पश्चिम बंगाल के रेजीनगर विधानसभा सीट से होने वाले उपचुनाव में ममता बनर्जी गुट के तृणमूल कांग्रेस (TMC) उम्मीदवार रबीउल आलम चौधरी ने शनिवार को चुनाव से हटने के ऐलान के कुछ घंटे बाद अपना निर्णय वापस ले लिया। इस घटना के बीच नंदीग्राम सीट से भी TMC उम्मीदवार संचिता प्रधान ने पहले ही अपना नामांकन वापस लिया था, जबकि उनके स्थानापन्न कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान को पुराने हत्या मामले में गिरफ्तार किया गया। रेजीनगर और नंदीग्राम दोनों सीटों पर 6 अक्टूबर को मतदान और 9 अक्टूबर को मतगणना होगी।
रबीउल आलम चौधरी ने शनिवार सुबह करीब 10 बजे चुनाव से हटने की घोषणा की थी। उन्होंने तब बताया कि पुराना चुनाव चिह्न यानी ट्विन फ्लावर्स जिसे जोड़ा घास फूल के नाम से भी जाना जाता है, उन्हें नहीं मिल पाया है और कम समय में नया चिह्न ‘फुटबॉल प्लेयर’ को मतदाताओं तक पहुंचाना कठिन है। इसके साथ ही उन्होंने अपने कार्यकर्ताओं को परेशान किए जाने का भी आरोप लगाया। हालांकि, दोपहर करीब 1 बजे उन्होंने मानसिकता बदलते हुए कहा कि ममता बनर्जी से बातचीत के बाद उन्होंने निर्णय बदल दिया है और वे चुनाव लड़ेंगे।
इससे एक दिन पहले शुक्रवार को नंदीग्राम सीट से TMC उम्मीदवार संचिता प्रधान ने भी अपना नामांकन वापस लिया था। ममता बनर्जी ने इसके बाद नंदीग्राम से कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान को समर्थन देने का ऐलान किया। लेकिन इसी घोषणा के कुछ घंटे बाद मिलन प्रधान को 2007 के एक पुराने हत्या मामले में गिरफ्तार कर लिया गया।
रेजीनगर सीट हुमायूं कबीर के इस्तीफे और नंदीग्राम सीट शुभेंदु अधिकारी के इस्तीफे के बाद खाली हुई थी। चुनाव आयोग ने TMC के दोनों गुटों को मूल नाम और चुनाव चिह्न इस्तेमाल करने से रोकते हुए 17 सितंबर को अलग-अलग नाम और सिंबल दिए थे। ममता गुट को ‘ममता ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ नाम और ‘फुटबॉल प्लेयर’ सिंबल मिला, जबकि अरूप रॉय गुट को ‘डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस’ नाम और ‘लिफाफा’ सिंबल आवंटित किया गया।
TMC के नाम और सिंबल को लेकर विवाद तभी शुरू हुआ जब पार्टी मई के विधानसभा चुनाव में हारने के बाद आंतरिक संघर्ष का शिकार बनी। जून में 58 बागी विधायकों ने ममता खेमे के उम्मीदवार शोभनदेव चट्टोपाध्याय की जगह निष्कासित नेता ऋतब्रत बनर्जी को विधानसभा में विपक्ष का नेता चुना और स्पीकर ने भी उन्हें मान्यता दी। इसके बाद पार्टी में 28 साल में पहली बार टूट हो गई। बाद में 20 लोकसभा सांसदों ने काकली घोष दस्तीदार के नेतृत्व में अलग गुट के रूप में खुद को पेश किया और BJP के नेतृत्व वाले NDA का समर्थन किया। दोनों गुटों ने TMC के नाम और ‘जोड़ा घास फूल’ चुनाव चिह्न पर दावा किया।
