SC के फैसले पर CJI के भाई को फोन किया:चीफ जस्टिस बोले- मुझे धमकाने की कोशिश न करें, 23 सालों से ऐसे लोगों से निपट रहा

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सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने बुधवार को एक याचिकाकर्ता के पिता को कड़ी फटकार लगाई। CJI के मुताबिक, व्यक्ति ने उनके सुनाए आदेश को लेकर उनके भाई को फोन किया था। CJI ने कोर्ट में सुनवाई के दौरान कहा- याचिकाकर्ता के पिता ने मेरे भाई को फोन करके पूछा कि CJI ने ऐसा आदेश कैसे दिया। क्या अब वह मुझे निर्देश देंगे? मुझे धमकाने की कोशिश न करें। चीफ जस्टिस ने आगे कहा- कोई ऐसा करने की हिम्मत नहीं करता और आपको लगता है कि मैं इस वजह से केस ट्रांसफर कर दूंगा? मैं पिछले 23 सालों से ऐसे ही लोगों से निपटता आ रहा हूं। CJI ने सवाल उठाया कि याचिकाकर्ता के पिता के खिलाफ अवमानना की कार्रवाई क्यों न शुरू की जाए। इस पर वकील ने कहा कि उन्हें इसकी जानकारी नहीं थी और उन्होंने माफी मांगी। धर्मांतरण के बाद मेडिकल कॉलेज में एडमिशन से जुड़ा मामला यह पूरा मामला दो जनरल कैटेगरी के स्टूडेंट्स की याचिका से जुड़ा है। हरियाणा के दो लोगों ने उत्तर प्रदेश के सुभारती मेडिकल कॉलेज में पोस्टग्रेजुएट मेडिकल कोर्स में बौद्ध अल्पसंख्यक कोटे के तहत प्रवेश की मांग की थी। इस कॉलेज को बौद्ध अल्पसंख्यक शैक्षणिक संस्थान घोषित किया गया है। याचिकाकर्ताओं ने दावा किया कि उन्होंने बौद्ध धर्म अपनाया है और इसके लिए सब-डिविजनल ऑफिसर की तरफ से जारी प्रमाणपत्र भी पेश किया। CJI ने कहा था- यह PG में एडमिशन पाने की कोशिश लगती है हालांकि जनवरी में कोर्ट ने इस धर्मांतरण पर गंभीर सवाल उठाए थे और कहा था कि यह कदम केवल PG मेडिकल कोर्स में अल्पसंख्यक कोटे से एडमिशन पाने की कोशिश लगती है। CJI ने यह भी जिक्र किया था कि याचिकाकर्ता पुनिया जाति से हैं। CJI की अध्यक्षता वाली बेंच ने याचिकाकर्ताओं के अल्पसंख्यक प्रमाणपत्रों की जांच के आदेश दिए थे। आज सुनवाई के दौरान CJI ने याचिकाकर्ता के वकील से कहा- आप पहले तथ्य जांचें और अगर क्लाइंट गलत है तो केस वापस लें। चीफ जस्टिस ने कहा- चाहे वह देश से बाहर छिप जाए, मुझे ऐसे लोगों से निपटना आता है। इसके बाद कोर्ट ने मामले को आगे की सुनवाई के लिए सूचीबद्ध कर दिया और कहा कि हरियाणा के अधिकारियों को भी प्रभावित करने की कोशिश की जा रही थी। ————————– सुप्रीम कोर्ट से जुड़ी ये खबरें भी पढ़ें… SC बोला-आर्थिक बोझ का हवाला देकर मुआवजा नहीं छीन सकते, जमीन अधिग्रहण मामले में नेशनल हाईवे अथॉरिटी की याचिका खारिज सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को 2019 से पहले हुए भूमि अधिग्रहण मामलों में सोलाटियम और ब्याज देने से जुड़े अपने फैसले पर नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) की पुनर्विचार याचिका खारिज कर दी है। कोर्ट ने कहा कि जमीन अधिग्रहण के मामलों में सही मुआवजा मिलना संवैधानिक अधिकार है। इसे कमजोर नहीं किया जा सकता। इसे सरकार पर पड़ने वाले आर्थिक बोझ से नहीं जोड़ा जा सकता। पूरी खबर पढ़ें… सुप्रीम कोर्ट बोला-महिला अफसर सेना में स्थायी कमीशन की हकदार:इससे इनकार करना भेदभाव था; जिनकी सर्विस खत्म हुई, उन्हें भी पेंशन मिलेगी सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना में शॉर्ट सर्विस कमीशन (SSC) की महिला अफसरों को पूरी पेंशन देने का आदेश दिया। जिन मामलों में महिला अफसर परमानेंट कमीशन (PC) नहीं मिलने के कारण पहले ही सेवा छोड़ चुकी थीं, उन्हें एकमुश्त राहत देते हुए 20 साल की सेवा पूरी मानकर पेंशन और अन्य लाभ देने का फैसला सुनाया। पूरी खबर पढ़ें…



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