Mon, 12 Oct 20263:04 PM
Mon, Oct 12, 2026Updated 3:04 PM IST
होम › पंजाब

बेअंत सिंह की प्रतिमा पर सियासी घमासान: रवनीत बिट्टू ने कांग्रेस प्रधान परगट सिंह को दी चुनौती, कहा- एतराज है तो सम्मान से समाधि पर स्थापित कर देंगे

WhatsAppFacebookX

चंडीगढ़/लुधियाना। पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री स्वर्गीय सरदार बेअंत सिंह की प्रतिमा को लेकर राज्य की राजनीति एक बार फिर गर्मा गई है। भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू ने इस मुद्दे पर पंजाब कांग्रेस के नवनियुक्त प्रदेश प्रधान परगट सिंह पर सीधा निशाना साधा है। बिट्टू ने परगट सिंह को खुली चुनौती देते हुए कहा कि यदि उन्हें सरदार बेअंत सिंह की प्रतिमा (बुत) से कोई एतराज है, तो वे इसे स्पष्ट रूप से बता दें। उन्होंने यह भी प्रस्ताव दिया कि अगर कांग्रेस को चंडीगढ़ में लगी इस प्रतिमा पर आपत्ति है, तो इसे पूरी इज्जत और सम्मान के साथ उनकी समाधि स्थल पर स्थापित किया जा सकता है।

पूर्व केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू ने चंडीगढ़ में जारी इस विवाद पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि सरदार बेअंत सिंह पंजाब के एक ऐसे मुख्यमंत्री रहे हैं, जिन्होंने राज्य में आतंकवाद के सबसे कठिन दौर में सूबे की कमान संभाली थी। उनके योगदान को किसी भी राजनीतिक दल द्वारा नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। बिट्टू ने परगट सिंह से सवाल करते हुए पूछा कि क्या कांग्रेस पार्टी को अपने ही पूर्व मुख्यमंत्री की प्रतिमा से कोई परेशानी है? उन्होंने कहा कि अगर परगट सिंह या कांग्रेस के किसी अन्य नेता को इस प्रतिमा के वर्तमान स्थान पर लगने से कोई वैचारिक या राजनीतिक एतराज है, तो उन्हें डरने या छिपाने की जरूरत नहीं है, बल्कि उन्हें जनता के सामने आकर अपनी बात स्पष्ट करनी चाहिए।

बिट्टू ने आगे कहा कि सरदार बेअंत सिंह का सम्मान सर्वोपरि होना चाहिए। उन्होंने सुझाव दिया कि यदि किसी कारणवश यह प्रतिमा मौजूदा जगह पर नहीं रह सकती, तो इसे अत्यंत गरिमा और सम्मान के साथ उनकी समाधि पर ले जाकर स्थापित किया जा सकता है। यह कदम न केवल पूर्व मुख्यमंत्री के प्रति श्रद्धांजलि होगी, बल्कि इससे राजनीतिक विवादों का भी शांतिपूर्ण समाधान निकल सकेगा। भाजपा नेता ने जोर देकर कहा कि बेअंत सिंह ने पंजाब के लिए जो बलिदान दिया है, उसका राजनीतिकरण नहीं होना चाहिए, लेकिन अगर कांग्रेस खुद ऐसा कर रही है, तो उन्हें इसके बारे में ईमानदारी से बताना होगा।

इस पूरे मामले की पृष्ठभूमि को समझना आवश्यक है। स्वर्गीय सरदार बेअंत सिंह 1992 से 1995 तक पंजाब के मुख्यमंत्री रहे थे। उनका कार्यकाल पंजाब के इतिहास में सबसे संवेदनशील और कठिन माना जाता है, जब राज्य आतंकवाद की गंभीर समस्या से जूझ रहा था। बेअंत सिंह ने कड़ी सुरक्षा चुनौतियों के बीच राज्य में शांति और कानून व्यवस्था बहाल करने के लिए कई कड़े कदम उठाए थे। 31 अगस्त 1995 को चंडीगढ़ स्थित पंजाब सिविल सचिवालय के बाहर एक आत्मघाती हमले में उनकी हत्या कर दी गई थी। उनके निधन के बाद, उनके सम्मान में चंडीगढ़ में एक प्रतिमा स्थापित की गई थी, जो अब राजनीतिक बहस का केंद्र बन गई है।

पंजाब की मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों में यह विवाद इसलिए भी महत्वपूर्ण हो जाता है क्योंकि हाल ही में पंजाब कांग्रेस में बड़े संगठनात्मक बदलाव किए गए हैं। कांग्रेस हाईकमान ने परगट सिंह को पंजाब प्रदेश कांग्रेस कमेटी का नया प्रधान नियुक्त किया है। परगट सिंह के प्रदेश अध्यक्ष बनने के बाद से ही पार्टी के भीतर और बाहर नई राजनीतिक समीकरणों और बयानबाजी का दौर शुरू हो गया है। बेअंत सिंह की प्रतिमा का मुद्दा ऐसे समय में उठाया गया है, जब पंजाब में विभिन्न राजनीतिक दल अपनी-अपनी विचारधारा और ऐतिहासिक शख्सियतों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को जनता के सामने रखने का प्रयास कर रहे हैं।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि रवनीत सिंह बिट्टू का यह बयान केवल एक प्रतिमा तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पंजाब की राजनीति में कांग्रेस और भाजपा के बीच बढ़ती वैचारिक खींचतान का हिस्सा है। भाजपा लगातार यह दिखाने का प्रयास कर रही है कि वह पंजाब के इतिहास और उसके नेताओं के सम्मान को लेकर अधिक गंभीर है, जबकि दूसरी तरफ कांग्रेस के नए नेतृत्व पर अपने ही पूर्वजों की विरासत को लेकर स्पष्ट रुख अपनाने का दबाव बन रहा है। बिट्टू के इस बयान के बाद यह देखना दिलचस्प होगा कि पंजाब कांग्रेस के नवनियुक्त प्रधान परगट सिंह इस चुनौती पर कैसी प्रतिक्रिया देते हैं।

फिलहाल, चंडीगढ़ में बेअंत सिंह की प्रतिमा को लेकर उठा यह विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। भाजपा नेता रवनीत सिंह बिट्टू द्वारा दिए गए इस बयान ने पंजाब की सियासत में एक नई बहस को जन्म दे दिया है। प्रतिमा को यथास्थान बनाए रखने या उसे सम्मानपूर्वक समाधि स्थल पर स्थानांतरित करने की मांग को लेकर दोनों प्रमुख दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर आने वाले दिनों में और तेज होने की संभावना है। पंजाब की जनता और राजनीतिक गलियारों में अब सभी की निगाहें परगट सिंह के अगले कदम और उनके आधिकारिक बयान पर टिकी हुई हैं।