ममता बनर्जी ने शुक्रवार को अपनी याचिका में चुनाव आयोग और पश्चिम बंगाल विधानसभा में विपक्ष के नेता ऋतब्रत बनर्जी को पक्षकार बनाया है। उन्होंने चुनाव आयोग के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है।
नंदीग्राम सीट लंबे समय से TMC और भाजपा के बीच राजनीतिक संघर्ष का प्रमुख केंद्र रही है। 2007 के भूमि अधिग्रहण विरोधी आंदोलन ने ममता बनर्जी और TMC को 2011 में सत्ता तक पहुंचाने में बड़ी भूमिका निभाई थी। 2021 में ममता ने यहीं से बंगाल के मौजूदा सीएम शुभेंदु अधिकारी के खिलाफ चुनाव लड़ा, लेकिन हार गईं। अधिकारी BJP में शामिल होने के बाद TMC के सबसे बड़े प्रतिद्वंद्वी बन चुके हैं। 2026 के विधानसभा चुनाव में शुभेंदु अधिकारी ने नंदीग्राम के साथ भवानीपुर सीट से भी चुनाव लड़ा और दोनों जगह जीत दर्ज की। भवानीपुर में उन्होंने ममता बनर्जी को 15,105 वोटों से हराया, जहां 73,917 वोट उन्हें और 58,812 वोट ममता बनर्जी को मिले। बाद में अधिकारी ने भवानीपुर सीट अपने पास रखी और नंदीग्राम से इस्तीफा दे दिया।
उपचुनाव प्रक्रिया से जुड़े कुछ महत्वपूर्ण प्रश्नों के जवाब इस प्रकार हैं। उम्मीदवार के नाम वापस लेने के बाद अगला कदम क्या होगा? नाम वापसी की ऑफिशियल प्रक्रिया पूरी होने के बाद रिटर्निंग ऑफिसर अंतिम उम्मीदवारों की सूची जारी करेंगे और बचे हुए उम्मीदवारों के बीच तय कार्यक्रम के अनुसार चुनाव प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। क्या नाम वापस लेने वाला उम्मीदवार अपना फैसला बदल सकता है? नहीं, एक बार नाम वापसी वैध तरीके से हो जाने के बाद उसी चुनाव में उम्मीदवार अपनी उम्मीदवारी दोबारा बहाल नहीं कर सकता। अगर नाम वापसी के बाद सिर्फ एक उम्मीदवार बचता है तो क्या होगा? ऐसी स्थिति में चुनाव निर्विरोध हो सकता है और रिटर्निंग ऑफिसर प्रक्रिया पूरी करने के बाद उस उम्मीदवार को निर्वाचित घोषित कर सकता है। क्या नाम वापसी की समय-सीमा खत्म होने के बाद नया उम्मीदवार खड़ा किया जा सकता है? नहीं, नाम वापसी की समय-सीमा खत्म होने के बाद उसी चुनाव में नया नामांकन दाखिल करने का मौका नहीं मिलता। क्या किसी उम्मीदवार की गिरफ्तारी से उसकी उम्मीदवारी खत्म हो जाती है? सिर्फ गिरफ्तारी से उम्मीदवार की उम्मीदवारी अपने आप खत्म नहीं होती, इसके लिए संबंधित कानूनी प्रावधानों के तहत अयोग्यता की स्थिति बनना जरूरी है। गिरफ्तार उम्मीदवार चुनाव लड़ सकता है? अगर उम्मीदवार कानूनी रूप से चुनाव लड़ने के लिए योग्य है और उसकी उम्मीदवारी वैध है, तो केवल गिरफ्तारी के आधार पर उसका नाम बैलेट से हटाना जरूरी नहीं होता। उम्मीदवार जेल में हो तो प्रचार कैसे करेगा? वह खुद प्रचार, जनसभा या मतदाताओं से सीधे संपर्क में शामिल नहीं हो पाएगा, हालांकि उसकी उम्मीदवारी अलग से बनी रह सकती है। अगर उम्मीदवार को बाद में अदालत से राहत मिलती है तो क्या होगा? इसका असर मामले की कानूनी स्थिति और अदालत के आदेश पर निर्भर करेगा।













