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Thu, Oct 8, 2026Updated 8:39 AM IST
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नालंदा में 400 व्यापारी वाणिज्य कर विभाग के रडार पर: 2017 से नहीं किया नगद कर का भुगतान, अब नोटिस हुआ जारी

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बिहार के नालंदा जिले में वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) के तहत कर चोरी और भुगतान में अनियमितता को लेकर वाणिज्य कर विभाग ने बड़ी कार्रवाई की तैयारी शुरू कर दी है। विभाग ने उन सभी व्यापारियों और कारोबारियों के खिलाफ सख्त रुख अख्तियार कर लिया है, जिन्होंने वर्ष 2017 में जीएसटी लागू होने के बाद से अब तक नगद कर का भुगतान नहीं किया है। इस मामले में वाणिज्य कर विभाग ने नालंदा जिले में लगभग 400 ऐसे कारोबारियों को चिह्नित किया है, जिन्हें नियमों के उल्लंघन का दोषी पाया गया है। इन सभी चिह्नित व्यापारियों को विभाग की ओर से आधिकारिक तौर पर नोटिस जारी कर दिया गया है।

इस पूरे मामले की जानकारी देते हुए राज्य कर संयुक्त आयुक्त प्रेमचंद भारती ने स्पष्ट किया कि नालंदा जिले में अब तक ऐसे करीब 400 कारोबारियों को चिह्नित किया जा चुका है, जिन्होंने जीएसटी व्यवस्था लागू होने के बाद से लगातार नगद कर का भुगतान करने में लापरवाही बरती है या जानबूझकर इससे बचते रहे हैं। उन्होंने बताया कि विभाग द्वारा किए गए गहन सर्वेक्षण और रिकॉर्ड के विश्लेषण के आधार पर इन व्यापारियों की पहचान की गई है। संयुक्त आयुक्त प्रेमचंद भारती के अनुसार, विभाग ने इस मामले में पूरी तरह से कानूनी प्रक्रिया का पालन करते हुए संबंधित व्यापारियों को नोटिस भेजे हैं, ताकि उनसे स्पष्टीकरण मांगा जा सके और बकाया राशि की वसूली सुनिश्चित की जा सके।

गौरतलब है कि देश भर में एक जुलाई 2017 से वस्तु एवं सेवा कर यानी जीएसटी प्रणाली को लागू किया गया था। इस नई कर प्रणाली का मुख्य उद्देश्य अप्रत्यक्ष करों को सरल बनाना, कर चोरी को रोकना और राजस्व संग्रहण में पारदर्शिता लाना था। जीएसटी कानून के प्रावधानों के अनुसार, पंजीकृत व्यापारियों को अपने कारोबार के आधार पर निर्धारित समय सीमा के भीतर कर रिटर्न दाखिल करना होता है और बकाया कर का भुगतान नगद या इनपुट टैक्स क्रेडिट के माध्यम से करना होता है। हालांकि, नालंदा जिले में सामने आए इस मामले से यह स्पष्ट होता है कि एक बड़ी संख्या में व्यापारियों ने वर्ष 2017 से लेकर अब तक नगद कर का भुगतान नहीं किया है, जो सीधे तौर पर जीएसटी नियमों का उल्लंघन माना जाता है।

वाणिज्य कर विभाग के सूत्रों के अनुसार, विभाग पिछले कुछ समय से कर चोरी और बकाया भुगतान न करने वाले व्यापारियों के डेटा को खंगाल रहा था। इसी क्रम में नालंदा जिले में करीब 400 ऐसे कारोबारियों का पता चला, जिनके खातों में वर्ष 2017 से नगद कर का कोई भुगतान दर्ज नहीं है। विभाग ने जब इन रिकॉर्ड्स का मिलान किया तो पाया गया कि इन व्यापारियों ने जीएसटी पोर्टल पर अपनी बिक्री और खरीद का विवरण तो दर्ज किया हो सकता है, लेकिन सरकार के खजाने में नगद कर के रूप में देय राशि जमा नहीं कराई गई है। इसे देखते हुए विभाग ने तत्काल प्रभाव से कार्रवाई करते हुए सभी 400 व्यापारियों को नोटिस जारी करने का निर्णय लिया।

राज्य कर संयुक्त आयुक्त प्रेमचंद भारती ने इस बात पर जोर दिया कि विभाग की यह कार्रवाई किसी भी व्यापारी को परेशान करने के उद्देश्य से नहीं, बल्कि कर अनुपालन को सुनिश्चित करने और सरकारी राजस्व की सुरक्षा के लिए की जा रही है। उन्होंने कहा कि जिन व्यापारियों को नोटिस जारी किए गए हैं, उन्हें निर्धारित समय सीमा के भीतर अपना पक्ष रखने और बकाया कर का भुगतान करने का अवसर दिया जाएगा। यदि कोई व्यापारी नोटिस मिलने के बाद भी कर का भुगतान नहीं करता है या संतोषजनक जवाब नहीं देता है, तो उसके खिलाफ जीएसटी अधिनियम के तहत आगे की कठोर कानूनी कार्रवाई की जाएगी। इसमें बकाया कर के साथ-साथ भारी जुर्माना और ब्याज की वसूली भी शामिल हो सकती है।

विभाग के इस सख्त कदम से नालंदा जिले के व्यापारिक हलकों में हड़कंप मच गया है। जिन 400 व्यापारियों को चिह्नित किया गया है, उनमें विभिन्न क्षेत्रों के कारोबारी शामिल हैं। व्यापारियों को अब विभाग द्वारा जारी नोटिस का जवाब देने और अपने बकाया कर का हिसाब चुकता करने की चिंता सता रही है। वाणिज्य कर विभाग ने स्पष्ट कर दिया है कि कर चोरी या भुगतान में देरी को लेकर अब किसी भी प्रकार की ढिलाई नहीं बरती जाएगी। विभाग लगातार ऐसे मामलों की निगरानी कर रहा है जहां कर नियमों का पालन नहीं किया जा रहा है।

ज्ञात हो कि जीएसटी परिषद और केंद्र व राज्य सरकारें लगातार कर प्रणाली को अधिक पारदर्शी और सख्त बनाने की दिशा में काम कर रही हैं। तकनीकी अपग्रेडेशन और डेटा एनालिटिक्स के उपयोग से अब विभाग के लिए उन व्यापारियों को पकड़ना आसान हो गया है जो कर भुगतान से बचने का प्रयास करते हैं। नालंदा में 400 व्यापारियों के खिलाफ हुई यह कार्रवाई इसी तकनीकी निगरानी और विभागीय सतर्कता का परिणाम है।

अधिकारियों का कहना है कि यह अभियान केवल नालंदा जिले तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे राज्य में ऐसे व्यापारियों की पहचान की जा रही है जिन्होंने 2017 से नगद कर का भुगतान नहीं किया है। राज्य कर संयुक्त आयुक्त प्रेमचंद भारती ने सभी व्यापारियों से अपील की है कि वे स्वप्रेरणा से अपने कर बकाया की जांच करें और यदि कोई राशि देय है, तो उसे बिना किसी नोटिस के तुरंत जमा कर दें। ऐसा करने पर उन्हें कानूनी जटिलताओं और अतिरिक्त जुर्माने से बचा जा सकता है। वाणिज्य कर विभाग ने साफ कर दिया है कि जीएसटी कानून का पालन हर हाल में सुनिश्चित कराया जाएगा और कर चोरी करने वालों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।