिशुओं तक ले जाने का स्पष्ट और महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किया गया है। पूर्व में यह कार्यक्रम सीमित संख्या में बीमारियों और कम दायरे में संचालित हो रहा था, लेकिन अब इसे बढ़ाकर 63 बीमारियों को शामिल किया गया है। इनमें ऐसी कई दुर्लभ आनुवंशिक और मेटाबॉलिक विकृतियां भी सम्मिलित हैं, जिनके लक्षण जन्म के तुरंत बाद दिखाई नहीं देते, लेकिन यदि इनकी पहचान प्रारंभिक चरण में न हो पाए तो ये बच्चे के शारीरिक और मानसिक विकास पर स्थायी हानिकारक प्रभाव डाल सकती हैं। समय पर स्क्रीनिंग होने से इन स्थितियों का प्रबंधन संभव हो पाता है और बच्चा एक सामान्य जीवन जी सकता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि नवजात स्क्रीनिंग के लिए जन्म के 24 से 72 घंटे का समय चिकित्सकीय दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण होता है। इस अवधि में किए गए परीक्षण सबसे अधिक विश्वसनीय परिणाम प्रदान करते हैं और झूठी सकारात्मक या नकारात्मक रिपोर्ट की संभावना को न्यूनतम कर देते हैं। दिल्ली सरकार द्वारा निर्धारित यह समय सीमा यह सुनिश्चित करती है कि किसी भी संभावित स्वास्थ्य जोखिम की पहचान अस्पताल से छुट्टी मिलने से पहले या उसके तुरंत बाद हो जाए। इससे माता-पिता को बच्चे की स्वास्थ्य स्थिति की स्पष्ट जानकारी मिलती है और आवश्यक होने पर तत्काल विशेषज्ञ परामर्श एवं उपचार शुरू किया जा सकता है। 2.5 लाख बच्चों की वार्षिक स्क्रीनिंग का लक्ष्य दिल्ली की वर्तमान जन्म दर और सरकारी तथा निजी स्वास्थ्य सुविधाओं में होने वाले प्रसवों की अनुमानित संख्या को ध्यान में रखकर तय किया गया है, ताकि कोई भी नवजात इस सुरक्षा कवच से वंचित न रहे।

मिशन अनमोल का यह विस्तार दिल्ली के स्वास्थ्य विभाग की उस नीति का हिस्सा है जिसका उद्देश्य रोकथाम और प्रारंभिक हस्तक्षेप को प्राथमिकता देना है। 63 बीमारियों की सूची में फिनाइलकेटोन्यूरिया (PKU), हाइपोथायरायडिज्म, एड्रिनल हाइपरप्लासिया, सिकल सेल एनीमिया और विभिन्न कार्बनिक एसिडेमिया जैसी स्थितियां शामिल हैं। ये सभी बीमारियां जन्मजात हैं और इनका उपचार संभव है, बशर्ते निदान सही समय पर हो। मेटाबॉलिक विकारों के मामले में तो आहार प्रबंधन और दवाओं द्वारा बच्चे को पूरी तरह स्वस्थ रखा जा सकता है, लेकिन देरी होने पर ये मस्तिष्क क्षति या अन्य गंभीर जटिलताओं का कारण बन सकते हैं। इसलिए, सरकार द्वारा स्क्रीनिंग दायरे का विस्तार करना केवल एक प्रशासनिक कदम नहीं, बल्कि हजारों परिवारों के भविष्य को सुरक्षित करने वाला जनस्वास्थ्य अभियान है।

इस कार्यक्रम की सफलता के लिए स्वास्थ्य विभाग ने सरकारी अस्पतालों, प्रसूति केंद्रों और संबद्ध निजी स्वास्थ्य इकाइयों में प्रशिक्षित जनशक्ति और आवश्यक जांच उपकरणों की उपलब्धता सुनिश्चित करने की योजना बनाई है। स्क्रीनिंग के लिए उपयोग की जाने वाली तकनीक और गुणवत्ता नियंत्रण मानकों को भी अपग्रेड किया जा रहा है ताकि 2.5 लाख बच्चों के लक्ष्य को समयबद्ध और सटीक तरीके से प्राप्त किया जा सके। इसके अलावा, पॉजिटिव पाए गए मामलों के लिए रेफरल सिस्टम और फॉलो-अप प्रोटोकॉल को भी सुव्यवस्थित किया गया है, ताकि स्क्रीनिंग का लाभ वास्तविक उपचार में परिवर्तित हो सके। दिल्ली सरकार का यह प्रयास राष्ट्रीय नवजात स्वास्थ्य रणनीति के अनुरूप है और देश के अन्य राज्यों के लिए भी एक मॉडल साबित हो सकता है।

मिशन अनमोल के विस्तार से दिल्ली में नवजात मृत्यु दर और बाल विकलांगता की दरों में कमी आने की अपेक्षा है। जब 63 गंभीर बीमारियों की पहचान लक्षण प्रकट होने से पहले हो जाती है, तो स्वास्थ्य प्रणाली पर दीर्घकालिक बोझ भी कम होता है। यह कार्यक्रम न केवल बच्चों के जीवन को बचाता है, बल्कि परिवारों को भावनात्मक और आर्थिक संकट से भी बचाता है। दिल्ली सरकार ने इस पहल को पूर्ण रूप से लागू करने के लिए बजटीय आवंटन और निगरानी तंत्र को भी सक्रिय किया है, जिससे यह सुनिश्चित हो सके कि घोषित लक्ष्य और वास्तविक जमीनी स्थिति में कोई अंतर न रहे। नवजात स्वास्थ्य के क्षेत्र में यह विस्तार दिल्ली की स्वास्थ्य सेवाओं में एक गुणात्मक बदलाव का संकेत है।