ईरान पर अमेरिका और इजराइल के हमले को 5 दिन हो गए। ईरान में एक हजार से ज्यादा लोगों की मौत हो गई। ईरान के हमलों से इजराइल में 10 से ज्यादा मौतें हुई हैं। सवाल है कि क्या ईरान इस लड़ाई में कमजोर पड़ रहा है? ईरान के थिंक टैंक डिप्लोमैटिक हाउस के डायरेक्टर
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वे कहते हैं कि ईरान ने 6 महीने जंग की तैयारी कर रखी है। अमेरिका अभी से नेवी पीछे हटाने लगा है। अभी ईरान पुरानी मिसाइलें ही इस्तेमाल कर रहा है, मॉडर्न मिसाइलें तो बाकी हैं। ईरान-अमेरिका संघर्ष पर दैनिक भास्कर ने हामिद रेजा गोलामजादेह से डिटेल में बात की। पढ़िए पूरा इंटरव्यू…
सवाल: अभी ईरान में क्या हालात हैं, पिछले साल जून में हुए इजराइल के हमलों से ये जंग कितनी अलग है? जवाब: 28 फरवरी से अब तक हमने अमेरिका से ज्यादा इजराइल के हमले झेले हैं। राजधानी तेहरान के अलावा देशभर में कई ठिकानों पर हमले हुए हैं। जून की जंग में जिन जगहों को टारगेट किया गया था, इस बार भी ठीक वही लोकेशन टारगेट की गई हैं। इजराइल के पास पुराना डेटा बेस है। अब भी इजराइल पुराने ठिकानों पर ही हमला कर रहा है।
मैंने सुबह से सिर्फ एक धमाके की आवाज सुनी है। मेरे ऑफिस के रास्ते में पुलिस का ऑफिस है। उस पर जून में भी हमला किया गया था और अभी फिर से हमला हुआ है।

इजराइल और अमेरिका मिलकर ईरान के शहरों पर हमला कर रहे हैं। कुर्द आबादी वाले दूसरे बड़े शहर सनंदज को भी निशाना बनाया गया है।
सवाल: क्या मिलिट्री बेस के अलावा रिहायशी इलाकों में भी हमले हुए हैं? जवाब: पिछले साल जून में 12 दिन चली जंग में हमने ज्यादा तबाही और खौफ देखा था। इस बार उतना ज्यादा नहीं है। पुलिस बेस और इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स के ठिकानों पर हमले हुए हैं। अब कुछ मस्जिदों पर भी हमले शुरू हो गए हैं। स्कूल पर हमला किया गया। इसमें करीब 140 बच्चे मारे गए।
इस बार जून के मुकाबले ज्यादा लोगों की मौत हुई है। स्ट्राइक के बाद रेस्क्यू टीमें पहुंचती हैं, इजराइल-अमेरिका तभी हमला कर रहे हैं।
सवाल: सुप्रीम लीडर खामेनेई की हत्या कैसे हो गई, क्या ये इंटेल लीक था? जवाब: सुप्रीम लीडर की हत्या पहले दिन की गई। इसके बाद कुछ मिलिट्री कमांडरों को मारा गया। कुछ नेताओं की हत्या की भी कोशिश हुई। ईरान के मिलिट्री बेस, नेवी बेस को निशाना बनाया गया। बसीज आर्मी पर भी हमले बढ़ गए हैं।
उन्हें पता नहीं है कि पहले ही ये बेस और ठिकाने खाली कर दिए हैं। अपने दफ्तर कहीं और अंडरग्राउंड शिफ्ट कर लिए हैं। हम देख पा रहे हैं कि अमेरिका और इजराइल ने पहले कहा कि वे न्यूक्लियर प्रोग्राम की वजह से हमला कर रहे हैं। फिर कहते हैं कि सत्ता बदलना चाहते हैं।

