करीब 3 साल पहले। साल 2023 का जुलाई महीना। मणिपुर में मैतेई और कुकी समुदाय के बीच चल रही हिंसा से जुड़ा एक वीडियो सामने आया। वीडियो में दो लड़कियां थीं, जिनकी न्यूड परेड कराई जा रही थी। इस वीडियो ने पूरे देश को झकझोर दिया। मणिपुर में हिंसा तो 3 मई से
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ये घटना मैतेई आबादी वाले थौबल जिले में 4 मई, 2023 को हुई थी। मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा। वीडियो दिखाने पर बैन लगा दिया गया। जुलाई, 2023 में CBI को जांच सौंप दी गई। इसके बाद भी उस घटना का पूरा सच सामने नहीं आया। न उस दरिंदगी का दर्द किसी को पता चला।

26 फरवरी, 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने CBI को आदेश दिया कि वो पीड़ित परिवारों को चार्जशीट दे। 24 मार्च को इस केस की अगली सुनवाई होगी। दैनिक भास्कर ने कोर्ट में दाखिल CBI की 47 पेज की चार्जशीट की पड़ताल की।
हम पहली बार उन दो लड़कियों के बयान से उस दिन की आपबीती बताएंगे। ये भी बताएंगे कि जिन दो लड़कियों के साथ दरिंदगी हुई, उनकी जिंदगी अब कैसे गुजर रही है। इस घटना की इकलौती गवाह महिला अब कहां हैं। वे उस दिन कैसे भीड़ से बच निकली थीं।

‘भीड़ ने गांव पर हमला किया, पुलिस मौजूद थी, लेकिन मदद नहीं की’ CBI की चार्जशीट में तीन महिलाओं का जिक्र है। उन्हें विक्टिम नंबर 1, 2 और 3 नाम दिया गया है। न्यूड परेड के वीडियो में दिखीं महिलाएं विक्टिम नंबर 1 और 2 हैं। ये घटना बी. फैनम गांव में हुई थी। घटना का ब्योरा पेज नंबर 10 से शुरू होता है। आरोप है कि मैतेई समुदाय के लोगों ने दोपहर करीब 3 बजे कुकी और जो समुदाय के घरों पर हमला किया था। उनके पास राइफल, लाठी, कुल्हाड़ी और चाकू थे। भीड़ ने घरों और चर्च में आग लगा दी।
गांव के लोग छिपने के लिए जंगलों की तरफ भाग गए। इन्हीं में तीन पुरुष, तीन महिलाएं और ढाई साल की एक बच्ची भी थी। सभी जंगल में छिपे थे, लेकिन भीड़ ने उन्हें देख लिया। एक-एक करके जंगल में छिपे सभी लोग बाहर निकाले गए। महिलाओं और पुरुषों को अलग-अलग कर दिया। भीड़ ने पुरुषों को बुरी तरह पीटा। हालांकि, इसी भीड़ में शामिल कुछ लोगों की मदद से 3-4 विक्टिम गांव के पास सड़क किनारे खड़ी पुलिस की गाड़ी तक पहुंच गए।
पेज नंबर 15 पर लिखा है कि भीड़ से बचने के लिए दो लड़कियां पुलिस की गाड़ी में बैठ गईं। उसमें दो पुलिसवाले और ड्राइवर मौजूद थे। गाड़ी के बाहर 3-4 पुलिसवाले थे। एक लड़की ने ड्राइवर से कहा कि जल्दी गाड़ी स्टार्ट करो। ड्राइवर ने जवाब दिया कि मेरे पास चाबी नहीं है। पीड़ितों ने कई बार मदद मांगी, लेकिन पुलिस से मदद नहीं मिली। भीड़ चिल्लाकर पुलिस वालों से कह रही थी कि इन्हें वापस करो।
कुछ देर बाद भीड़ बढ़ने लगी। दोनों लड़कियों को बाल पकड़कर गाड़ी से बाहर खींच लिया। भीड़ देखकर पुलिसवाले भाग गए। भीड़ ने लड़कियों के कपड़े फाड़ दिए। उन्हें बिना कपड़ों के सड़क पर घुमाया।

