बंगाल की खाड़ी में बने कम दबाव के क्षेत्र का प्रभाव अब स्पष्ट दिखाई देने लगा है। इस प्रणाली के कारण मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, बिहार और गुजरात में रविवार दोपहर के बाद से ही मौसम में तेजी से बदलाव देखा गया है। गुजरात के जूनागढ़ जिले के गिरनार वन क्षेत्र में भारी बारिश के कारण आत्मेश्वर महादेव मंदिर जाने वाली सड़क पर अचानक पानी का बहाव तेज हो गया। इंद्रेश्वर मंदिर में दर्शन करने गए 40 लोगों, जिनमें बच्चे भी शामिल थे, पानी के तेज बहाव में फंस गए। बारिश के कारण गिरनार पर्वत से गिरने वाले झरने में बाढ़ आ गई, लेकिन सभी लोगों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया है।
इसी तरह, केरल के मल्लपुरम जिले के पूक्कोट्टुम्पडम में कोट्टाप्पुझा नदी में अचानक बाढ़ आ गई। नदी के बहाव में एक समूह के पाँच लोग बह गए, जिनमें से दो की मौत हो गई और दो अन्य अभी भी लापता हैं। राज्य प्रशासन और राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ) की टीमें बचाव अभियान में जुटी हुई हैं और लापता लोगों की तलाश जारी है।
भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने सोमवार के लिए झारखंड में बारिश का ऑरेंज अलर्ट जारी किया है, जबकि मध्य महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़, ओडिशा, तेलंगाना, मराठवाड़ा, कोंकण-गोवा, आंध्र प्रदेश, रायलसीमा, तमिलनाडु, पुडुचेरी, कर्नाटक और केरल में यलो अलर्ट है। ये अलर्ट राज्य सरकारों और स्थानीय प्रशासन को सतर्क रहने और संभावित बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में त्वरित कार्रवाई करने के लिए प्रेरित करते हैं।
सैटेलाइट चित्रों में देश भर में मानसूनी बादलों की स्थिति स्पष्ट दिखाई दे रही है। ये बादल उत्तर-पश्चिम भारत से लेकर दक्षिण-पूर्व तट तक फैले हुए हैं, जिससे आगामी दिनों में भारी बारिश की संभावना बढ़ गई है। मौसम विभाग के अनुसार, अगले दो दिनों में देश के अधिकांश हिस्सों में बारिश जारी रहने की संभावना है, जिससे तापमान में मामूली गिरावट आने की उम्मीद है।
गुजरात के जूनागढ़ में हुई घटना के बारे में विस्तृत जानकारी देते हुए स्थानीय अधिकारियों ने बताया कि भारी बारिश के कारण गिरनार पर्वत की तलहटी में बहने वाली नदी का जल स्तर अचानक बढ़ गया। इससे मंदिर जाने वाली सड़क पर पानी का बहाव तेज हो गया और 40 लोग, जिनमें बच्चे भी शामिल थे, फंस गए। एनडीआरएफ और राज्य आपदा मोचन बल (एसडीआरएफ) की टीमों ने त्वरित कार्रवाई करते हुए सभी लोगों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया। किसी भी व्यक्ति के घायल होने की कोई खबर नहीं है।
केरल में बाढ़ की स्थिति के बारे में बताते हुए राज्य के आपदा प्रबंधन अधिकारियों ने कहा कि कोट्टाप्पुझा नदी में अचानक आई बाढ़ से मल्लपुरम जिले के कई गाँव प्रभावित हुए हैं। बाढ़ के कारण कई घरों में पानी भर गया है और सड़कें बंद हो गई हैं। राहत एवं बचाव कार्यों में सेना, नौसेना और वायुसेना के जवानों को भी लगाया गया है। मृतकों की संख्या अभी भी स्पष्ट नहीं है, क्योंकि दो लोगों के लापता होने की सूचना है और उनकी तलाश जारी है।
मौसम विभाग के अधिकारियों ने बताया कि बंगाल की खाड़ी में बना कम दबाव का क्षेत्र अभी भी सक्रिय है और इसके कारण आगामी 48 घंटों में भारी बारिश की संभावना है। उन्होंने लोगों से सतर्क रहने और बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों से दूर रहने की अपील की है। विभाग ने यह भी कहा है कि जिन क्षेत्रों में यलो अलर्ट जारी किया गया है, वहाँ लोगों को सतर्क रहने और आपदा प्रबंधन योजनाओं का पालन करने की सलाह दी जाती है।
राज्य सरकारों ने भी बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में राहत शिविरों की व्यवस्था की है और प्रभावित लोगों को आवश्यक सामान मुहैया कराया जा रहा है। स्वास्थ्य विभाग ने भी बाढ़ के पानी से फैलने वाली बीमारियों के प्रति सावधानी बरतने की सलाह दी है और लोगों को साफ पानी पीने और हाथ धोने के लिए कहा है।
मौसम की स्थिति को देखते हुए, विमानन और रेलवे अधिकारियों ने भी सतर्कता बरतने के निर्देश दिए हैं। भारी बारिश के कारण उड़ान सेवाओं में देरी और रेल सेवाओं में बाधा आने की संभावना है, इसलिए यात्रियों को अपनी यात्रा योजनाओं की समीक्षा करने और अधिकारियों से लगातार अपडेट लेने की सलाह दी जाती है।
समग्र रूप से, बंगाल की खाड़ी में बने कम दबाव के क्षेत्र के कारण देश के अधिकांश हिस्से में भारी बारिश की संभावना है, जिससे बाढ़ की स्थिति पैदा हो सकती है। गुजरात और केरल में हुई घटनाएँ इस बात का संकेत हैं कि मौसम कितना खतरनाक हो सकता है। प्रशासन और स्थानीय समुदायों को त्वरित और प्रभावी कार्रवाई करने की आवश्यकता है ताकि जानमाल की हानि को कम किया जा सके। मौसम विभाग की ओर से जारी अलर्ट और सतर्कता संदेशों का पालन करते हुए, लोगों को सुरक्षित स्थानों पर रहने और आपदा प्रबंधन दिशानिर्देशों का पालन करने की सलाह दी जाती है।