सवाल: क्या अमेरिका ईरान में सत्ता बदल सकता है? जवाब: उन्होंने जनवरी में दंगे करवाने की कोशिश की थी। उससे कुछ नहीं हुआ। 2-3 दिन में दंगे खत्म हो गए। अब अमेरिका और इजराइल पहले दोनों ट्रेंड यानी एक तरफ हमले और दूसरी तरफ राजनीतिक प्रदर्शन-दंगे करके सत्ता बदलना चाहते हैं। वे अपने एजेंटों के जरिए दंगा भड़काना चाहते हैं।
लोग जानते हैं कि ईरान की आर्मी दुश्मन को हराने के लिए काफी है। अमेरिका-इजराइल समझते हैं कि 80-85% लोग इस्लामिक सत्ता के खिलाफ हैं, लेकिन ऐसा नहीं है। लोग सत्ता के साथ हैं।
सवाल: क्या अमेरिका की तरफ से जमीनी हमले का भी डर है? जवाब: सीरिया और इराक की तरफ से जिन कैदियों को जेल से रिहा किया गया है, वे कुर्दों के साथ मिलकर ईरान पर हमला कर सकते हैं। अमेरिका इन कैदियों को रिहा करके ईरान में जमीनी हमला करना चाहता है। ये बात तय है कि सैनिक उतारना अमेरिका की सबसे बड़ी गलती होगी।
ईरान ने बहुत पहले से युद्ध की तैयारी की है, अगर अमेरिका जमीनी हमला करता है तो बड़ी तबाही देखने के लिए तैयार रहें।
सवाल: क्या खामेनेई की मौत के बाद ईरान ज्यादा एकजुट हो गया है? जवाब: अयातुल्ला अली खामेनेई की हत्या नहीं हुई, बल्कि लोगों जज्बात की हत्या हुई है। खामेनेई ईरान में सबसे ज्यादा पसंद किए जाते हैं। सुप्रीम लीडर की मौत के बाद से जितने लोग सड़कों पर निकले हैं, उतने कभी नहीं निकले।
खामेनेई की मौत का ऐलान होने के बाद एक घंटे के अंदर तेहरान की सड़कें भर गईं। करीब 10 घंटे तक लोग सड़कों से नहीं हटे। पूरी-पूरी रात लोग सड़कों पर प्रदर्शन और नारेबाजी कर रहे हैं। ये सब रमजान में कर रहे हैं। ईरान के लोग अभी सबसे ज्यादा एकजुट हैं।

ईरान के सुप्रीम लीडर रहे अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत की खबर के एक घंटे के अंदर तेहरान में सड़कों पर लोगों की भीड़ जुट गई।
सवाल: सुप्रीम लीडर खामेनेई की मौत के बाद अब सत्ता कैसे चल रही है, इसका भविष्य क्या है? जवाब: ईरान की लीडरशिप की सबसे बड़ी खासियत है कि अगर कोई अचानक नहीं रहता, फिर भी सिस्टम चलता रहेगा। जो नहीं है, उसकी जगह कोई और लेगा। 12 दिन के युद्ध के बाद खामेनेई ने हर अधिकारी को आदेश दिया था कि वे अपने विकल्प के तौर पर 5 नाम तैयार रखें। अगर किसी की भी मौत होती है, तो उसके बाद कमान किसके पास होगी, ये साफ रहे।
36 साल से सुप्रीम लीडर होने की वजह से वे ऐसा देश बना पाए, जो हर तरह से खुद की रक्षा कर पाता है। सुप्रीम लीडर ने हमेशा लोकतंत्र और कानून का सम्मान किया।
अमेरिका और इजराइल का पहला हमला होने के बाद 2 घंटे के अंदर कमांडर्स ने अपनी जगह ले ली और जवाबी कार्रवाई शुरू कर दी। इससे साफ हो जाता है कि सिस्टम एकदम सही तरह से काम कर रहा है।

