सतना से गुजरने वाली 17 ट्रेनों के रूट में बदलाव: 8 से 14 अक्टूबर तक रेवांचल एक्सप्रेस समेत कई गाड़ियां जबलपुर-इटारसी होकर चलेंगी, बीना यार्ड रीमॉडलिंग का असर

वंदे भारत न्यूज़, सतना। पश्चिम मध्य रेलवे के कटनी-बीना रेलखंड पर चल रहे बड़े बुनियादी ढांचा कार्यों के कारण सतना रेलवे जंक्शन से होकर गुजरने वाली 17 प्रमुख ट्रेनों के मार्गों में अस्थायी बदलाव किया गया है। यह परिवर्तन 8 अक्टूबर से 14 अक्टूबर 2026 तक लागू रहेगा। इस अवधि में रीवा और रानी कमलापति (भोपाल) के बीच चलने वाली प्रतिष्ठित रेवांचल सुपरफास्ट एक्सप्रेस सहित कुल 17 ट्रेनें अपने निर्धारित मार्ग की बजाय वैकल्पिक रूट से संचालित की जाएंगी। रेलवे अधिकारियों द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, ये सभी ट्रेनें अब जबलपुर और इटारसी होकर अपने गंतव्य की ओर जाएंगी।
रेलवे सूत्रों के मुताबिक, मार्गों में इस व्यापक बदलाव का मुख्य कारण बीना और आगासौद रेलवे स्टेशनों पर शुरू होने वाला यार्ड रीमॉडलिंग का महत्वपूर्ण कार्य है। पश्चिम मध्य रेलवे ने कटनी-बीना रेलखंड पर यात्री सुविधाओं और ट्रेनों के संचालन को बेहतर बनाने के लिए यह बड़ी परियोजना तैयार की है। यार्ड रीमॉडलिंग के तहत रेलवे ट्रैक, सिग्नलिंग प्रणाली और प्लेटफॉर्म से जुड़े बुनियादी ढांचे में तकनीकी सुधार किए जाते हैं। इस दौरान भारी मशीनरी का उपयोग होता है और सुरक्षा मानकों को ध्यान में रखते हुए उस विशिष्ट खंड पर ट्रेनों का सामान्य संचालन संभव नहीं रहता। यही वजह है कि रेलवे प्रशासन ने इन सात दिनों के लिए ट्रेनों को डायवर्ट करने का निर्णय लिया है।
प्रभावित होने वाली ट्रेनों में सबसे प्रमुख नाम रीवा-रानी कमलापति रेवांचल सुपरफास्ट एक्सप्रेस का है। यह ट्रेन विंध्य क्षेत्र और राज्य की राजधानी भोपाल के बीच यात्रियों के आवागमन का एक अत्यंत महत्वपूर्ण साधन है। दैनिक रूप से कामकाज, शिक्षा और चिकित्सा के लिए इस ट्रेन पर निर्भर रहने वाले हजारों यात्रियों को 8 से 14 अक्टूबर के बीच अपनी यात्रा योजनाओं में बदलाव करना होगा। इसके अलावा, सतना जंक्शन से गुजरने वाली अन्य 16 ट्रेनों के रूट भी इसी तरह प्रभावित होंगे। हालांकि, स्रोत जानकारी में सभी 17 ट्रेनों की विस्तृत सूची या उनके संशोधित समयसारणी का उल्लेख नहीं किया गया है, लेकिन यह स्पष्ट है कि कटनी-बीना खंड से गुजरने वाली अधिकांश लंबी दूरी की गाड़ियों को जबलपुर-इटारसी रूट पर शिफ्ट किया जाएगा।
जबलपुर और इटारसी होकर ट्रेनों के संचालन का सीधा अर्थ यह है कि यात्रियों की यात्रा के समय में वृद्धि होगी। मूल कटनी-बीना रूट की तुलना में जबलपुर-इटारसी का रास्ता भौगोलिक रूप से लंबा पड़ता है। ऐसे में, जो यात्री इन दिनों सतना, रीवा, भोपाल, इटारसी या आसपास के स्टेशनों के बीच यात्रा करने की योजना बना रहे हैं, उन्हें पहले से अधिक समय का अनुमान रखना होगा। वैकल्पिक मार्ग पर ट्रेनों की गति और क्रॉसिंग के कारण कुछ ट्रेनों के आगमन और प्रस्थान के समय में देरी की संभावना भी बनी रहती है।
सतना रेलवे जंक्शन उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के विंध्य क्षेत्र का एक प्रमुख रेलवे केंद्र है। यहां से देश के कई बड़े शहरों के लिए नियमित ट्रेनें संचालित होती हैं। यार्ड रीमॉडलिंग जैसे तकनीकी कार्य भले ही अल्पावधि में यात्रियों को असुविधा पहुंचाते हों, लेकिन रेलवे प्रशासन का मानना है कि कार्य पूरा होने के बाद इस खंड पर ट्रेनों की रफ्तार बढ़ेगी, सुरक्षा मानक और अधिक मजबूत होंगे और भविष्य में नई ट्रेनों के संचालन की क्षमता भी विकसित होगी। बीना और आगासौद स्टेशनों पर होने वाले इस कार्य को पश्चिम मध्य रेलवे की एक प्राथमिकता वाली परियोजना के रूप में देखा जा रहा है।
यात्रियों की सुविधा और भ्रम की स्थिति से बचने के लिए रेलवे ने आम जनता से अपील की है कि वे अपनी यात्रा शुरू करने से पहले ट्रेनों के वर्तमान स्टेटस और संशोधित मार्ग की पूरी जानकारी प्राप्त कर लें। इसके लिए यात्री भारतीय रेलवे के आधिकारिक हेल्पलाइन नंबर 139 पर कॉल कर सकते हैं। इसके अलावा, एनटीईएस (NTES) मोबाइल ऐप और रेलवे की आधिकारिक वेबसाइट पर भी ट्रेनों के डायवर्जन और समय में होने वाले बदलावों की अपडेट लगातार उपलब्ध कराई जाती है। सतना रेलवे स्टेशन पर मौजूद एनक्वायरी काउंटर से भी यात्री सीधे जानकारी ले सकते हैं।
यह ध्यान दिया जाना चाहिए कि यह रूट परिवर्तन पूर्णतः अस्थायी है और केवल 8 अक्टूबर से 14 अक्टूबर 2026 की निर्धारित अवधि के लिए ही लागू रहेगा। 15 अक्टूबर से ट्रेनों का संचालन पुनः अपने नियमित कटनी-बीना मार्ग पर सामान्य रूप से शुरू होने की उम्मीद है, बशर्ते यार्ड रीमॉडलिंग का कार्य निर्धारित समय सीमा के भीतर पूरा हो जाए। यदि कार्य में किसी प्रकार की तकनीकी देरी होती है, तो रेलवे द्वारा आगे की सूचना जारी की जा सकती है। फिलहाल, रेलवे प्रशासन ने यात्रियों से सहयोग की अपील करते हुए कहा है कि यह बदलाव भविष्य में बेहतर और तेज रेल सेवाएं प्रदान करने की दिशा में उठाया गया एक आवश्यक कदम है।