ये घटना नोंगपोक सेकमाई पुलिस स्टेशन से चंद किमी दूर हुई थी। आरोप है कि भीड़ में शामिल लोग मैतेई संगठनों जैसे मैतेई लिपुन, कांगलेईपाक कन्बा लप, अराम्बाई तेंगोल, वर्ल्ड मैतेई काउंसिल से जुड़े थे।
चार्जशीट के पेज नंबर-16 पर लड़कियों से हुई दरिंदगी का पूरा जिक्र है। भीड़ में से कुछ लोगों ने लड़कियों से कहा कि अपने कपड़े उतारो, वरना तुम्हें जिंदा जला देंगे। विक्टिम नंबर-1 के भाई और पिता ने उसे बचाने की कोशिश की, तो भीड़ ने लाठियों और कुल्हाड़ी से हमला कर उनकी हत्या कर दी।
इसके बाद लड़कियों के कपड़े फाड़ने शुरू कर दिए। इसी दौरान विक्टिम नंबर-1 ने भीड़ में शामिल अरुण खुंडोनगबम और लोया को पहचान लिया। लोया ने ही उनके परिवार के पुरुष सदस्यों को बुरी तरह पीटा था।
चार्जशीट में आगे लिखा है, भीड़ में शामिल लोग दोनों लड़कियों के ब्रेस्ट टच कर रहे थे। उन्हें नोंच रहे थे। विक्टिम नंबर-1 के प्राइवेट पार्ट को छू रहे थे। बार-बार थप्पड़ मार रहे थे। इसी दौरान आरोपी विक्टिम नंबर-1 को खेत में ले गए। उसका गला दबाने की कोशिश की। उससे गैंगरेप किया।

पुलिस ने हुईरेम हेरोदास को मुख्य आरोपी बनाया है। वो वीडियो में हरी टीशर्ट पहने दिख रहा है। वही लड़की को खींचकर खेतों की ओर ले गया था।

आरोपियों ने कहा- जिसे रेप करना है, खेत में आ जाए CBI ने घटना की दूसरी विक्टिम का बयान भी दर्ज किया है। विक्टिम नंबर-2 के बारे में चार्जशीट में लिखा है- आरोपियों ने कहा कि जान बचाने के लिए तुम्हारे पास एक ही रास्ता है। या तो खुद सारे कपड़े उतार दो या फिर हम खुद ये काम करेंगे। इसके बाद भीड़ ने कपड़े फाड़ने शुरू कर दिए। इस लड़की की भी न्यूड परेड कराई गई थी। विक्टिम नंबर-1 से जहां दरिंदगी हो रही थी, उससे थोड़ी दूरी पर ही विक्टिम नंबर-2 को भी भीड़ ने घेरा हुआ था।
भीड़ से कुछ लोग आवाज लगा रहे थे कि जिन लोगों को इससे रेप करना है, वे आ जाएं। इसके बाद उससे गैंगरेप किया। इस दौरान विक्टिम बेहोश हो गई। काफी देर बाद उसे थोड़ा होश आया। उसकी हालत बहुत बुरी थी।
विक्टिम नंबर-2 ने बताया कि मैंने विक्टिम नंबर-1 के चीखने की आवाज सुनी थी। उसे देखा भी था। उसके आसपास काफी भीड़ थी। मैंने उस भीड़ में चिंगलेन और इनओतोन नाम के दो लोगों को पहचान लिया।
इसके बाद दोनों को गांव के मेन रोड तक बिना कपड़ों के लाया गया था। भीड़ में कुछ लोग लड़कियों की मदद करना चाहते थे। उन्होंने दोनों को कपड़े देने चाहे, लेकिन आरोपियों ने उन्हें धमकाया कि दोबारा मदद करने आए तो तुम्हारा भी बुरा हाल करेंगे। चार्जशीट में लिखा है कि विक्टिम नंबर-3 भी वहीं पास में थी। उसने पूरी घटना देखी थी।

