Wed, 07 Oct 20266:34 PM
Wed, Oct 7, 2026Updated 6:34 PM IST
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स्वामित्व योजना में रजिस्ट्री नहीं करने पर प्रदेशभर के पटवारियों पर कार्रवाई: देवास और आगर मालवा में बर्खास्तगी, गुना में 52 को टर्मिनेशन नोटिस; संघ ने काम बंद करने की दी चेतावनी

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मध्य प्रदेश में स्वामित्व योजना के तहत भू-अभिलेखों के अद्यतन और रजिस्ट्री कार्य में कथित लापरवाही को लेकर राजस्व विभाग द्वारा पटवारियों के खिलाफ शुरू की गई अनुशासनात्मक कार्रवाई अब प्रदेशव्यापी स्वरूप ले चुकी है। देवास जिले में दो प्रोबेशनर पटवारियों को सेवा से बर्खास्त किए जाने के बाद अब अन्य जिलों में भी इसी प्रकार की सख्त कार्यवाही सामने आई है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, आगर मालवा जिले में तीन पटवारियों को बर्खास्त किया गया है, जबकि गुना जिला प्रशासन ने चार पटवारियों को निलंबित करने के साथ ही जिले के सभी 52 पटवारियों को सेवा समाप्ति (टर्मिनेशन) का नोटिस जारी कर दिया है। इस व्यापक कार्रवाई के विरोध में पटवारी संघ ने उग्र रुख अपनाते हुए स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि प्रशासनिक दंडात्मक कार्रवाइयां नहीं रुकीं, तो वे सामूहिक रूप से कार्य बंद कर देंगे।

राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी स्वामित्व योजना का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को उनके आवासीय परिसरों का वैध स्वामित्व प्रदान करना और भू-अभिलेखों को डिजिटल रूप से अद्यतन रखना है। हालांकि, इस योजना के क्रियान्वयन में हो रही देरी और रजिस्ट्री कार्य पूर्ण न होने पर प्रशासन ने इसे गंभीरता से लिया है। देवास जिले से शुरू हुई यह कार्रवाई अब अन्य जिलों के लिए एक संकेत बन गई है कि शासन द्वारा निर्धारित लक्ष्यों और समय सीमाओं का पालन न करने पर जीरो टॉलरेंस नीति अपनाई जाएगी। देवास में जिन दो प्रोबेशनर पटवारियों को बर्खास्त किया गया है, उन पर स्वामित्व योजना के तहत आवंटित कार्यों को निर्धारित मानकों और समय सीमा के भीतर पूरा न करने का आरोप है। प्रोबेशन अवधि में होने के कारण इनके खिलाफ नियमानुसार सीधी बर्खास्तगी की कार्रवाई की गई है, जो राजस्व निरीक्षण मंडल और संबंधित अधिकारियों द्वारा की गई समीक्षा रिपोर्टों पर आधारित बताई जा रही है।

आगर मालवा जिले में हुई कार्रवाई ने स्थिति को और अधिक गंभीर बना दिया है। यहां तीन पटवारियों को सेवा से मुक्त किया गया है। सूत्रों के अनुसार, इन कर्मचारियों पर भी स्वामित्व योजना से जुड़े अभिलेखीय कार्यों और फील्ड वेरिफिकेशन में घोर लापरवाही बरतने के आरोप हैं। जिला प्रशासन ने इस बात पर जोर दिया है कि जनकल्याणकारी योजनाओं में किसी भी स्तर पर शिथिलता स्वीकार्य नहीं है। वहीं, गुना जिले में प्रशासन ने सबसे बड़ी और सामूहिक कार्रवाई करते हुए न केवल चार पटवारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित किया है, बल्कि जिले में कार्यरत सभी 52 पटवारियों को टर्मिनेशन का नोटिस थमा दिया है। कलेक्टर द्वारा जारी इस नोटिस में स्पष्ट किया गया है कि यदि निर्धारित समय सीमा के भीतर सुधार नहीं होता है या कार्यों की प्रगति संतोषजनक नहीं पाई जाती है, तो उनकी सेवाएं समाप्त कर दी जाएंगी। यह सामूहिक नोटिस राजस्व प्रशासन की ओर से पटवारियों को अंतिम चेतावनी के रूप में देखा जा रहा है और यह दर्शाता है कि स्वामित्व योजना के लक्ष्यों को लेकर प्रशासन कितना दबाव बनाए हुए है।

प्रशासन की इस सख्ती और लगातार हो रही बर्खास्तगी व निलंबन की कार्रवाइयों के खिलाफ पटवारी संघ ने अब खुली चुनौती दे दी है। संघ का कहना है कि पटवारियों पर बिना उचित सुनवाई और यथार्थ स्थिति को समझे एकतरफा कार्रवाई की जा रही है। संघ के प्रतिनिधियों ने आरोप लगाया है कि स्वामित्व योजना सहित अन्य राजस्व कार्यों में तकनीकी बाधाएं, स्टाफ की कमी और बुनियादी ढांचे की समस्याएं हैं, जिन्हें नजरअंदाज करके केवल पटवारियों को दंडित करना न्यायोचित नहीं है। संघ ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि यदि प्रशासन द्वारा पटवारियों के खिलाफ चल रही निलंबन और बर्खास्तगी की कार्रवाइयां तत्काल प्रभाव से नहीं रोकी जाती हैं और उनकी समस्याओं का समाधान नहीं निकाला जाता है, तो वे अनिश्चितकालीन कार्य बहिष्कार करेंगे। संघ ने चेतावनी दी है कि ऐसे में राजस्व संबंधी सभी कार्य, जिसमें नामांतरण, बंटवारा, सीमांकन और स्वामित्व योजना का काम शामिल है, पूरी तरह ठप्प हो जाएगा, जिसकी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।

यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब राज्य सरकार स्वामित्व योजना को तेजी से पूर्ण करने के निर्देश दे रही है। पटवारियों पर दबाव बढ़ने से राजस्व विभाग में असंतोष व्याप्त है। जानकारों का मानना है कि यदि प्रशासन और पटवारी संघ के बीच जल्द कोई समझौता या संवाद नहीं हुआ, तो आगामी दिनों में प्रदेश के कई अन्य जिलों में भी इसी प्रकार की हड़ताल या कार्य बहिष्कार देखने को मिल सकता है, जिससे आम जनता को राजस्व संबंधी कार्यों में भारी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। फिलहाल, देवास, आगर मालवा और गुना में हुई कार्रवाइयों ने पूरे प्रदेश के राजस्व कर्मचारियों में खलबली मचा दी है और वे अब अपनी मांगों को लेकर एकजुट होकर प्रशासन से वार्ता की मांग कर रहे हैं।