पश्चिम बंगाल के आसनसोल में रामनवमी की तैयारियां चल रही हैं। रामनवमी 27 मार्च को है, लेकिन यहां 5 दिन तक कार्यक्रम होंगे। BJP का प्लान है कि इस दौरान हिंदुओं पर हो रहे अत्याचार का मुद्दा उठाए। इसमें बांग्लादेश में दीपू दास, मुर्शिदाबाद में हरिगोबिंद द
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रामनवमी की तैयारियां पूरे बंगाल में हो रही हैं, लेकिन आसनसोल का जिक्र इसलिए क्योंकि यहां 2018 में रामनवमी पर हिंसा भड़की थी। रानीगंज और आसनसोल के बाजारों में 100 से ज्यादा दुकानें और घर जला दिए गए थे। तीन मौतें हुईं और कर्फ्यू लगाना पड़ा।

रामनवमी से पहले हावड़ा पुलिस के अधिकारियों ने जुलूस के रूट पर सुरक्षा इंतजाम देखे।
पश्चिम बंगाल में 23 और 29 अप्रैल को विधानसभा चुनाव के लिए वोटिंग होनी है। रामनवमी BJP और TMC दोनों के लिए बड़ी परीक्षा है। अनुमान है कि राज्य में करीब 20 हजार शोभा यात्राएं और जुलूस निकाले जाएंगे।
पहले हिंदू संगठनों की तैयारी… पश्चिम बंगाल में हिंदू संगठन रामनवमी पर 12 साल से रैलियां निकाल रहे हैं। इनमें RSS, बजरंग दल और विश्व हिंदू परिषद के लोग शामिल होते हैं। अब इनमें पॉलिटिकल पार्टियां भी शामिल होने लगी हैं। हालांकि जुलूसों में पार्टी का झंडा नहीं होता।
रामनवमी पर ज्यादातर कार्यक्रम हिंदी भाषी इलाकों में होते हैं। इसमें आसनसोल भी है। हमने आसनसोल साउथ की विधायक और BJP की वाइस प्रेसिडेंट अग्निमित्रा पाल से तैयारियों के बारे में पूछा। वे कहती हैं, ‘इस बार बर्नपुर, चित्रा मोड़, राधानगर, बल्लावपुर, मोशिला, काली पहाड़ी और एगरा में रैलियां निकालेंगे। इनमें 10 हजार से ज्यादा लोग शामिल होंगे।’
रैलियों पर चुनाव का असर भी होगा? अग्निमित्रा कहती हैं, ’चुनाव की तो नहीं, लेकिन लोगों पर हो रहे अत्याचार पर बात होगी। बांग्लादेश से लेकर बंगाल तक हिंदुओं को मार दिया जाता है, लेकिन सरकार कुछ नहीं करती।’

हथियारों के प्रदर्शन पर रोक, BJP नेता बोले- हथियार लेकर जाएंगे हम पुरुलिया पहुंचे। यहां करीब 82% आबादी हिंदू है। यहां की रघुनाथपुर सीट BJP के पास है। रामनवमी की तैयारियों पर BJP के संयोजक शांतनु चटर्जी बताते हैं, ‘2005 से यहां रामनवमी का जुलूस निकल रहा है। इसमें पार्टियों के लोग शामिल होते हैं, लेकिन लीड BJP करती है। हमने जुलूस के लिए पुलिस को बता दिया है। हमारा अखाड़ा रजिस्टर्ड है, इसलिए जुलूस तो निकालेंगे।‘
रैली के खर्च पर वे कहते हैं, ‘हमने घरों से चंदा लिया है। इस बार तैयारियों में काफी खर्च हुआ है।‘
शांतनु थोड़े गुस्से में कहते हैं,
हमें हथियार की परमिशन नहीं मिल रही है। हमारे सभी देवी-देवता हथियार लिए हुए हैं, इसलिए हम लोग हथियार के साथ रैली निकालेंगे। 5 से 6 घंटे का कार्यक्रम होगा। करीब 10 हजार लोग शामिल होंगे।

दरअसल, पिछले साल कलकत्ता हाईकोर्ट ने रामनवमी में जुलूस के दौरान हथियारों के प्रदर्शन पर रोक लगाई थी। इसके बावजूद पूर्वी मेदिनीपुर जिले के तामलुक में निकले जुलूस में लोग हथियार लहराते देखे गए थे। इसमें BJP नेता दिलीप घोष भी मौजूद थे।
इस बार भी हाईकोर्ट ने हावड़ा में राम नवमी जुलूस की अनुमति देते हुए हथियारों पर प्रतिबंध लगाया है। अंजनी पुत्र सेना नाम के संगठन ने कोर्ट में याचिका लगाई थी कि पुलिस जुलूस निकालने की परमिशन नहीं दे रही है। कोर्ट ने संगठन को 26 मार्च को सुबह 8:30 बजे से दोपहर 1 बजे के बीच जुलूस निकालने की परमिशन दे दी।
रामनवमी से पहले पुलिस ने सभी समितियों के साथ मीटिंग की हैं। पुलिस के एक अधिकारी बताते हैं कि हमने कहा है कि समितियां शांति से रैलियां निकालें। अगर कोई कानून तोड़ेगा, तो कार्रवाई की जाएगी।

