Supreme Court said- the difference between mother and step mother is wrong | सुप्रीम कोर्ट बोला- मां और सौतेली मां में अंतर गलत: बच्चे के जीवन में भूमिका देखें, एयरफोर्स ने सौतेली मां को पेंशन नहीं दी थी

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नई दिल्ली2 घंटे पहले

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सुप्रीम कोर्ट ने कहा- पेंशन के मामलों में वायुसेना को लचीलापन बरतना चाहिए। (फाइल) - Dainik Bhaskar

सुप्रीम कोर्ट ने कहा- पेंशन के मामलों में वायुसेना को लचीलापन बरतना चाहिए। (फाइल)

भारतीय वायुसेना के सौतेली मां को पेंशन लाभ देने से इनकार करने के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई की। कोर्ट ने कहा- पेंशन योजनाओं में ‘मां’ और ‘जैविक मां’ में अंतर नहीं किया जाना चाहिए।

कोर्ट ने कहा- हर मामले को उसके विशिष्ट तथ्यों के आधार पर देखा जाना चाहिए और यह तय किया जाना चाहिए कि बच्चे के जीवन में मां की भूमिका वास्तव में किसने निभाई।

मामले की सुनवाई जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस उज्जल भुइयां और जस्टिस एन. कोटिश्वर सिंह ने की। जस्टिस भुइयां ने कहा- पेंशन मामले में ‘मां का जैविक मां होना जरूरी नहीं है।

साल 2010 में वायुसेना ने अपीलकर्ता का विशेष पारिवारिक पेंशन का दावा खारिज किया था। मामले की अगली सुनवाई 18 सितंबर को होगी।

बेंच का वायुसेना से सवाल: अगर जन्म देने वाली मां ने बच्चे को छोड़ दिया और सालों तक दादी ने उसका पालन-पोषण किया, तो क्या बाद में लौटने पर जैविक मां को लाभ मिलेगा? वहीं, यदि सौतेली मां ने जन्म से ही बच्चे की देखभाल की हो, तो उसे लाभ क्यों न मिले?

जवाब: मौजूदा नियमों (वायुसेना पेंशन नियम, 1961) में सौतेली मां को पेंशन देने का प्रावधान नहीं है और इस मामले को पहले कभी चुनौती नहीं दी गई।

एक्सपर्ट कमेंट: सुप्रीम कोर्ट के वकील विराग गुप्ता ​​​​​​​

  • SC में जस्टिस सूर्यकांत की बेंच ने इसके पहले पुरुषों के साथ महिला अधिकारियों की समानता के लिए अनेक आदेश पारित किए थे। जजों के मुताबिक मामले के विशेष तथ्यों के अनुसार पेंशन के हर मामले का निर्धारण करके उनका सामाजिक लाभ मिलना चाहिए।
  • इसलिए मां के दायरे में सौतेली मां को भी शामिल करना चाहिए। लेकिन वायुसेवा के वकील के वकील के मुताबिक वर्तमान कानून के अनुसार सौतेली मां को पेंशन नहीं मिल सकती। जजों ने मौखिक आदेश देकर वायु सेना को मामले में पुनर्विचार के आदेश दिए हैं।
  • वर्तमान नियमों के अनुसार यदि वायुसेना ने पेंशन देने से इनकार कर दिया तो सौतेली मां के हक में पेंशन के लिए जजों को संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत न्यायिक आदेश पारित करना होगा।

इस मामले का प्रभाव

गुप्ता के मुताबिक, दत्तक पुत्र, लिव इन और दूसरी पत्नी के कानूनी अधिकारों के बारे में अनेक फैसले हैं। सौतेली मां को जैविक मां के समान कानूनी अधिकार देने से सरकार की अन्य पेंशन योजनाओं के दायरे का विस्तार हो सकता है, लेकिन इसके लिए संसद और सरकार को पेंशन के साथ पारिवारिक और उत्तराधिकार के कई कानूनों में बदलाव करना होगा।

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