Wed, 07 Oct 202610:06 AM
Wed, Oct 7, 2026Updated 10:06 AM IST
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पाकिस्तान में इमरान खान की रिहाई को लेकर हालात तनावपूर्ण: समर्थकों का लॉन्ग मार्च पेशावर से 30 किलोमीटर दूर, PM शहबाज शरीफ का बातचीत का प्रस्ताव ठुकराया

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नई दिल्ली। पाकिस्तान में पूर्व प्रधानमंत्री और पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) के संस्थापक इमरान खान की रिहाई की मांग को लेकर राजनीतिक हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं। देश भर में उनके समर्थकों द्वारा निकाला गया लॉन्ग मार्च अब एक निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, इमरान खान के समर्थकों का यह लॉन्ग मार्च अब पेशावर शहर से महज 30 किलोमीटर की दूरी पर पहुंच चुका है। इस बीच, पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने धरना खत्म करने की शर्त पर बातचीत का न्योता दिया था, जिसे इमरान खान के समर्थकों ने स्पष्ट रूप से ठुकरा दिया है।

पाकिस्तान में जारी इस राजनीतिक उठापटक ने पूरे देश का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान फिलहाल जेल में बंद हैं और उनकी रिहाई की मांग को लेकर उनके समर्थक सड़कों पर उतर आए हैं। पीटीआई कार्यकर्ताओं और समर्थकों का कहना है कि जब तक इमरान खान को रिहा नहीं किया जाता, उनका यह आंदोलन जारी रहेगा। लॉन्ग मार्च के पेशावर से मात्र 30 किलोमीटर दूर पहुंचने से स्थानीय प्रशासन और सरकार की चिंताएं काफी बढ़ गई हैं, क्योंकि हजारों की संख्या में समर्थकों का पेशावर में प्रवेश करना सुरक्षा व्यवस्था के लिए एक बड़ी चुनौती माना जा रहा है।

बढ़ते तनाव और बिगड़ते हालात को देखते हुए पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने स्थिति को नियंत्रित करने के लिए बातचीत का रास्ता अपनाने का प्रयास किया। सूत्रों के मुताबिक, पीएम शहबाज शरीफ की ओर से इमरान खान के समर्थकों और पीटीआई नेतृत्व को बातचीत का न्योता भेजा गया था। हालांकि, इस बातचीत के लिए एक प्रमुख शर्त रखी गई थी। प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने साफ किया था कि बातचीत तभी संभव हो सकती है जब प्रदर्शनकारी अपना धरना खत्म करेंगे और लॉन्ग मार्च को वापस लेंगे। सरकार का मानना था कि पहले सड़कों से भीड़ हटनी चाहिए, उसके बाद ही किसी तरह की वार्ता पर विचार किया जा सकता है।

लेकिन, प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के इस प्रस्ताव को इमरान खान के समर्थकों ने सिरे से खारिज कर दिया है। समर्थकों का स्पष्ट रुख है कि वे बिना किसी पूर्व शर्त के बातचीत करने को तैयार हैं, लेकिन धरना खत्म करना या लॉन्ग मार्च रोकना उनके एजेंडे में शामिल नहीं है। पीटीआई समर्थकों ने सरकार के इस प्रस्ताव को समय गुजारने की रणनीति करार देते हुए इसे ठुकरा दिया। उनका कहना है कि उनका एकमात्र लक्ष्य इमरान खान की बिना शर्त रिहाई है और जब तक यह मांग पूरी नहीं होती, उनका संघर्ष उसी तीव्रता के साथ जारी रहेगा। समर्थकों के इस अड़ियल रुख के बाद सरकार और प्रदर्शनकारियों के बीच गतिरोध और गहरा गया है।

पेशावर के बाहरी इलाकों में लॉन्ग मार्च के पहुंचने से शहर में सुरक्षा व्यवस्था को कड़ा कर दिया गया है। प्रशासन ने किसी भी अप्रिय घटना से निपटने के लिए पुलिस और अर्धसैनिक बलों की तैनाती बढ़ा दी है। सड़कों पर बैरिकेडिंग की गई है और वाहनों की आवाजाही पर नजर रखी जा रही है। पेशावर खैबर पख्तूनख्वा प्रांत की राजधानी है, जो पीटीआई का एक मजबूत गढ़ माना जाता है। ऐसे में लॉन्ग मार्च का यहां पहुंचना सरकार के लिए राजनीतिक और प्रशासनिक दोनों स्तरों पर दबाव बढ़ाने वाला कदम है।

इमरान खान की गिरफ्तारी के बाद से ही पाकिस्तान की राजनीति में भारी उथल-पुथल मची हुई है। पीटीआई के नेताओं और कार्यकर्ताओं का दावा है कि इमरान खान के खिलाफ दर्ज मामले राजनीति से प्रेरित हैं और उन्हें जानबूझकर राजनीति से बाहर रखने के लिए जेल में डाला गया है। वहीं, सत्तारूढ़ गठबंधन सरकार का कहना है कि कानून अपना काम कर रहा है और कोई भी व्यक्ति कानून से ऊपर नहीं है। सरकार ने बार-बार यह स्पष्ट करने का प्रयास किया है कि हिंसा या सड़कों पर उतरकर दबाव बनाने की नीति को स्वीकार नहीं किया जाएगा, लेकिन समर्थकों की भारी भीड़ को देखते हुए प्रशासन के सामने बल प्रयोग का विकल्प भी आसान नहीं है।

सरकार और प्रदर्शनकारियों के बीच बातचीत का दरवाजा फिलहाल बंद होने के कारण आने वाले दिनों में टकराव की आशंका और बढ़ गई है। यदि लॉन्ग मार्च पेशावर शहर में प्रवेश करता है, तो वहां की कानून व्यवस्था पर सीधा असर पड़ेगा। दूसरी ओर, अगर प्रशासन बल प्रयोग करता है, तो इसके पूरे देश में व्यापक विरोध प्रदर्शन भड़कने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। पाकिस्तान की राजनीति में इमरान खान का कद अभी भी बहुत बड़ा है और उनके समर्थक आधार की ताकत इस लॉन्ग मार्च में साफ तौर पर दिखाई दे रही है।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी पाकिस्तान के इन आंतरिक हालात पर नजर रखी जा रही है। देश में राजनीतिक अस्थिरता का असर पहले से ही कमजोर चल रही अर्थव्यवस्था पर भी पड़ सकता है। फिलहाल, सभी की निगाहें पेशावर से 30 किलोमीटर दूर खड़े इमरान खान के समर्थकों और शहबाज शरीफ सरकार के अगले कदम पर टिकी हुई हैं। देखना यह होगा कि क्या सरकार कोई नया रास्ता निकालती है या फिर समर्थक अपने लॉन्ग मार्च को पेशावर के अंदर तक ले जाने में कामयाब होते हैं। वर्तमान परिस्थितियों में किसी भी तत्काल समाधान की संभावना कम ही नजर आ रही है, जिससे पाकिस्तान में राजनीतिक संकट और लंबा खिंचने के आसार बन गए हैं।