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जेजेएम के तहत अब तक बाड़मेर लिफ्ट परियोजना व लघु योजनाओं में बाड़मेर व शिव विधानसभा के 15 गांवों पर 11.80 करोड़ रुपए से अधिक खर्च कर 1496 घरों को नल से जोड़ा गया है, लेकिन पिछले डेढ़ से दो साल बाद भी लोग पानी के लिए तरस रहे हैं। इन सरहदी इलाकों में बिना प्लानिंग के जल जीवन मिशन के तहत नल तो लगा दिए, लेकिन एक बूंद भी पानी नहीं मिल रहा है। नतीजन ग्रामीणों को महंगे दामों पर टैंकरों से पानी खरीदना पड़ रहा है। नल के बावजूद जिन गांवों में जल संकट बना हुआ है, इनमें मातासर व साउथ मातासर, वांकलपुरा, करणपुरा, जहानपुरा, विशनपुर, अमरपुरा, मायलों की ढाणी, जदाणियों का वास, हरदाणियों की ढाणी, अर्जुन का तला, मेहरों की ढाणी, बामणिया वास, हाफत नगर, मुसलमानों की ढाणी शामिल हैं। भास्कर की टीम इन गांवों में पहुंची तब इसका खुलासा हुआ। अधूरे प्रोजेक्ट को बताया पूर्ण लिफ्ट परियोजना में मातासर व साउथ मातासर के घर व ढाणियों में लगे नलों में पानी नहीं आ रहा। यहां स्थिति और भी विकट बनी हुई है। दो साल पहले कनेक्शन हो चुके हैं। टेस्टिंग के दौरान एक बार तो सभी घरों में पानी पहुंचाया, लेकिन उसके बाद से 70 प्रतिशत घरों में पानी नहीं पहुंचा। कनेक्शन किए, पर पानी नहीं प्रोजेक्ट की ओर से सीडब्ल्यूआर व पंपिंग स्टेशन नहीं बनाया गया है। इससे प्रेशर से पानी सप्लाई नहीं होने से महज आसपास के कुछ घरों तक ही पानी मुश्किल से पहुंच रहा है। वांकलपुरा व करणपुरा में भी काम पूरा हुए सवा दो साल हो चुके हैं। यहां टंकी से पास पहले नंबर पर होने वाले कनेक्शन पर भी दो साल में तीन बार ही पानी पहुंचा है। लाइन से 7 व 8 नंबर में भीलों के पाड़ा में कनेक्शन हो रखे हैं, लेकिन वहां पानी की एक बूंद भी नहीं पहुंची। ग्रामीण बोले, पानी सप्लाई नहीं देना था तो कनेक्शन क्यों किए मातासर निवासी समदा ने बताया कि हमारे घरों में नल लगाए दो साल बीत गए, लेकिन पानी नहीं आया। ग्रामीण हरीश गोदारा ने बताया कि कनेक्शन के 2500 रुपए दिए थे, लेकिन नलों में पानी ही नहीं आ रहा है। 1000 रुपए देकर टैंकर मंगवाने पड़ रहे हैं। भंवरी ने बताया कि मंगने की ढाणी से पानी खरीदकर लाते हैं। नहरी पानी को देखा ही नहीं। साउथ मातासर के देराजराम पालीवाल व मानाराम ने बताया कि दो लीटर पानी एक बार आया था, जो पौधे को पिलाया। विरधाणी मेघवालों की ढाणी, रामदाणी सारणों की ढाणी, तुलसाणियों की ढाणी, सुखाणी गोदारों की ढाणी, देदाणी सारणों की ढाणी, करनाणी पोटलियों की ढाणी, धतरवालों की ढाणी, सताणी मेघवालों की ढाणी में नल लगे दो साल बीत गए, लेकिन पानी नहीं आ रहा। वांकलपुरा के पताराम, नेनूदेवी, इंद्रादेवी, करणपुरा के अमरसिंह गोयल व ओमाराम ने बताया कि दो साल से कनेक्शन करने के बाद भी एक बूंद घरों तक मीठा पानी नहीं पहुंच रहा है। “मातासर में 15 दिन के अंतराल में सप्लाई हो रही है। जलकुंड, स्कूल में तो पानी सप्लाई हो रही है, लेकिन सीडब्ल्यूआर व पंपिंग हाउस बनने के बाद ही अंतिम छोर के घरों तक पानी पहुंचेगा। फिलहाल 40 प्रतिशत घरों में ही पानी नहीं पहुंच रहा है।” -भुवनेश कुलदीप, एक्सईएन, प्रोजेक्ट, लिफ्ट कैनाल।
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बाड़मेर लिफ्ट परियोजना:बिना प्लानिंग 15 गांवों में किए नल कनेक्शन, पानी एक बूंद नहीं आया
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