मामले की जीरो FIR 18 मई, 2023 को दर्ज की गई। इसमें मैतेई संगठनों से जुड़े 800 से 1000 लोगों को आरोपी बनाया गया। दूसरी FIR 21 जून को थौबल जिले में दर्ज की गई।
परिवारवालों की डेडबॉडी देखीं, पूरी रात जंगल में छिपी रहीं जांच रिपोर्ट के मुताबिक, भीड़ दोनों लड़कियों को दूसरी जगह ले जाने लगी। रास्ते में विक्टिम नंबर-2 को अपने कपड़े बिखरे हुए मिले। उसने कुछ कपड़े उठा लिए, लेकिन फटे होने की वजह से उन्हें पहन नहीं सकीं। विक्टिम नंबर-1 ने कपड़े पहनने में उसकी मदद की। दोनों अब भी भीड़ से घिरीं हुई थीं। उन्होंने हिम्मत जुटाकर जान की भीख मांगी। इस पर भीड़ ने दोनों को छोड़ दिया।
दोनों थोड़ा आगे बढ़ीं, तो उनके परिवार के दो पुरुष सदस्यों की लाशें एक दूसरे के ऊपर पड़ी देखीं। कुछ आगे गांव के पास सूखे नाले में विक्टिम नंबर-1 के भाई की डेडबॉडी मिली। उसकी खोपड़ी फटी हुई थी। आसपास कई लोग लाठी-डंडे और कुल्हाड़ी लेकर खड़े थे। कुछ के हाथ में बड़े-बड़े चाकू भी थे। ये लोग विक्टिम को रुका देखकर मारने के लिए दौड़े। कुछ बुजुर्गों ने भीड़ को रोक दिया। भीड़ का गुस्सा देखकर लड़कियां तेजी से जंगल की तरफ भागीं।
आगे उन्हें गांव के दो लोग मिले। उनमें से एक के पास फोन था। विक्टिम नंबर-2 ने फोन से अपने परिचितों को घटना के बारे में बताया। इसके बाद पैदल चलते हुए दोनों इरॉन्ग तांगखुल गांव पहुंचीं। वहां विक्टिम नंबर-1 का दोस्त मिल गया। उसने दोनों को पहनने के लिए कपड़े दिए।
वहां खतरा था, इसलिए दोस्त दोनों लड़कियों को जंगलों में ले गया। वहां उनके समुदाय के लोग छिपे थे। दोनों लड़कियों ने जंगल में ही रात बिताई। जांच के दौरान गवाहों ने माना कि दोनों के शरीर पर कपड़े नहीं थे।

पोती को लेकर घर से भागी, जिंदा हूं इसलिए सब भूल गए बी. फैनोम गांव में भीड़ ने अटैक किया, तब विक्टिम नंबर 3 वहीं मौजूद थीं। उन्होंने ढाई साल की पोती को उठाया, पीठ से बांधा और घर से भागीं। भीड़ ने उसे घेरकर मारने की कोशिश की थी। कपड़े भी खींचे थे। अब ये महिला परिवार के साथ दिल्ली में रहती है। हमने उनसे बात करने वाले एक सोशल एक्टिविस्ट से विक्टिम की आपबीती समझी।
विक्टिम की उम्र 55 साल है। वे घटना के बारे में बताती हैं, ‘वो डर आज भी दिलोदिमाग में है। मेरी पोती को भी सब याद है। उस समय वो ढाई साल की थी, अब 5 साल की हो चुकी है। उससे पूछो कि हम कैसे भागे थे। वो सब बता देगी।’
विक्टिम बताती हैं, ‘न्यूड परेड का जो वीडियो वायरल हुआ था, मैं उस घटना की गवाह हूं। उस दिन हमारे घरों में आग लगाई गई। हम 10 लोग बचने के लिए जंगल में भागे थे। भीड़ ने हमें खोज निकाला। मुझे भी पीटा। शायद मेरी पोती को देखकर उन्होंने मुझे छोड़ दिया था। अगर मेरी पोती न होती, तो शायद मैं भी जिंदा नहीं बच पाती। या मेरे साथ भी वैसी ही दरिंदगी होती।’
‘मैं कई किमी तक पोती को पीठ पर बांधकर जंगल की ओर भागती रही। पूरी रात जंगल में छिपकर बिताई। बच्ची भूख से रोती रही। उस रात लगा कि अब नहीं बच पाएंगे। भूख से ही मर जाएंगे। फिर अगली सुबह पास के एक गांव में पहुंची। एक खाली घर में खाने का सामान मिल गया। इसके बाद हम राहत शिविर में पहुंचे। वहां कुछ महीने रही। मेरा 7 लोगों का परिवार है। सभी के साथ दिल्ली आ गई। यहां दो कमरे का मकान किराये पर लिया है। सब उसी में रह रहे हैं।’

