महाराष्ट्र शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) के पेपर लीक मामले में नया खुलासा हुआ है। ठाणे पुलिस ने भिवंडी की स्थानीय कोर्ट में विस्तृत चार्जशीट दाखिल की है, जिसमें मास्टरमाइंड बिजेंद्र गुप्ता समेत कुल 18 लोगों को आरोपी बनाया गया है। ठाणे पुलिस के मुताबिक, यह पेपर उत्तरप्रदेश के आगरा स्थित एक प्रिंटिंग प्रेस से लीक हुआ था, जहां से TET परीक्षा के गोपनीय पेपर छापे जा रहे थे। आरोपियों ने पेपर के पन्नों को जूतों के सोल में छिपाकर प्रिंटिंग प्रेस से बाहर निकाला था। इसके लिए उन्हें 8 हजार रुपए दिए गए थे और आगरा में जमीन के प्लॉट देने का वादा भी किया गया था।
ठाणे पुलिस ने शुक्रवार को भिवंडी की स्थानीय कोर्ट में 3,500 पन्नों की चार्जशीट दाखिल की। इसमें मास्टरमाइंड बिजेंद्र गुप्ता समेत कुल 18 लोगों को आरोपी बनाया गया है। गुप्ता का नाम इससे पहले ओडिशा के एक पेपर लीक मामले में भी सामने आ चुका है। पुलिस ने 16 आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जबकि अशोक साव और प्रकाश मिसाल फरार हैं। पुलिस के अनुसार, आगरा की महीम पटरन प्राइवेट लिमिटेड प्रिंटिंग प्रेस से पेपर लीक हुए थे।
डीसीपी पवन बंसोड़ को सूचना मिली थी कि 3 लोग भिवंडी के एक व्यक्ति को परीक्षा के पेपर बेचने की कोशिश कर रहे हैं। इसके बाद पुलिस ने कोंगांव इलाके में आरोपियों को पकड़ा। उनके पास से पेपर के 4 सेट मिले। जांच में महाराष्ट्र स्टेट काउंसिल ऑफ एग्जामिनेशन (MSCE) के अधिकारियों ने इन्हें असली बताया।
चार्जशीट के मुताबिक, पेपर आगरा की महीम पटरन प्राइवेट लिमिटेड प्रिंटिंग प्रेस से लीक हुए थे। इसी प्रेस में TET परीक्षा के गोपनीय पेपर छापे जा रहे थे। 15 से 17 जून के बीच प्रेस के 2 कर्मचारियों और एक पूर्व कर्मचारी ने पेपर के पन्नों को मोड़कर जूतों के सोल में छिपा लिया। प्रेस में सिक्योरिटी गार्ड कपड़ों की तलाशी लेते थे, लेकिन जूतों की जांच नहीं करते थे। आरोपियों ने इसी का फायदा उठाकर पेपर बाहर निकाले।
परीक्षा में नकल रोकने के लिए TET के 2 पेपरों के 4 अलग-अलग सेट तैयार किए गए थे। इनमें से एक सेट परीक्षा के दिन इस्तेमाल होना था। आरोपियों ने चारों सेट प्रिंटिंग प्रेस से बाहर निकाल लिए थे। 28 जून को होने वाली TET परीक्षा से एक दिन पहले पेपर लीक हो गया था। इसके बाद महाराष्ट्र स्टेट एग्जामिनेशन काउंसिल (MSEC) ने परीक्षा स्थगित कर दी थी।
TET यानी टीचर एलिजिबिलिटी टेस्ट एक राष्ट्रीय स्तर की पात्रता परीक्षा है, जो यह तय करती है कि कोई अभ्यर्थी प्राथमिक और उच्च प्राथमिक कक्षाओं (कक्षा 1 से 8 तक) में टीचर बनने के योग्य है या नहीं। इस परीक्षा को नेशनल काउंसिल फॉर टीचर एजूकेशन (NCTE) ने 2010 में अनिवार्य कर दिया था। केंद्र सेंट्रल TET और राज्य स्टेट TET करवाते हैं। NCTE ने शिक्षक पदों पर नियुक्त उम्मीदवारों को TET क्वालिफाई करने के लिए 5 साल का समय दिया, जिसे आगे चलकर 4 साल कर दिया था। NCTE के नोटिस के खिलाफ उम्मीदवारों ने कोर्ट का रुख किया।
मद्रास हाई कोर्ट बेंच ने जून 2025 में कहा कि जिन शिक्षकों की नियुक्ति 29 जुलाई 2011 से पहले हुई थी, उन्हें सेवा में बने रहने के लिए TET पास करने की बाध्यता नहीं है, लेकिन पदोन्नति के लिए TET पास करना अनिवार्य रहेगा। बाद में यह मामला अलग-अलग राज्यों से सुप्रीम कोर्ट पहुंचा।
2 सितंबर 2025 को सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि शिक्षकों को सेवा में बने रहने या प्रमोशन के लिए टीईटी (शिक्षक पात्रता परीक्षा) पास करना जरूरी है। जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस मनमोहन की बेंच ने कहा था कि जिन शिक्षकों की नौकरी 5 साल से ज्यादा बची है, वे सभी इस नियम के दायरे में होंगे। कोर्ट ने TET पास करने की समय सीमा 31 अगस्त 2027 से बढ़ाकर 31 अगस्त 2028 कर दी। टीईटी पास न करने वालों को या तो इस्तीफा देना होगा या फिर कंपल्सरी रिटायरमेंट लेना होगा। कोर्ट ने अनुच्छेद 142 के तहत विशेष अधिकारों का प्रयोग करते हुए ये निर्देश दिए।
इसके अलावा, सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि जरूरत पड़ने पर नीट परीक्षा सिस्टम की जांच के लिए जज नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) के ऑफिस का दौरा करेंगे। वे देखेंगे कि परीक्षा को सुरक्षित और पारदर्शी तरीके से कराने के इंतजाम वास्तव में काम कर रहे हैं या नहीं।
इस पूरे मामले में जांच जारी है और अब चार्जशीट दाखिल होने के बाद न्यायालय आगे की कार्रवाई निर्धारित करेगा। पुलिस का कहना है कि आरोपियों को पेपर बाहर निकालने के लिए 8 हजार रुपए दिए गए थे और आगरा में जमीन का वादा किया गया था। प्रिंटिंग प्रेस के भीतर सुरक्षा के तरीके और जूतों पर जांच न होने की व्यवस्था इस मामले की मुख्य विशेषता है।