कलकत्ता हाईकोर्ट ने साफ कर दिया है कि रामनवमी पर रैली में हथियारों के प्रदर्शन की परमिशन नहीं होगी।
मालदा में 52 संगठन मिलकर रैली निकालेंगे हम नॉर्थ बंगाल के मालदा जिले पहुंचे। यहां 10 साल से रामनवमी पर प्रोग्राम हो रहे हैं। मालदा में BJP की वाइस प्रेसिडेंट तंद्रा राय चौधरी बताती हैं, ‘पिछले साल 12 जगह छोटी-बड़ी रैलियां निकाली गई थीं। सिर्फ इंग्लिश बाजार में करीब 6 हजार लोग जुटे थे। इस बार इससे भी ज्यादा आएंगे।‘
‘रामनवमी के लिए हमने दो बार मीटिंग की है। इसमें 52 संगठन शामिल हुए। साफ है कि इस बार ज्यादा भीड़ जुटेगी। 5 किमी लंबी रैली होगी। पहले थाने में लेटर देना पड़ता था, अब सारा प्रोसेस ऑनलाइन हो चुका है। रैली का रूट, लोगों की संख्या और लाउडस्पीकर की जानकारी सब ऑनलाइन दी जाती है।‘
परमिशन के बारे में हिंदू जागरण मंच के स्टेट प्रेसिडेंट अमित सरकार कहते हैं, ‘हमें रामनवमी के लिए परमिशन नहीं लेनी पड़ती, सिर्फ जानकारी देनी होती है। 2024-2025 में कलकत्ता हाईकोर्ट ने सशर्त परमिशन दी है। इस बार बिना डीजे और हथियार के रैली निकाली जाएगी।‘

बंगाल में चुनावी साल में रामनवमी के जुलूस के लिए जगह-जगह पर स्वागत गेट बनाए गए हैं।
नॉर्थ बंगाल के 8 जिलों में 150 से ज्यादा जुलूस निकलेंगे सिलीगुड़ी में 92% आबादी हिंदू है। श्रीरामनवमी जिला समिति के सचिव लक्ष्मण बंसल कहते हैं, ‘नॉर्थ बंगाल के सभी आठ जिलों में 150 शोभा यात्राएं निकाली जा रही हैं। 27 मार्च को सिलीगुड़ी में यात्रा निकलेगी, जिसमें साध्वी प्राची भी होंगी। पिछले साल यहां जुलूस में 6 लाख से ज्यादा लोग आए थे। इस बार आंकड़ा 7 लाख के पार होगा।‘
‘रैली में करीब 150 झाकियां होंगी। इसमें वंदे मातरम् का सफर, संघ के 100 साल, हिंदुओं पर अत्याचार को दिखाएंगे। नॉर्थ बंगाल के 8 जिलों में करीब 35 लाख लोग शोभा यात्रा का हिस्सा बनेंगे।‘
TMC और BJP के नेताओं की भागीदारी पर वे कहते हैं, ‘यहां राम भक्तों का जमावड़ा होगा। इस बार चुनाव हैं, इसलिए TMC के लोकल नेता जरूर शामिल होंगे।’

TMC की तैयारी ‘जुलूस हमेशा निकलता है, बस पार्टी का झंडा नहीं होता’ पश्चिम बंगाल में पिछले कुछ साल से रामनवमी पर होने वाले कार्यक्रमों में TMC भी शामिल हो रही है। हमने आसनसोल में पार्टी के एक लीडर ने बात की। वे पहचान उजागर नहीं करना चाहते।
वे कहते हैं, ‘पार्टी किसी भी कीमत पर वोट नहीं खोना चाहती। हिंदी भाषी इलाकों में रामनवमी आस्था और शौर्य का विषय है। अब ये सियासी हो चुका है। इसलिए TMC भी जुलूस निकालेगी। ये पहली बार नहीं है। पहले भी पार्टी नेताओं ने जुलूस निकाले हैं, बस उसमें पार्टी का झंडा नहीं होता है। ऐसा ज्यादातर हिंदी भाषी इलाकों में ही करते हैं।‘
‘BJP नेता जितेंद्र तिवारी पहले TMC से विधायक थे। आसनसोल के मेयर रह चुके हैं। वे खुद TMC के जुलूस का प्रतिनिधित्व करते थे और भगवा पगड़ी के साथ अखाड़े में शामिल होते थे। इस बार पार्टी के नाम पर न सही, लेकिन पार्टी के लीडर जरूर रैली निकालेंगे।‘