ईरानी संविधान के मुताबिक, अगर हमारे लीडर नहीं रहे तो उसके बाद हमारे पास सुप्रीम काउंसिल है। इसमें तीन पद प्रेसिडेंट, चीफ जस्टिस और गार्डियन काउंसिल के प्रमुख होते हैं। अभी सारे फैसले यही सुप्रीम काउंसिल ले रही है। अगले सुप्रीम लीडर का चुनाव असेंबली एक्सपर्ट कमेटी करेगी। हर 6 महीने पर ये कमेटी अपने नामों पर रिव्यू करती है। इसलिए उनके पास पहले से सुप्रीम लीडर के लिए कई सारे नाम होंगे।
सवाल: अमेरिका और इजराइल दावा कर रहे हैं कि ईरान के आसमान पर अब उनका कब्जा है, क्या ये सही है? जवाब: हां, हमारे आसमान पर इजराइल और अमेरिका का कंट्रोल है, लेकिन जहां उनके बेस हैं, वहां के आसमान पर हमारा भी कंट्रोल है। ईरानी मिसाइल इजराइल और अमेरिका के बेस पर हमला कर रही हैं। मिसाइलें टारगेट पर गिर रही हैं।
ईरान फाइटर जेट्स के खिलाफ डिफेंस सिस्टम में कमजोर हो सकता है, लेकिन हमने तय किया है कि दुश्मन के मिलिट्री बेस पर हमला करके हम बढ़त बनाएंगे। कतर, सऊदी अरब, यूएई, बहरीन में हमने अमेरिकी बेस पर हमले किए हैं। अमेरिका ईरान से काफी दूर है, इसलिए उसके पास हमला करने के लिए बहुत लिमिटेड जगहें हैं।
ईरान ने कतर में अमेरिका के रडार सिस्टम पर हमला किया है। इसके बाद ईरानी मिसाइल इजराइल पर आसानी से हमला कर पा रही हैं। अमेरिका ने इस रीजन से अपनी नौसेना निकाल ली है। ये इस बात का सबूत है कि ईरान का हमला तेज हो रहा है। अमेरिका ने कहा था कि वो खुद को 45 दिनों तक डिफेंड कर सकते हैं और आज सिर्फ चौथा दिन है।

सवाल: ईरान कितने दिन तक जवाबी हमला जारी रख सकता है, क्या अमेरिका और इजराइल का डिफेंस कमजोर पड़ता दिख रहा है? जवाब: ईरान 6 महीने तक लड़ने के लिए तैयार है। अमेरिका और इजराइल एक महीने से ज्यादा ये जंग नहीं झेल पाएंगे। अमेरिका ने कहा है कि वो 4 हफ्ते की जंग के लिए तैयार हैं। ईरान के पास इतने हथियार हैं, जो 6 महीने तक चल सकते हैं। ईरान ने अब तक अपनी मॉडर्न मिसाइलों का इस्तेमाल नहीं किया है।
ईरान अब भी पुराने ड्रोन और मिसाइल इस्तेमाल कर रहा है। हम पुरानी मिसाइल से हमला करते हुए भी कामयाब हो रहे हैं। अमेरिकी और इजराइली ठिकाने बर्बाद हो रहे हैं। ईरान के सस्ते ड्रोन से अमेरिका-इजराइल के महंगे डिफेंस सिस्टम बर्बाद हो रहे हैं। उनके पास डिफेंस के लिए सीमित संसाधन हैं। हर बीतते दिन के साथ उनका डिफेंस सिस्टम कमजोर हो रहा है।