पीड़ित आज भी घर से नहीं निकलतीं, आरोपी पकड़े गए, लेकिन डर बाकी जिन लड़कियों का वीडियो वायरल हुआ था, उनके बारे में गवाह बताती हैं, ‘वे अभी मणिपुर में ही रहती हैं। उस खौफ की वजह से आज भी घर से बाहर नहीं निकलती हैं। किसी से बात नहीं करतीं हैं। परिवारवालों और करीबियों से थोड़ी बात कर लेतीं हैं। डर इतना है कि आज भी कई दिन तक खाना नहीं खाती हैं। इस बात से भी डरती हैं कि वो वीडियो फिर से सोशल मीडिया पर कभी सामने न आ जाए।’
‘घटना के बाद सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर एक कमेटी बनी। 12 लाख रुपए मुआवजा मिला, आरोपियों को जेल भेज दिया गया, लेकिन इससे हमारा दर्द खत्म नहीं हुआ। इसलिए मैं कभी मणिपुर वापस नहीं जाना चाहती। हम बेशक जिंदा हैं, लेकिन सब हमें भूल गए हैं। हमें दिल्ली में भी काफी दिक्कत हो रही है, लेकिन मणिपुर जाने से डर लगता है। हमारे पास यहां घर नहीं है।’
‘मणिपुर में हम बहुत खुश रहते थे। सालभर का धान उगाते थे। चावल मिलता था। उस घटना के बाद से दिमाग काम नहीं करता। बस टेंशन रहती है। मणिपुर लौट गए, तो वही डरावनी यादें फिर ताजा हो जाएंगी। इसलिए अब यहीं रहना है।’
दैनिक भास्कर ने इस केस की अपडेट जानने के लिए गृह मंत्रालय और CBI से कॉन्टैक्ट किया। पहले हमने गुवाहाटी में CBI ऑफिस फोन किया। वहां बताया गया कि मामला सुप्रीम कोर्ट में है, इसलिए इसका जवाब आपको हेडक्वॉर्टर से मिलेगा। हमने दिल्ली में CBI हेड क्वॉर्टर में संपर्क किया। 9 मार्च को CBI और गृह मंत्रालय की ऑफिशियल ईमेल आईडी पर ये सवाल भेजे।
1. CBI ने मणिपुर हिंसा में जितनी FIR दर्ज की हैं, उनमें कितने मामलों में दोषियों को सजा हो पाई है? 2. न्यूड परेड निकालने की घटना में पीड़ित परिवार का दावा है कि उन्हें जांच से जुड़ी जानकारी नहीं दी जा रही है। ऐसा क्यों हुआ? 3. कई लोगों के बयान दर्ज नहीं किए गए हैं। ऐसा क्यों हो रहा है।
अब तक इन सवालों का जवाब नहीं मिला है। जवाब आते ही स्टोरी अपडेट की जाएगी।
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