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Thu, Oct 8, 2026Updated 8:37 AM IST
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पटना: 100 करोड़ की ठगी का खुलासा, चार्टर्ड अकाउंटेंट श्रीधर पाठक गिरफ्तार; पीड़ितों ने सुनाई कर्ज और बर्बादी की दास्तां

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पटना। बिहार की राजधानी पटना में निवेश के नाम पर सौ करोड़ रुपये की विशाल धोखाधड़ी करने वाले आरोपी चार्टर्ड अकाउंटेंट श्रीधर पाठक को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। लगभग दो वर्षों से फरार चल रहे इस आरोपी की गिरफ्तारी ने न केवल कानून प्रवर्तन एजेंसियों को राहत दी है, बल्कि उन सैकड़ों पीड़ितों के जख्मों को भी हरा कर दिया है जिन्होंने अपने भविष्य को संवारने की उम्मीद में अपनी गाढ़ी कमाई इस कंपनी में लगाई थी। पुलिस सूत्रों के अनुसार, श्रीधर पाठक ने लोगों को उनके निवेश किए गए धन को दोगुना या तिगुना करने का झांसा देकर यह विशाल वित्तीय अपराध किया था। अब जब वह सलाखों के पीछे है, तो पीड़ितों की ओर से सामने आ रही कहानियां इस ठगी के साम्राज्य की गहराई और उससे जुड़े मानवीय दर्द को बयां करती हैं।

जांच में सामने आया है कि श्रीधर पाठक ने एक व्यवस्थित तरीके से लोगों को अपने जाल में फंसाया। एक चार्टर्ड अकाउंटेंट होने के नाते, उसकी पेशेवर साख और वित्तीय मामलों की समझ ने आम जनमानस में उसके प्रति विश्वास पैदा किया। इसी विश्वास का दुरुपयोग करते हुए उसने ऐसी स्कीम पेश की जिसमें निवेशकों को यकीन दिलाया गया कि उनका पैसा सुरक्षित है और कुछ ही समय में कई गुना हो जाएगा। स्रोत सामग्री के मुताबिक, आरोपी ने स्पष्ट रूप से रुपये को तीन गुना करने का वादा किया था। वित्तीय बाजारों में किसी भी वैध निवेश में इतनी तेजी से इतना अधिक रिटर्न मिलना असंभव होता है, लेकिन लालच और पेशेवर पहचान के आवरण ने लोगों को इस तथ्य को नजरअंदाज करने पर मजबूर कर दिया। जब वादे पूरे नहीं हुए और कंपनी ने भुगतान बंद कर दिया, तो निवेशकों को एहसास हुआ कि उनका पैसा डूब चुका है।

इस मामले की सबसे दर्दनाक तस्वीर उन पीड़ितों की है जिन्होंने केवल अतिरिक्त आय के लिए नहीं, बल्कि जीवन की अनिवार्य जरूरतों के लिए पैसा लगाया था। कई परिवारों ने अपने बच्चों की शादी, विशेषकर बेटियों के विवाह के लिए वर्षों तक जोड़ी गई पूंजी श्रीधर पाठक की कंपनी में निवेश कर दी थी। भारतीय समाज में बेटी की शादी को लेकर माता-पिता की चिंता और भावनात्मक जुड़ाव को देखते हुए, यह निवेश उनके लिए केवल वित्तीय लेनदेन नहीं, बल्कि सामाजिक प्रतिष्ठा और पारिवारिक कर्तव्य का प्रश्न था। अब जब यह पैसा डूब गया है, तो ये परिवार गहरे संकट में हैं। स्रोत में उल्लिखित एक पीड़ित ने बताया कि वे अब कर्ज लेकर अपनी बेटी की शादी करने के लिए विवश हैं। यह स्थिति न केवल उनकी वर्तमान आर्थिक स्थिति को खराब करती है, बल्कि उन्हें भविष्य के लिए भारी ऋण के बोझ तले भी दबा देती है।

श्रीधर पाठक की गिरफ्तारी दो साल की लंबी अवधि के बाद हुई है। यह समय अंतराल इस बात का संकेत है कि आरोपी ने कानून से बचने के लिए सुनियोजित रणनीति अपनाई होगी। ऐसे वित्तीय अपराधों में आरोपी अक्सर फरार हो जाते हैं या सबूत मिटा देते हैं, जिससे जांच एजेंसियों के लिए उन्हें पकड़ना और सबूत जुटाना चुनौतीपूर्ण हो जाता है। हालांकि, पुलिस की ताजा कार्रवाई ने पीड़ितों को न्याय की उम्मीद दी है। फिर भी, यह स्पष्ट है कि केवल गिरफ्तारी से पीड़ितों का वित्तीय नुकसान भरपाई नहीं होगा। सौ करोड़ रुपये की यह राशि किसी एक व्यक्ति की संपत्ति नहीं है, बल्कि यह सैकड़ों छोटे और मध्यम वर्गीय परिवारों की जीवन भर की बचत, बुजुर्गों की पेंशन और युवाओं के करियर बनाने की पूंजी का संग्रह है।

यह मामला बिहार और विशेषकर पटना में अनियमित निवेश योजनाओं के खतरों की ओर पुनः ध्यान आकर्षित करता है। चार्टर्ड अकाउंटेंट जैसे प्रमाणित पेशेवर द्वारा किए गए इस अपराध ने नियामक प्रणालियों और पेशेवर नैतिकता पर भी सवाल खड़े किए हैं। आम तौर पर लोग सीए या वित्तीय सलाहकारों पर अंधविश्वास करते हैं, यह मानते हुए कि वे कानून और नैतिकता के दायरे में काम करेंगे। श्रीधर पाठक का मामला दर्शाता है कि कैसे इस विश्वास का दुरुपयोग करके बड़े पैमाने पर ठगी को अंजाम दिया जा सकता है। पीड़ितों के बयानों से यह भी स्पष्ट होता है कि ठगी का शिकार होने वाले लोग अक्सर अपनी सामाजिक प्रतिष्ठा या भविष्य की सुरक्षा को लेकर इतने चिंतित होते हैं कि वे उचित परिश्रम (due diligence) किए बिना निवेश कर बैठते हैं।

फिलहाल, पुलिस की प्राथमिकता आरोपी से पूछताछ करके यह पता लगाना है कि सौ करोड़ रुपये की इस राशि का उपयोग कहां किया गया और क्या इसे रिकवर किया जा सकता है। साथ ही, यह जांचना भी आवश्यक है कि क्या इस ठगी के साम्राज्य में अन्य सहयोगी या कंपनियां भी शामिल थीं। पीड़ितों का दर्द और उनकी वर्तमान दयनीय स्थिति, विशेषकर वे परिवार जो अब कर्ज के सहारे बेटी की शादी कर रहे हैं, इस बात की तत्काल आवश्यकता को रेखांकित करते हैं कि जांच प्रक्रिया पारदर्शी और समयबद्ध हो। कानूनी प्रक्रिया के तहत आरोपी के खिलाफ सख्त कार्रवाई के साथ-साथ पीड़ितों को न्याय दिलाने की दिशा में ठोस कदम उठाना अब प्रशासन की जिम्मेदारी है। यह घटना भविष्य में निवेशकों के लिए एक कड़वे सबक के रूप में भी सामने आई है कि अवास्तविक रिटर्न के वादों और पेशेवर पहचान के पीछे छिपे जोखिमों को पहचानना अत्यंत आवश्यक है।