5 घंटे पहलेलेखक: अदिति ओझा
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गर्मियों में पसीना ज्यादा आता है। इसलिए शरीर की पानी की जरूरत बढ़ जाती है। अगर पानी की ये अतिरिक्त जरूरत पूरी न की जाए तो डिहाइड्रेशन हो सकता है।
डिहाइड्रेशन यानी शरीर में पानी और इलेक्ट्रोलाइट्स की कमी। इसका सीधा प्रभाव शरीर के सभी अंगों पर पड़ता है।
दरअसल, शरीर में करीब 60-70% पानी होता है। ब्रेन और हार्ट में लगभग 73%, मांसपेशियों और किडनी में करीब 79%, स्किन में 64% और फेफड़ों में लगभग 83% पानी होता है। इसलिए शरीर में पानी की कमी से गंभीर समस्या हो सकती है।
इसलिए आज जरूरत की खबर में डिहाइड्रेशन की बात करेंगे। साथ ही जानेंगे कि-
- गर्मियों में डिहाइड्रेशन का रिस्क ज्यादा क्यों होता है?
- इसके शुरुआती संकेत क्या हैं?
- इससे बचने के लिए क्या करना चाहिए?
एक्सपर्ट: डॉ. रोहित शर्मा, कंसल्टेंट, इंटरनल मेडिसिन, अपोलो स्पेक्ट्रा हॉस्पिटल, जयपुर
सवाल- डिहाइड्रेशन क्या होता है?
जवाब- डिहाइड्रेशन एक ऐसी कंडीशन है, जिसमें शरीर में पानी और जरूरी फ्लूइड (तरल पदार्थ) की कमी हो जाती है। इससे शरीर सामान्य तरीके से काम नहीं कर पाता है।
यह तब होता है, जब शरीर से पसीना, पेशाब, उल्टी या दस्त के जरिए ज्यादा तरल बाहर निकल जाता है। इससे शरीर में पानी का संतुलन बिगड़ जाता है और डिहाइड्रेशन की स्थिति बन जाती है।
सवाल– शरीर में पानी का संतुलन (वाटर बैलेंस) रहना क्यों जरूरी है? क्या पानी की कमी लाइफ थ्रेटनिंग भी हो सकती है?
जवाब- शरीर के हर अहम फंक्शन के लिए पानी बेहद जरूरी है। जैसे-
- पानी शरीर के तापमान को कंट्रोल में रखता है।
- शरीर से टॉक्सिन्स को बाहर निकालने में मदद करता है।
- लार बनाता है, जो खाने और पाचन के लिए जरूरी है।
- हड्डियों के जोड़ों के काम में मदद करता है।
- शरीर के केमिकल्स के बैलेंस्ड रखता है।
- ब्रेन के हॉर्मोन्स और न्यूरोट्रांसमीटर्स को एक्टिव रखता है।
- शरीर के हर हिस्से तक ऑक्सीजन पहुंचाने में मदद करता है।
- ब्रेन और स्पाइनल कॉर्ड के लिए शॉक एब्जॉर्बर की तरह काम करता है।
शरीर में पानी की कमी से ये सभी प्रक्रियाएं प्रभावित होने लगती हैं। गंभीर स्थिति में यह लाइफ-थ्रेटनिंग भी हो सकता है।

सवाल- गर्मियों में डिहाइड्रेशन ज्यादा क्यों होता है?
जवाब- गर्मियों में टेम्परेचर ज्यादा होता है। ऐसे में बॉडी टेम्परेचर मेंटेन रखने के लिए ज्यादा पसीना आता है। पसीने के साथ शरीर से पानी और जरूरी इलेक्ट्रोलाइट्स बाहर निकल जाते हैं। अगर समय पर पानी या जरूरी फ्लूइड्स न लिए जाएं तो डिहाइड्रेशन की स्थिति बन सकती है।
सवाल- गर्मियों में ज्यादा डिहाइड्रेशन होने के मुख्य कारण क्या हैं?
जवाब- इसके पीछे कई कारण जिम्मेदार हैं, जैसे-
- तापमान का बढ़ना।
- ज्यादा पसीना आना।
- पर्याप्त पानी न पीना।
- धूप या गर्म वातावरण में ज्यादा समय बिताना।
- शारीरिक मेहनत करना।
इसके अलावा बुखार, उल्टी या दस्त जैसी स्थितियों के कारण भी शरीर में पानी की कमी हो सकती है।
सवाल- डिहाइड्रेशन के शुरुआती संकेत क्या होते हैं?
जवाब- डिहाइड्रेशन के लक्षण उम्र के अनुसार अलग-अलग हो सकते हैं। बच्चों, खासकर शिशुओं और छोटे बच्चों में डिहाइड्रेशन के लक्षण जल्दी दिखाई देने लगते हैं। ग्राफिक से समझते हैं-

वयस्कों में डिहाइड्रेशन के लक्षण आमतौर पर शरीर में पानी की कमी बढ़ने के साथ दिखाई देते हैं, जैसे-

सवाल- डिहाइड्रेशन कब जानलेवा हो सकता है?
जवाब- अगर शरीर में पानी और इलेक्ट्रोलाइट्स इस स्तर तक कम हो जाए कि बॉडी फंक्शनिंग प्रभावित होने लगे तो यह जानलेवा हो सकता है। ऐसी कंडीशंस में किडनी फेलियर और हीट स्ट्रोक का खतरा बढ़ जाता है। ग्राफिक से समझते हैं, यह कब जानलेवा हो सकता है-