ईरान ने 1 मार्च को इजराइल के बेत शेमेश में मिसाइल हमला किया था, जिसमें 8 लोग मारे गए थे।
सवाल: अमेरिका पहले कह रहा था कि ईरान में सत्ता बदलना है, अब ये बात नहीं कर रहा। क्या अमेरिका अपना मकसद बदल रहा है? जवाब: अमेरिका अब भी चाहता है कि ईरान की सरकार गिर जाए, लेकिन वो नहीं कर पा रहा है। कल को अमेरिका ये भी कह सकता है कि हम सिर्फ सुप्रीम लीडर को मारना चाहते थे, लेकिन ये सही बात नहीं है। हम तब तक युद्ध लड़ेंगे, जब तक कि वो अपनी गलती नहीं मान लेता।
सवाल: गलती मानने का क्या मतलब है, ईरान इस जंग से क्या चाहता है? जवाब: अमेरिका को ये रीजन हमेशा के लिए छोड़ना होगा। इजराइल का खात्मा किया जाना चाहिए, लेकिन इसका मतलब ये नहीं है कि ईरान अभी तुरंत ये करना चाहता है। अब हमें उन्हें मारने की जरूरत नहीं है, वे खुद ही अपने आप को नक्शे से गायब करने पर जुटे हैं। उन्हें ये मानना होगा कि वे ईरान में सत्ता नहीं बदलवा सकते।
सवाल: ईरान अभी किस क्षमता से हमले कर रहा है? जवाब: ईरान अभी मैग्नीट्यूड के पैमाने पर 6-7 के लेवल के हमले कर रहा है। आने वाले दिनों में हम 9-10 लेवल के हमले शुरू करेंगे। अभी हम पुराने ड्रोन इस्तेमाल कर रहे हैं, लेकिन जल्द ही अपने ताकतवर ड्रोन भेजना शुरू करेंगे। हमारे ड्रोन सिर्फ 20 हजार डॉलर के हैं, वहीं उनके रडार लाखों डॉलर के हैं।
अभी तो लड़ाई शुरू हुई है, हम जल्द ही इसे तेज करेंगे। ईरान की रणनीति है कि पहले दुश्मन के रडार और डिफेंस तोड़ो। आसमान खाली हो जाएगा, तब हम टारगेट करना शुरू करेंगे।
सवाल: ईरान में लोग रोजे पर हैं। जंग की वजह से उन्हें किस तरह की दिक्कतें हो रही हैं? जवाब: हमले में मारे जाने वालों में आम लोग ज्यादा हैं। ये सच है कि अमेरिका के ज्यादातर टारगेट मिलिट्री और सरकारी ठिकाने हैं। एक दिन पहले रिहायशी इलाकों पर हमले हुए हैं। उन्होंने इस्फेहान में एक फैक्ट्री पर हमला किया, जहां आम लोग थे।

इजराइली सेना IDF ने तेहरान में हमले का फुटेज जारी किया है। इसमें ईरान के रक्षा मुख्यालय समेत कई सरकारी इमारतों को निशाना बनाया गया था।
सवाल: भारत ने ईरान में चाबहार पोर्ट डेवलप किया है, ये पोर्ट सुरक्षित है या नहीं? जवाब: चाबहार पोर्ट के पास हमला हुआ है। ये नहीं पता कि पोर्ट तबाह हुआ है या ठीक है।
सवाल: भारत और ईरान के पुराने संबंध रहे हैं। आप भारत सरकार से क्या चाहते हैं? जवाब: हमारी संस्कृति और सभ्यता का लंबा इतिहास रहा है। हम पड़ोसी रहे हैं। भारत की मौजूदा राजनीति इजराइल की तरफ झुकी हुई है। इसे संतुलित होना चाहिए। इजराइल पिछले 2 साल से गाजा में लोगों को मार रहा है, लेकिन भारत कुछ नहीं कर रहा। भारत सरकार और इजराइल के संबंध मजबूत बने हुए हैं। मुझे पता है कि राजनीति विचारधारा से अलग होती है, लेकिन हम इंसान हैं। हमें इंसानियत के बारे में सोचना होगा।
भारत को सोचना चाहिए कि सही इतिहास किसका है। अमेरिका और इजराइल एप्सटीन की सत्ता हैं। आप उनके साथ नहीं खड़े हो सकते। भारत को गाजा और ईरान के साथ खड़ा होना चाहिए। हम विक्टिम हैं और खुद की रक्षा कर रहे हैं। हम पर मिलिट्री प्रेशर बढ़ाने की कोशिश हो रही है। ईरान ने कभी किसी देश पर हमला नहीं किया।
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इजराइल और अमेरिका ने ईरान पर लगातार दूसरे दिन हमला किया। हमले में ईरानी इस्लामिक रेवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स के हेडक्वार्टर को निशाना बनाया गया। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा कि इन हमलों में 48 ईरानी नेता मारे गए हैं। अमेरिका ने ईरान के 9 जहाज डुबो दिए हैं। पढ़ें पूरी खबर…















