स्ट्रगल के दिनों में भूखे पेट सोए दर्शन कुमार:सालों तक रिजेक्शन झेला, एक्टिंग छोड़ने का फैसला किया

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‘द कश्मीर फाइल्स’ और ‘द बंगाल फाइल्स’ फिल्म के एक्टर दर्शन कुमार आज इंडस्ट्री का सफल नाम हैं। एक्टिंग इतनी दमदार कि दिग्गज डायरेक्टर सतीश कौशिक दर्शन को वन टेक आर्टिस्ट बुलाते थे। परदे पर पहली ही फिल्म में सलमान खान के दोस्त के रूप में दिखे। फिल्म हिट हुई तो लगा आगे की राह आसान होगी, लेकिन उसके बाद ऐसा दौर देखा कि ऑडिशन में जूता फटा तो नंगे पैर पैदल घर आना पड़ा।

ये ऐसे संघर्ष की शुरुआत जो एक दशक चला और इन्होंने एक्टिंग छोड़ने का मन बना लिया। पिता ने दाल-रोटी का खर्च देने का वादा किया तो फिर संघर्ष की दूसरी दास्तान शुरू हुई जिसके बाद इंडस्ट्री की दो टॉप एक्ट्रेस प्रियंका चोपड़ा और अनुष्का शर्मा के साथ सफल फिल्में कीं।

आज की सक्सेस स्टोरी में दर्शन कुमार बता रहे हैं, महरौली से मुंबई तक वह कितने संघर्षों के पहाड़ पार करके पहुंचे हैं…

बचपन से पढ़ाई-खेल सब में ऑलराउंडर

मैं दिल्ली के महरौली का रहने वाला हूं। हमारे इलाके की पहचान कुतुबमीनार से है। मेरा बचपन महरौली की गलियों में बीता है। मैंने पढ़ाई भी यहीं से की है। स्कूल में मैंने पीटी में एक दिन ड्रम प्ले किया और वो पता नहीं कैसे इतना अच्छा प्ले हुआ कि टीचर ने मुझसे कहा कि अब हर दिन तुम्हीं ये काम करोगे।

स्टेज पर रहने की आदत मुझे वहां से लगी। मैं शुरुआत से स्कॉलर रहा। बचपन से ही कॉम्पिटिशन में रहना मुझे पसंद था। मैं केवल क्लास में टॉप करने की कोशिश नहीं करता, बल्कि स्कूल में भी सबसे ज्यादा मार्क्स लाने की कोशिश करता था। कई बार मैंने ऐसा किया भी, जिसकी वजह से मुझे ट्रॉफी मिली।

इस दौरान पढ़ाई ही नहीं, जूडो, पहलवानी, बॉक्सिंग और बाकी खेलों में भी हाथ आजमाए और सब कुछ सीखा। इसका सारा श्रेय मेरी मां को जाता है। बॉक्सिंग में अपने स्कूल और कॉलेज के लिए नेशनल लेवल तक खेला और ट्रॉफी जीती।

स्कूल के समय में ही थिएटर ग्रुप से जुड़ गया

आमतौर पर लोग कविता पढ़ते हैं। मैं स्टेज पर कविताएं परफॉर्म करता था। इस वजह से मुझे कई लोगों ने कहा था कि तुम अच्छे एक्टर हो। तुम्हें एक्टिंग के लिए ट्राई करना चाहिए। मेरे अंदर एक्टिंग का कीड़ा तो था ही, ऐसे में मैंने एक्टिंग के लिए दिल्ली के मंडी हाउस में ही एक छोटा सा ग्रुप जॉइन कर लिया। वहां पर मैं पीयूष मिश्रा जी से मिला।

मैं भाग्यशाली रहा कि उनके साथ मुझे ‘गैलीलियो’ नाम के एक प्ले में काम करने का मौका मिला। उसके बाद एक-दो और प्ले में भी उनसे जुड़ा। ये कॉलेज से पहले की बात है। दो-तीन प्ले के बाद एक दिन पीयूष मिश्रा जी ने कहा कि वो अब मुंबई जा रहे हैं।

ऐसे में मैंने उनसे कहा कि प्लीज मुझे गाइड कीजिए। मुझे एक्टिंग करनी है। इसके आगे अब क्या करूं। उन्होंने मुझसे कहा कि कुछ भी करके एनके शर्मा ग्रुप को जॉइन कर लो। मैंने वो ग्रुप जॉइन किया और एक महीने के अंदर मैं प्ले में लीड बन गया।

जब मैं एनके शर्मा ग्रुप से जुड़ा तो मुझे और बोलने में दिक्कत होती थी। हरियाणवी में औ की मात्रा नहीं होती है। इस वजह से मैं औ वाले सारे शब्द को गलत बोलता था। एनके शर्मा जी मुझे कहते पेट से बोलो। मैंने धीरे-धीरे अपनी भाषा पर काम किया और एक समय ऐसा आया कि मैं लोगों के लिए डबिंग कर रहा था।

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