केरला स्टोरी 2 में गीत लिखना बड़ी जिम्मेदारी:साहिल सुल्तानपुरी बोले– संस्कृति, मां भवानी और राजस्थान की परंपरा से प्रेरित होकर एक रात में घूमर लिखा

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फिल्म ‘द केरला स्टोरी 2’ में ‘घूमर’ गीत लिखने वाले गीतकार साहिल सुल्तानपुरी इन दिनों चर्चा में हैं। उन्होंने दैनिक भास्कर से खास बातचीत में बताया कि यह गाना उन्होंने दुर्गा पूजा के दौरान एक रात में लिखा। साहिल कहते हैं कि गाना मां भवानी, राजस्थानी संस्कृति और भारतीय परंपरा से प्रेरित है, इसलिए इसे लिखते समय जिम्मेदारी भी ज्यादा महसूस हुई। उन्होंने यह भी कहा कि फिल्म को लेकर हुए विवाद से ज्यादा जरूरी है कि दर्शक खुद थिएटर जाकर फिल्म देखें और फैसला करें। बातचीत में उन्होंने अपने संघर्ष, इंडस्ट्री के अनुभव और आने वाले प्रोजेक्ट्स पर भी खुलकर बात की। पेश है कुछ प्रमुख अंश.. सवाल: ‘द केरला स्टोरी 2’ में आपका गीत ‘घूमर’ काफी चर्चा में है। इसकी शुरुआत कैसे हुई? जवाब: इस फिल्म के लिए मन्नान शाह भाई का फोन आया था। उन्होंने कहा कि फिल्म में एक घूमर गीत चाहिए। उस समय मैं कोलकाता में दुर्गा पूजा में था। उन्होंने ट्यून भेजी और कहा कि आज ही चाहिए। पूरी रात जागकर मैंने गीत लिखा और रात करीब 2 बजे भेज दिया। सवाल: इस गीत को लिखते समय आपके मन में क्या चल रहा था? जवाब: जब आप किसी संस्कृति को पेश करते हैं तो जिम्मेदारी बढ़ जाती है। घूमर राजस्थान की पहचान है, इसलिए मैंने कोशिश की कि शब्दों में वही सम्मान और भाव आएं। गाना मां भवानी और भारतीय संस्कृति से जुड़ा है, इसलिए इसे बहुत श्रद्धा के साथ लिखा। सवाल: क्या इसके लिए आपने खास रिसर्च भी की? जवाब: हां, थोड़ी बहुत जानकारी पहले से थी क्योंकि मैंने पहले भी राजस्थानी बैकड्रॉप वाली फिल्म और एक सीरियल किया था। इसके अलावा इंटरनेट और अपने अनुभव से मारवाड़ी शब्द और संस्कृति को समझकर गीत में शामिल किया। सवाल: फिल्म के निर्माता विपुल अमृतलाल शाह ने आप पर भरोसा कैसे जताया? जवाब: मैं उनका बहुत आभारी हूं। इससे पहले उनकी फिल्म ‘कमांडो 3’ में मेरा लिखा गाना ‘आंखियां मिलावांगा’ था, जिसे लोगों ने बहुत पसंद किया। उसी भरोसे की वजह से उन्होंने मुझे फिर मौका दिया। सवाल: ‘द केरला स्टोरी 2’ को लेकर पहले काफी विवाद भी हुए। आपने इसे कैसे देखा? जवाब: मेरा मानना है कि हर फिल्म का अपना मुद्दा होता है। अगर किसी को आपत्ति है तो वह अपनी राय रख सकता है, लेकिन फैसला दर्शकों को करना चाहिए। लोगों को थिएटर जाकर फिल्म देखनी चाहिए, फिर तय करना चाहिए कि सही क्या है। सवाल: कुछ फिल्मकारों ने भी फिल्म का विरोध किया था, इस पर आपकी क्या राय है? जवाब: मैं किसी का विरोध नहीं करता। हर किसी की अपनी सोच होती है। लेकिन मेरा मानना है कि किसी भी बात को कहने का एक तरीका होना चाहिए। अगर सुझाव देना है तो सम्मान के साथ देना चाहिए। सवाल: मुंबई आने के बाद आपका पहला बड़ा मौका कब मिला? जवाब: मैं 1995 के आसपास मुंबई आया। पहला मौका मुझे टी-सीरीज में मिला। 1999 में हमने क्रिकेट वर्ल्ड कप पर ‘जीतेंगे हम हिंदुस्तानी’ नाम का एल्बम किया था। सवाल: अब तक आपने कितने गाने लिखे हैं? जवाब: लगभग 300 गाने रजिस्टर हो चुके हैं। कुछ फिल्मों में, कुछ एल्बम में और कुछ अलग प्रोजेक्ट्स में। सवाल: आगे किन प्रोजेक्ट्स में काम कर रहे हैं? जवाब: कुछ प्रोजेक्ट्स लाइनअप हैं, लेकिन अभी उनके नाम बताना मुश्किल है। कई बार फिल्मों में गाने बाद में हट भी जाते हैं, इसलिए मैं तभी बताना पसंद करता हूं जब सब तय हो जाए। सवाल: दर्शकों से क्या कहना चाहेंगे? जवाब: बस यही कि फिल्म देखें और ‘घूमर’ गीत को भी प्यार दें। अगर लोगों को हमारा काम पसंद आए, वही हमारे लिए सबसे बड़ी खुशी है।



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