सवाल- डिहाइड्रेशन के कारण और कौन सी हेल्थ प्रॉब्लम्स हो सकती हैं?
जवाब- अगर डिहाइड्रेशन लंबे समय तक बना रहे तो इससे शरीर में कई तरह की स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं। ग्राफिक से समझते हैं-

सवाल- किन लोगों को गर्मियों में डिहाइड्रेशन का रिस्क ज्यादा होता है?
जवाब- गर्मियों में कुछ लोगों को डिहाइड्रेशन का खतरा ज्यादा होता है, जैसे-
- छोटे बच्चे और शिशु।
- बुजुर्ग।
- एथलीट।
- जो धूप में काम करते हैं।
- जो हैवी एक्सरसाइज करते हैं।
- जिन्हें बुखार, उल्टी या दस्त की समस्या है।
- जिन्हें कोई क्रॉनिक हेल्थ कंडीशन (डायबीटिज या किडनी की समस्या) है।
- जो मेडिकेशन पर हैं, खासतौर पर जो डाई-यूरेटिक दवाएं ले रहे हैं।
सवाल- क्या सिर्फ धूप में रहने से ही डिहाइड्रेशन हो सकता है?
जवाब- नहीं, डिहाइड्रेशन केवल धूप में रहने से ही नहीं होता है। अगर आप धूप मेें रहने के बावजूद पर्याप्त पानी पीते हैं या इक्लेक्ट्रोलाइट्स लेते हैं तो आप डिहाइड्रेशन से बच सकते हैं। इसका मतलब ये है कि डिहाइड्रेशन के लिए धूप एकमात्र फैक्टर नहीं है। इसके लिए और भी कंडीशंस जिम्मेदार हैं।
सवाल- लंबे समय तक डिहाइड्रेटेड रहने से दिल और किडनी पर क्या असर पड़ता है?
जवाब- लंबे समय तक शरीर में पानी की कमी रहने से ब्लड गाढ़ा हो सकता है। इसके कारण हार्ट को ब्लड पंप करने के लिए ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है। इससे हार्ट बीट्स तेज हो सकती है और ब्लड प्रेशर भी प्रभावित हो सकता है। वहीं डिहाइड्रेशन के कारण किडनी टॉक्सिन्स बाहर नहीं निकाल पाती हैं और वर्कलोड बढ़ जाता है। इसलिए लंबे समय तक डिहाइड्रेटेड रहने पर किडनी स्टोन, किडनी डैमेज या किडनी फेलियरने का रिस्क बढ़ सकता है।
सवाल- क्या गर्मियों में शराब पीने से भी डिहाइड्रेशन का खतरा बढ़ सकता है?
जवाब- हां, शराब डाई-यूरेटिक होती है। इससे शरीर में यूरिन फ्रीक्वेंसी बढ़ जाती है। इसलिए शराब पीने से डिहाइड्रेशन का रिस्क बढ़ जाता है।
सवाल- डिहाइड्रेशन से बचने के लिए क्या करें?
जवाब- डिहाइड्रेशन से बचने के लिए शरीर में फ्लूइड बैलेंस बनाए रखना जरूरी है। इसके लिए कुछ आसान उपाय अपनाए जा सकते हैं। ग्राफिक से समझते हैं-

सवाल- एक सामान्य व्यक्ति को गर्मी के मौसम में दिन में कितना पानी पीना चाहिए?
जवाब- आमतौर पर एक स्वस्थ वयस्क व्यक्ति को दिन में लगभग 2.5 से 3 लीटर पानी पीना चाहिए। हालांकि यह मात्रा मौसम, फिजिकल एक्टिविटी, उम्र और व्यक्ति की हेल्थ कंडीशन के अनुसार कम या ज्यादा हो सकती है।
सवाल- क्या सिर्फ पानी पीना ही डिहाइड्रेशन से बचाव के लिए पर्याप्त है?
जवाब- पानी पीना जरूरी है, लेकिन कई बार केवल पानी पर्याप्त नहीं होता। इसलिए गर्मियों में पानी के साथ-साथ नारियल पानी, छाछ, नींबू पानी, ORS और पानी से भरपूर फल-सब्जियां लेना भी जरूरी होता है।
सवाल- डिहाइड्रेशन होने पर डॉक्टर को दिखाना कब जरूरी है?
जवाब- इन स्थितियों में डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी है-
- बहुत ज्यादा कमजोरी होना
- चक्कर या बेहोशी होना
- यूरिन फ्रीक्वेंसी बहुत कम होना
- तेज बुखार के साथ उल्टी-दस्त होना
- बच्चों में लंबे समय तक रोने पर आंसू न आना और सुस्ती दिखना।
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गर्मी के मौसम में शरीर की पानी की जरूरत बढ़ जाती है। तेज धूप, पसीना और बढ़ते तापमान के कारण शरीर से पानी और जरूरी इलेक्ट्रोलाइट्स कम होने का रिस्क बढ़ जाता है। इससे थकान, चक्कर, डिहाइड्रेशन और हीट स्ट्रोक जैसी समस्याएं हो सकती हैं। पूरी खबर पढ़ें…
