‘राम सबके, जय श्रीराम कहने से सिर्फ BJP के नहीं’ आसनसोल में TMC पार्षद रंजीत सिंह इसे बेहतर तरीके से समझाते हैं। वे कहते हैं, ‘रामनवमी पर हमारे इलाके में कई जगहों से रैली निकलती है। मंदिरों से होते हुए सब एक जगह इकट्ठा होते हैं। इसमें BJP और TMC का कोई मामला नहीं है। सिर्फ जय श्रीराम कह देने से राम BJP के नहीं हो गए, वे तो सबके हैं।‘
‘इन रैलियों में नेता सीधे शामिल नहीं होते, लेकिन ज्यादातर कामकाज पार्टी के कार्यकर्ता ही देखते हैं। हमारे वार्ड में भी कई जगह रैली निकलती है। इसे हिंदू उत्सव की तरह मनाया जाता है।‘
ऐसी रैलियां कब से निकल रही हैं, कौन फंड करता है? जवाब में रंजीत कहते हैं, ‘2014 से रैलियां निकाल रहे हैं। फंड के लिए लोगों से चंदा लेते है। लोकल नेता भी मदद करते हैं।‘

कोलकाता के न्यू टाउन में रामनवमी के जुलूस के लिए युवक जगह-जगह झंडे लगा रहे हैं।
एक्सपर्ट बोले- चुनाव की वजह से रामनवमी पर ज्यादा फोकस सीनियर जर्नलिस्ट विनोद जायसवाल कहते हैं, ‘आसनसोल और दुर्गापुर में ज्यादातर विश्व हिंदू परिषद रैली निकालती है। कुछ अखाड़ों को TMC के लोग लीड करते हैं, ताकि ये मैसेज न जाए कि TMC हिंदू विरोधी है। इस बार चुनाव का माहौल है, इसलिए पार्टियां ज्यादा फोकस कर रही हैं।’
एक और सीनियर जर्नलिस्ट नाम न देने की शर्त पर कहते हैं, ‘पिछले कुछ साल में रामनवमी मनाने के तरीके में बहुत अंतर आ गया है। लेफ्ट की सरकार के वक्त भी RSS के लोग जुलूस निकालते थे। तब इसका राजनीतिकरण नहीं हुआ था।’
‘लोग घरों पर हनुमान जी का झंडा चढ़ाते थे। कुछ लोग ही जुलूस का हिस्सा बनते थे। जैसे-जैसे हिंदुत्व का प्रचार हुआ, रामनवमी में झंडे का रंग बदलने लगा। उसमें बजरंग बली के फोटो भी बदल गई। पिछले 10 साल में पश्चिम बंगाल में रामनवमी का ज्यादा क्रेज बढ़ा है।’
8 साल में कैसे बढ़ती गई BJP 2018 में रामनवमी के जुलूस के दौरान पश्चिम बंगाल के रानीगंज, आसनसोल और पुरुलिया सहित कई इलाकों में हिंसक झड़पें और दंगे हुए। इसके बाद राज्य में पंचायत चुनाव हुए। BJP दूसरी बड़ी पार्टी बनकर उभरी। TMC ने 38,118 ग्राम पंचायत सीटों पर कब्जा किया। BJP ने 5,779 सीटें जीतीं।
2019 में लोकसभा चुनाव से पहले रामनवमी पर फिर हिंसा भड़की। चुनाव में राज्य की कानून-व्यवस्था पर सवाल उठा। इन घटनाओं ने राज्य में ध्रुवीकरण तेज कर दिया। 2014 में 34 सीटें जीतने वाली TMC 22 सीटों पर सिमट गई। वहीं, 2 सीटें जीतने वाली BJP ने 18 सीटें जीतीं।

रामनवमी से पहले मूर्ति तोड़ने का विरोध नंदीग्राम के रेयापाड़ा में 22 मार्च को रामनवमी से पहले भगवान की मूर्ति तोड़ दी गई। पश्चिम बंगाल के नेता प्रतिपक्ष और BJP लीडर शुभेंदु अधिकारी ने इसके विरोध में प्रदर्शन किया। उनका आरोप है कि ये सब तृणमूल कांग्रेस के इशारों पर हो रहा है।
शुभेंदु ने कहा, ’मूर्ति तोड़ने के पीछे जिहादियों का हाथ है। बंगाल में चुनाव की तारीख जैसे-जैसे करीब आ रही हैं, ये घटनाएं तनाव बढ़ा रही हैं। अगर ऐसे लोगों की पहचान करके उन्हें जल्द गिरफ्तार नहीं किया गया, तो हालात बेकाबू हो सकते हैं।’
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क्या साउथ बंगाल से निकलेगा BJP की जीत का रास्ता

7 मार्च को पश्चिम बंगाल के पुरुलिया में BJP की परिवर्तन यात्रा पहुंची। यहां रघुनाथपुर इंडस्ट्रियल एरिया है इसलिए हिंदी भाषी और आदिवासी आबादी ज्यादा है। यहां से BJP के ही विधायक हैं, फिर भी रैली में भीड़ कम पहुंची। यहीं रास्ते में अवधेश राम मिले। वो रैली में नहीं आए लेकिन चाहते हैं कि राज्य में सरकार जरुर बदले। पढ़िए पूरी खबर…















