Wed, 07 Oct 202612:28 PM
Wed, Oct 7, 2026Updated 12:28 PM IST
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उज्जैन: भस्म आरती में शामिल हुईं हरलीन देओल और ईशा कोप्पिकर, नंदी हॉल में दो घंटे तक किए महाकाल के दर्शन

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उज्जैन। मध्य प्रदेश के उज्जैन स्थित बाबा महाकालेश्वर मंदिर में देश-विदेश से श्रद्धालुओं का तांता लगा रहता है। इसी कड़ी में भारतीय महिला क्रिकेट टीम की स्टार खिलाड़ी हरलीन देओल और बॉलीवुड अभिनेत्री ईशा कोप्पिकर ने भी भगवान महाकाल की शरण में पहुंचकर धार्मिक अनुष्ठानों में हिस्सा लिया। दोनों ही हस्तियों ने आज तड़के सुबह मंदिर पहुंचकर प्रसिद्ध भस्म आरती में शामिल होकर भगवान शिव के दर्शन किए। यह जानकारी मंदिर प्रबंधन और स्थानीय सूत्रों से प्राप्त हुई है।

भारतीय महिला क्रिकेट टीम की प्रतिभाशाली खिलाड़ी हरलीन देओल और फिल्म जगत की जानी-मानी अभिनेत्री ईशा कोप्पिकर का उज्जैन दौरा काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। रिपोर्ट्स के अनुसार, दोनों हस्तियां सुबह करीब 4 बजे महाकालेश्वर मंदिर परिसर में पहुंचीं। इतनी सुबह मंदिर पहुंचने का मुख्य उद्देश्य भगवान महाकाल की विश्व प्रसिद्ध भस्म आरती में सम्मिलित होना था। भस्म आरती महाकालेश्वर मंदिर का सबसे पवित्र और विशेष अनुष्ठान माना जाता है, जिसमें शामिल होने के लिए श्रद्धालुओं को विशेष व्यवस्था और पूर्व अनुमति की आवश्यकता होती है।

मंदिर में प्रवेश के बाद हरलीन देओल और ईशा कोप्पिकर को सीधे नंदी हॉल में ले जाया गया। नंदी हॉल मंदिर के गर्भगृह के ठीक सामने स्थित है, जहां से भगवान महाकाल के दर्शन और भस्म आरती का अवलोकन स्पष्ट रूप से किया जा सकता है। प्राप्त जानकारी के मुताबिक, दोनों हस्तियां लगभग दो घंटे तक नंदी हॉल में बैठकर भस्म आरती के दर्शन करती रहीं। इस दौरान उन्होंने पूरी श्रद्धा और विधि-विधान के साथ आरती में भाग लिया। भस्म आरती के समापन के बाद दोनों ने भगवान महाकाल को जल अर्पित किया और उनका आशीर्वाद प्राप्त किया।

भगवान महाकालेश्वर मंदिर में भस्म आरती का विशेष महत्व है। यह आरती प्रतिदिन तड़के सुबह निश्चित समय पर आयोजित की जाती है। मान्यता है कि भस्म आरती के दौरान भगवान शिव स्वयं अपने भक्तों को दर्शन देते हैं। इस आरती में चिता की भस्म का उपयोग किया जाता है, जो जीवन की नश्वरता और शिव की अनंत शक्ति का प्रतीक है। हरलीन देओल और ईशा कोप्पिकर द्वारा इस विशिष्ट आरती में शामिल होना उनकी गहरी आस्था और शिव भक्ति को दर्शाता है। दोनों ने बिना किसी दिखावे के, सामान्य श्रद्धालुओं की तरह नियमों का पालन करते हुए दर्शन किए।

हरलीन देओल वर्तमान में भारतीय महिला क्रिकेट टीम की प्रमुख खिलाड़ियों में से एक हैं। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में भारत का प्रतिनिधित्व किया है और अपनी बल्लेबाजी तथा फील्डिंग के लिए जानी जाती हैं। खेल के व्यस्त कार्यक्रमों के बीच भी उनका उज्जैन आकर भगवान महाकाल के दर्शन करना उनके व्यक्तिगत विश्वासों को रेखांकित करता है। वहीं, ईशा कोप्पिकर हिंदी सिनेमा की स्थापित अभिनेत्री हैं जिन्होंने कई सफल फिल्मों में काम किया है। मनोरंजन जगत की व्यस्तताओं के बावजूद उनका धार्मिक यात्रा पर आना सांस्कृतिक और आध्यात्मिक जुड़ाव का परिचायक है।

महाकालेश्वर मंदिर में अक्सर राजनेता, खिलाड़ी, कलाकार और अन्य प्रमुख हस्तियां दर्शन के लिए आती रहती हैं। हालांकि, भस्म आरती में शामिल होना हर किसी को संभव नहीं होता। इसके लिए मंदिर समिति की पूर्व स्वीकृति और सुरक्षा संबंधी प्रोटोकॉल का पालन अनिवार्य है। हरलीन देओल और ईशा कोप्पिकर के दौरे के दौरान मंदिर प्रशासन ने उचित व्यवस्था सुनिश्चित की ताकि आम श्रद्धालुओं की पूजा-अर्चना में कोई बाधा न आए और साथ ही अतिथियों को भी सुचारू रूप से दर्शन मिल सकें।

उज्जैन का महाकालेश्वर मंदिर बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक है और इसे दक्षिणमुखी ज्योतिर्लिंग होने का विशेष दर्जा प्राप्त है। यहाँ की भस्म आरती न केवल धार्मिक दृष्टि से बल्कि सांस्कृतिक परंपरा के रूप में भी विश्व भर में प्रसिद्ध है। हरलीन देओल और ईशा कोप्पिकर जैसे युवा और प्रभावशाली व्यक्तित्वों का इस परंपरा से जुड़ना नई पीढ़ी में आस्था और सांस्कृतिक विरासत के प्रति रुचि को भी दर्शाता है।

यह स्पष्ट किया जाना चाहिए कि उपलब्ध स्रोत सामग्री में हरलीन देओल या ईशा कोप्पिकर की ओर से कोई औपचारिक बयान या टिप्पणी दर्ज नहीं है। उनके दौरे का उद्देश्य, यात्रा की अन्य योजनाएं या भविष्य की कार्यसूची के बारे में कोई अतिरिक्त जानकारी स्रोत में उपलब्ध नहीं है। रिपोर्टिंग पूरी तरह से मंदिर दर्शन, भस्म आरती में सहभागिता, नंदी हॉल में बिताए गए समय और जल अर्पण की पुष्टि हुई घटनाओं पर आधारित है। किसी भी प्रकार की अटकल या असत्यापित विवरण से बचा गया है।

महाकालेश्वर मंदिर में श्रद्धालुओं की आवाजाही वर्ष भर जारी रहती है। त्योहारों, सावन माह और विशेष तिथियों पर यह संख्या लाखों में पहुंच जाती है। ऐसे में प्रसिद्ध हस्तियों का आगमन मंदिर की धार्मिक और सांस्कृतिक प्रासंगिकता को और अधिक रेखांकित करता है। हरलीन देओल और ईशा कोप्पिकर का यह दौरा भी उसी निरंतर आस्था और भक्ति परंपरा का एक हिस्सा है जो उज्जैन को हिंदू धर्म का प्रमुख केंद्र बनाए हुए है।