Wed, 07 Oct 20266:35 PM
Wed, Oct 7, 2026Updated 6:35 PM IST
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नवादा में प्रशांत किशोर का नीतीश कुमार और सम्राट चौधरी पर जोरदार हमला, बोले- बिहार बाढ़ में डूबा और सरकार दीया जला रही है

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वंदे भारत न्यूज़। बिहार के नवादा जिले में बुधवार को जन सुराज अभियान के सूत्रधार प्रशांत किशोर ने एक सभा को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने राज्य की नीतीश कुमार सरकार और उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी पर तीखी टिप्पणी करते हुए जमकर हमला बोला। प्रशांत किशोर ने अपने संबोधन में बिहार की वर्तमान राजनीतिक स्थिति, केंद्र की राजनीति और राज्य सरकार की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि जनता सब कुछ देख रही है और आने वाले चुनावों में वह इसका मुंहतोड़ जवाब देगी।

प्रशांत किशोर ने राज्य सरकार की प्राथमिकताओं पर सवाल उठाते हुए एक बेहद तीखी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि एक तरफ पूरा बिहार बाढ़ की विनाशकारी स्थिति में डूबा हुआ है, लोग अपनी जान और माल बचाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ सरकार दीया जलाने जैसे कामों में व्यस्त है। उनके इस बयान से साफ तौर पर यह संदेश गया कि राज्य सरकार जनता की वास्तविक और गंभीर समस्याओं को नजरअंदाज कर रही है और ध्यान भटकाने वाले कार्यों में लगी हुई है। बाढ़ पीड़ितों की मदद और राहत कार्यों में सरकार की कथित विफलता को लेकर उन्होंने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की आलोचना की।

जन सुराज पदयात्रा के तहत नवादा पहुंचे प्रशांत किशोर ने लोगों से सीधा संवाद किया। उन्होंने कहा कि बिहार की जनता अब पहले जैसी नहीं रही है। लोग जागरूक हो चुके हैं और वे हर उस नेता और पार्टी को पहचान रहे हैं जो केवल सत्ता के लिए अपना रुख बदलते हैं। प्रशांत किशोर ने स्पष्ट शब्दों में चेतावनी देते हुए कहा कि जनता सब देख रही है। जो भी नेता और दल जनता के साथ छलावा कर रहे हैं, आने वाले समय में जब चुनाव होंगे तो जनता उन्हें उसका सटीक जवाब जरूर देगी। उन्होंने मतदाताओं से अपील की कि वे अपने अधिकारों को समझें और ऐसे लोगों को सत्ता से दूर रखें जिन्होंने वर्षों तक बिहार का विकास नहीं किया।

इस सभा के दौरान प्रशांत किशोर ने सिर्फ राज्य सरकार को ही नहीं, बल्कि केंद्र की राजनीति पर भी निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र और राज्य की राजनीति में आम जनता के मूलभूत मुद्दे कहीं पीछे छूट गए हैं। उनका कहना था कि राजनीतिक दल केवल एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगाने और सत्ता के समीकरण साधने में जुटे हुए हैं, जबकि बिहार जैसे राज्य में शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और आपदा प्रबंधन जैसे अत्यंत महत्वपूर्ण क्षेत्रों में भारी कमी है। उन्होंने कहा कि जब तक जनता खुद आगे नहीं आएगी और इन राजनीतिक दलों से सवाल नहीं पूछेगी, तब तक व्यवस्था में कोई सुधार नहीं होगा।

उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी पर भी प्रशांत किशोर ने अपने भाषण में सीधा प्रहार किया। हालांकि, प्राप्त जानकारी के अनुसार उन्होंने किस संदर्भ में सम्राट चौधरी पर हमला बोला, इसके विस्तृत ब्यौरे अभी पूरी तरह से सामने नहीं आए हैं, लेकिन यह स्पष्ट है कि उन्होंने राज्य सरकार के प्रमुख चेहरों को आड़े हाथों लिया। प्रशांत किशोर लगातार बिहार के विभिन्न जिलों का दौरा कर रहे हैं और अपनी जन सुराज यात्रा के माध्यम से मौजूदा सरकार की नीतियों की आलोचना कर रहे हैं। नवादा में उनकी यह सभा इसी कड़ी का एक हिस्सा थी, जहां उन्होंने स्थानीय समस्याओं को भी प्रमुखता से उठाया।

प्रशांत किशोर ने अपने संबोधन में बिहार के ऐतिहासिक संदर्भों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि बिहार कभी देश की राजनीति और शिक्षा का केंद्र हुआ करता था, लेकिन आज राज्य पिछड़ेपन का पर्याय बन गया है। इसके लिए उन्होंने उन नेताओं को जिम्मेदार ठहराया जो दशकों से सत्ता में रहे हैं और सत्ता के खेल में ही उलझे रहे। उन्होंने कहा कि जन सुराज का उद्देश्य ही यही है कि बिहार की खोई हुई गरिमा को वापस लाया जाए और एक ऐसी व्यवस्था बनाई जाए जहां आम नागरिक की आवाज सबसे ऊपर हो।

नवादा की इस सभा में बड़ी संख्या में स्थानीय लोग मौजूद थे। प्रशांत किशोर के तीखे तेवरों और सरकार के खिलाफ उनके बयानों को सुनकर वहां मौजूद लोगों ने भी अपनी प्रतिक्रियाएं दीं। जन सुराज अभियान के तहत प्रशांत किशोर लगातार गांव-गांव और शहर-शहर जाकर लोगों से मिल रहे हैं। उनका यह अभियान बिहार की राजनीति में एक नई बहस को जन्म दे रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि प्रशांत किशोर के ये हमले आने वाले दिनों में बिहार के राजनीतिक तापमान को और बढ़ा सकते हैं।

बुधवार को नवादा में दिए गए इस भाषण ने एक बार फिर साबित कर दिया कि प्रशांत किशोर बिहार की मौजूदा राजनीतिक व्यवस्था और उसके मुखियाओं के खिलाफ अपने आक्रामक रुख को और तेज कर रहे हैं। बाढ़ के मुद्दे पर सरकार को घेरना हो या केंद्र की राजनीति पर सवाल उठाना, प्रशांत किशोर ने हर मोर्चे पर नीतीश कुमार और उनकी सरकार को कठघरे में खड़ा करने का प्रयास किया। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि राज्य सरकार और भारतीय जनता पार्टी के नेता प्रशांत किशोर के इन आरोपों का क्या जवाब देते हैं और बिहार की जनता इस पूरे घटनाक्रम पर क्या रुख अपनाती है।