किशनगंज: केस डायरी समय पर नहीं भेजने पर बहादुरगंज थानाध्यक्ष का वेतन रोकने की अनुशंसा, अपर सत्र न्यायाधीश ने SP को लिखा पत्र

किशनगंज। बिहार के किशनगंज जिले में व्यवहार न्यायालय ने पुलिस प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सख्त रुख अपनाते हुए बहादुरगंज थानाध्यक्ष के खिलाफ कार्रवाई की सिफारिश की है। अदालत ने केस डायरी निर्धारित समय पर न्यायालय में पेश न करने के मामले में बहादुरगंज थानाध्यक्ष सुनील कुमार के विरुद्ध कड़ा कदम उठाया है। किशनगंज के अपर सत्र न्यायाधीश प्रथम सुरेश कुमार की अदालत ने इस संबंध में पुलिस अधीक्षक (SP) को एक औपचारिक पत्र लिखकर थानाध्यक्ष के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई करने और उनका वेतन रोकने की अनुशंसा की है। यह मामला न्यायिक प्रक्रियाओं में पुलिस की ओर से की जा रही देरी और लापरवाही को लेकर अदालत की बढ़ती चिंता को स्पष्ट रूप से दर्शाता है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, बहादुरगंज थाना क्षेत्र से जुड़े एक मामले में अग्रिम जमानत याचिका पर सुनवाई होनी थी। इस प्रकार की सुनवाई के दौरान संबंधित थाने की केस डायरी का न्यायालय में समय पर उपलब्ध होना अत्यंत आवश्यक होता है, क्योंकि न्यायाधीश उसी दस्तावेज के आधार पर मामले के तथ्यों का अवलोकन करते हैं और अग्रिम जमानत देने या खारिज करने का निर्णय लेते हैं। हालांकि, बहादुरगंज थानाध्यक्ष सुनील कुमार की ओर से निर्धारित तिथि तक अदालत में केस डायरी पेश नहीं की गई। इस कारण से न्यायालय के समक्ष मामले की सुनवाई आगे बढ़ाने में गंभीर बाधा उत्पन्न हो गई और अग्रिम जमानत की सुनवाई को टालना पड़ा।
केस डायरी समय पर न भेजे जाने की इस लापरवाही को अपर सत्र न्यायाधीश प्रथम सुरेश कुमार ने बेहद गंभीरता से लिया। उन्होंने इसे न्यायिक प्रक्रिया में अनावश्यक विलंब और अदालत के आदेशों के प्रति उदासीनता माना। इसके बाद न्यायाधीश ने बहादुरगंज थानाध्यक्ष सुनील कुमार के खिलाफ कार्रवाई का निर्देश दिया। अदालत ने किशनगंज के पुलिस अधीक्षक को संबोधित एक पत्र जारी किया है, जिसमें थानाध्यक्ष के खिलाफ विभागीय कार्रवाई करने की बात कही गई है। पत्र में विशेष रूप से यह अनुशंसा की गई है कि जब तक थानाध्यक्ष अपनी इस लापरवाही का संतोषजनक जवाब नहीं देते या निर्देशों का पालन नहीं करते, तब तक उनका वेतन रोक दिया जाए।
न्यायिक विशेषज्ञों और कानूनी जानकारों के अनुसार, किसी भी आपराधिक या दीवानी मामले में केस डायरी एक अत्यंत महत्वपूर्ण दस्तावेज होती है। इसमें प्राथमिकी दर्ज होने से लेकर जांच की प्रगति, गवाहों के बयान, सबूतों की बरामदगी और अन्य सभी न्यायिक एवं पुलिस कार्रवाइयों का क्रमबद्ध विवरण दर्ज होता है। जब कोई अभियुक्त या आरोपी अग्रिम जमानत के लिए न्यायालय का दरवाजा खटखटाता है, तो न्यायालय को यह देखना होता है कि उसके खिलाफ किस धारा के तहत मामला दर्ज है, जांच किस स्थिति में है और क्या उसे गिरफ्तारी से पूर्व राहत दी जा सकती है। इन सभी पहलुओं का सटीक मूल्यांकन केवल केस डायरी के अध्ययन के बाद ही संभव हो पाता है। यदि थाना स्तर से यह डायरी समय पर अदालत नहीं पहुंचती है, तो न्यायालय की कार्यवाही ठप हो जाती है। इससे न केवल न्यायिक समय की बर्बादी होती है, बल्कि वादकारियों को भी भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है और उन्हें बिना सुनवाई के ही अदालत से लौटना पड़ता है।
बहादुरगंज थानाध्यक्ष के मामले में भी यही स्थिति देखने को मिली। केस डायरी की अनुपस्थिति में अदालत अग्रिम जमानत याचिका पर कोई भी विधिक निर्णय लेने की स्थिति में नहीं थी, जिसके परिणामस्वरूप सुनवाई की अगली तिथि निर्धारित करनी पड़ी। अदालत का मानना है कि पुलिस अधिकारियों की ऐसी लापरवाही से न्यायपालिका की गरिमा और न्याय प्रणाली की विश्वसनीयता प्रभावित होती है।
अपर सत्र न्यायाधीश सुरेश कुमार द्वारा पुलिस अधीक्षक को लिखे गए इस पत्र को जिले के पुलिस महकमे में गंभीरता से लिया जा रहा है। आमतौर पर न्यायालय ऐसे मामलों में पहले नोटिस जारी करते हैं, लेकिन सीधे वेतन रोकने की अनुशंसा किए जाने से यह संदेश गया है कि अदालत अब पुलिस की ओर से की जाने वाली देरी और लापरवाही के प्रति शून्य सहिष्णुता की नीति अपना रही है। पुलिस अधीक्षक कार्यालय से अब यह अपेक्षा की जा रही है कि वे न्यायालय के इस पत्र पर संज्ञान लेते हुए बहादुरगंज थानाध्यक्ष सुनील कुमार से स्पष्टीकरण मांगेंगे और नियमानुसार आगे की कार्रवाई करेंगे।
यह घटना किशनगंज जिले के अन्य थानाध्यक्षों और पुलिस पदाधिकारियों के लिए भी एक स्पष्ट चेतावनी के रूप में देखी जा रही है। न्यायालय के आदेशों का समय पर पालन करना और न्यायिक दस्तावेजों को बिना किसी देरी के अदालत में पेश करना पुलिस का मूलभूत दायित्व है। इस प्रकार की कार्रवाई से भविष्य में अन्य थानों में भी केस डायरी और अन्य न्यायिक दस्तावेज समय पर भेजने को लेकर सतर्कता बढ़ने की उम्मीद है। फिलहाल, जिस मामले में केस डायरी पेश नहीं होने के कारण यह कार्रवाई हुई है, उसमें अग्रिम जमानत की सुनवाई टल चुकी है और अब यह देखना होगा कि अगली तिथि पर बहादुरगंज थाने से केस डायरी उपलब्ध कराई जाती है या नहीं, तथा पुलिस अधीक्षक थानाध्यक्ष के वेतन रोकने की अदालती अनुशंसा पर क्या अंतिम निर्णय लेते हैं।

