रायसेन: शहर से बाहर शिफ्ट होगी कृषि उपज मंडी, डबरा इमलिया में 25 एकड़ जमीन का निरीक्षण; विधायक ने कहा- 50 करोड़ से बनेगा रोड

रायसेन। मध्य प्रदेश के रायसेन जिले में कृषि उपज मंडी को शहर की सीमा से बाहर स्थानांतरित करने की तैयारियों को तेजी से आगे बढ़ाया जा रहा है। धान खरीदी के दौरान शहर में अत्यधिक भीड़ और यातायात पर पड़ने वाले भारी दबाव को देखते हुए यह महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया है। इस प्रस्तावित स्थानांतरण के तहत डबरा इमलिया क्षेत्र में करीब 25 एकड़ जमीन चिह्नित की गई है, जिसका हाल ही में मंडी बोर्ड सचिव कविता झारिया ने अपनी टीम के साथ विस्तृत निरीक्षण किया है। वहीं, स्थानीय विधायक ने स्पष्ट किया है कि इस नई मंडी तक पहुंच सुनिश्चित करने के लिए 50 करोड़ रुपये की लागत से सड़क का निर्माण कराया जाएगा।
धान खरीदी के मौसम में रायसेन शहर में हर वर्ष गंभीर यातायात समस्या उत्पन्न होती रही है। जब किसान अपनी फसल लेकर वर्तमान कृषि उपज मंडी पहुंचते हैं, तो ट्रैक्टर-ट्रॉलियों और अन्य वाहनों की लंबी कतारें लग जाती हैं। इस वजह से शहर के मुख्य मार्गों पर जाम की स्थिति बनती है, जिससे आम नागरिकों, स्कूली बच्चों, व्यापारियों और मरीजों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है। शहर के बीचोंबीच स्थित मंडी के कारण न केवल यातायात व्यवस्था चरमराती है, बल्कि प्रदूषण और शोर की समस्या भी बढ़ जाती है। इन सभी व्यावहारिक चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए प्रशासन और जनप्रतिनिधियों ने मंडी को शहर से बाहर शिफ्ट करने की योजना पर काम शुरू किया है।
इसी योजना को जमीनी स्तर पर क्रियान्वित करने के लिए मंडी बोर्ड की सचिव कविता झारिया ने अपने अधिकारियों की एक टीम के साथ डबरा इमलिया के पास प्रस्तावित स्थल का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने 25 एकड़ भूमि का बारीकी से निरीक्षण किया। निरीक्षण के समय जमीन की समतलता, भौगोलिक स्थिति, आसपास का वातावरण और भविष्य में मंडी के संचालन के लिए आवश्यक बुनियादी ढांचे की संभावनाओं का आकलन किया गया। मंडी बोर्ड की टीम ने यह सुनिश्चित करने का प्रयास किया कि प्रस्तावित जमीन नई कृषि उपज मंडी के निर्माण के लिए पूरी तरह उपयुक्त है या नहीं। सूत्रों के अनुसार, निरीक्षण के बाद संबंधित रिपोर्ट उच्च अधिकारियों को प्रस्तुत की जाएगी, जिसके आधार पर अगली औपचारिक कार्रवाई तय होगी।
इस महत्वपूर्ण परियोजना को लेकर स्थानीय विधायक ने भी अपनी प्रतिबद्धता जताई है। विधायक ने बताया कि डबरा इमलिया में प्रस्तावित नई मंडी तक किसानों और व्यापारियों की सुगम पहुंच के लिए 50 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से एक नई सड़क का निर्माण किया जाएगा। यह सड़क न केवल मंडी तक आवागमन को आसान बनाएगी, बल्कि आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों के विकास में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। विधायक के अनुसार, मंडी के शिफ्ट होने से किसानों को अपनी उपज लाने और ले जाने में काफी सहूलियत मिलेगी और उन्हें शहर के भीतर जाम में फंसने से मुक्ति मिलेगी। 50 करोड़ रुपये की इस सड़क परियोजना से क्षेत्र के समग्र बुनियादी ढांचे में भी उल्लेखनीय सुधार होने की संभावना है।
रायसेन कृषि उपज मंडी के स्थानांतरण से जहां एक ओर शहर को यातायात के दबाव से राहत मिलेगी, वहीं दूसरी ओर किसानों को अधिक व्यवस्थित और आधुनिक सुविधाओं से लैस मंडी परिसर उपलब्ध हो सकेगा। वर्तमान में शहर के अंदर स्थित मंडी में विस्तार की गुंजाइश बेहद सीमित है, जिसके चलते धान, गेहूं और अन्य फसलों की खरीदी के समय अव्यवस्था फैलती है। नई मंडी में किसानों के बैठने, वाहनों की पार्किंग और उपज की नीलामी के लिए पर्याप्त स्थान सुनिश्चित किया जा सकेगा। इसके अलावा, मंडी शहर से बाहर जाने से रायसेन नगर पालिका को भी शहर के नियोजित विकास और सौंदर्यीकरण पर ध्यान केंद्रित करने का अवसर मिलेगा।
उल्लेखनीय है कि डबरा इमलिया में 25 एकड़ जमीन का चयन इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि यह क्षेत्र मुख्य सड़क मार्गों से जुड़ा हुआ है। हालांकि, अंतिम निर्णय मंडी बोर्ड और राज्य सरकार की औपचारिक मंजूरी के बाद ही लिया जाएगा। मंडी बोर्ड सचिव कविता झारिया द्वारा किए गए इस निरीक्षण को इस दिशा में एक ठोस कदम के रूप में देखा जा रहा है। अभी यह स्पष्ट नहीं है कि नई मंडी का निर्माण कार्य कब तक शुरू होगा और इसे पूरी तरह चालू होने में कितना समय लगेगा, लेकिन प्रशासनिक स्तर पर प्रक्रिया तेज कर दी गई है।
स्थानीय किसानों और व्यापारियों में भी इस प्रस्ताव को लेकर चर्चाएं शुरू हो गई हैं। किसानों का मानना है कि यदि नई मंडी में पर्याप्त सुविधाएं दी जाती हैं और 50 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाली सड़क समय पर तैयार हो जाती है, तो उन्हें अपनी कृषि उपज की बिक्री में पहले से कहीं अधिक सुविधा मिलेगी। कुल मिलाकर, रायसेन में कृषि उपज मंडी के स्थानांतरण की यह योजना शहर के विकास और किसानों के हित दोनों को ध्यान में रखकर तैयार की गई है। अब सभी की निगाहें मंडी बोर्ड की अंतिम रिपोर्ट और शासन की आधिकारिक मंजूरी पर टिकी हुई हैं।

