TMC Leaders Accused Join BJP; Land Scam Allegations

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‘जो जमीन आपने पसंद की है, उसकी कीमत 15 करोड़ 60 लाख है। नेता को 50 हजार प्रति कट्‌ठा और माफिया को 30 हजार प्रति कट्‌ठा देना होगा।’

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‘यानी साढ़े छह बीघा जमीन पर नेता को 1 करोड़ और माफिया को 40 लाख देना होंगे। इसके बाद कोई तकलीफ नहीं होगी। सिंडिकेट सब संभाल लेगा’

यह खुलासा भास्कर के हिडन कैमरे पर सिंडिकेट माफियाओं ने किया है। अधिकतर पश्चिम बंगाल में सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस यानी TMC से जुड़े हैं।

हालांकि, शुभेंदु अधिकारी, अर्जुन सिंह, बैशाली डालमिया, रुद्रनील घोष जैसे जिन TMC नेताओं पर पहले BJP सिंडिकेट चलाने का आरोप लगाती थी, वो अब BJP में ही शामिल हो चुके हैं।

4 नेता और 4 माफिया भास्कर के कैमरे पर बात करते हुए रिकॉर्ड हुए। भास्कर रिपोर्टर ने कंसल्टेंसी कंपनी का मेंबर बनकर सिंडिकेट से जुड़े लोगों से मुलाकात की।

‘जमीन पसंद करो, बाकी हम संभाल लेंगे’

पहली मुलाकात : राजा पाल

ये कौन हैं : मोगरा ग्राम-2, हुगली की प्रधान के पति हैं। TMC के सक्रिय कार्यकर्ता हैं

रिपोर्टर: कोलकाता में स्कूल खोलने के लिए जमीन चाहते हैं

राजा पाल: कितनी चाहिए

रिपोर्टर: 5 बीघा

राजा पाल: ठीक है, आप नंबर दे जाइए। 4-5 जगह दिखा देंगे। जो पसंद आए, उसी के मालिक से बात करवा देंगे

रिपोर्टर: पेपर सही रहेगा

राजा पाल: बिल्कुल सही रहेगा

रिपोर्टर: सुना है यहां सिंडिकेट सिस्टम भी मैनेज करना होता है

राजा पाल: वो हमारे ऊपर छोड़ दीजिए। सिंडिकेट के लोग हमारे साथ हैं

रिपोर्टर : उन्हें क्या देना पड़ता है

राजा पाल : सब बता देंगे, पहले जमीन पसंद कीजिए। यहां सिंडिकेट के मालिक को ‘चाचा’ कहते हैं

रिपोर्टर : उन्हीं के जरिए काम होगा

राजा पाल : बिल्कुल, जहां जमीन पसंद आएगी, वहीं से सब होगा

अन्य व्यक्ति: जो बिल्डर को चाहिए, वो सब मिलेगा

राजा पाल : चाचा का ईंट भट्ठा है, ईंट, सीमेंट, पत्थर, सब मिलेगा

‘यहां पूरा कंट्रोल हमारा है, कोई दिक्कत नहीं’

दूसरी मुलाकात : देवराज पाल

ये कौन हैं : बांसबेड़िया में TMC के पूर्व कार्यकारी अध्यक्ष रहे, अभी एक्टिव मेंबर

राजा के साथी सूरज ने जमीन दिखाई। फिर राजा मिला और मोगरा में सिंडिकेट चलाने वाले देवराज पाल के ऑफिस ले गया। राजा ने बातचीत में कहा कि वे सभी एक ही सिंडिकेट का हिस्सा हैं और देवराज पाल इस इलाके में सिंडिकेट चलाता है।

राजा पाल : सिंगूर में आपको दिक्कत हो रही है, यहां नहीं होगी। हम सब सिंडिकेट के आदमी हैं। देवराज सिंडिकेट के मालिक हैं, और ‘चाचा’ हेड हैं

रिपोर्टर : ठीक है

देवराज पाल : कोई डिस्टर्ब नहीं करेगा। यहां पूरा कंट्रोल है

जमीन पसंद आने की बात कहकर हमने सिंडिकेट चार्ज और निर्माण प्रक्रिया समझी…

रिपोर्टर : काम शुरू होगा तो सिंडिकेट सिस्टम कैसे चलेगा

राजा पाल : पॉलिटिकल और सिंडिकेट चार्ज हम संभाल लेंगे

रिपोर्टर : कितना देना होगा

राजा पाल : 25 लाख रुपए

रिपोर्टर : इसमें सब शामिल रहेगा

राजा पाल : हां, सब कुछ

रिपोर्टर: क्या निर्माण सामग्री सिंडिकेट से ही लेनी होगी

राजा पाल: हां, जो चाहिए, बालू, गिट्टी सब हम देंगे

सूरज सिंह: ठेकेदार भी हमारा ही है, बाहर से कराओगे तो खर्च बढ़ेगा

राजा पाल: देवराज भैया ठेकेदार हैं

रिपोर्टर: अगर हम अपना ठेकेदार रखें

राजा पाल: तब पूछना पड़ेगा। लेकिन माल सिंडिकेट से ही लेना होगा

रिपोर्टर: अगर सिंडिकेट से माल नहीं लिया तो

सूरज सिंह: आपका कोई काम नहीं होगा

राजा पाल: एक गाड़ी बालू भी नहीं मिलेगी

रिपोर्टर: पेमेंट कैसे होगा

राजा पाल: 25 लाख कैश में देना होगा। हमारे ऊपर भी एक बॉस है, जो पूरे जिले को देखता है

रिपोर्टर : कौन

राजा पाल: ‘केडी’ नाम चलता है

राजा पाल: वो तय करता है किसे टिकट मिलेगा, कौन आगे जाएगा

‘नेता और माफिया दोनों को मैं कंट्रोल करता हूं’

तीसरी मुलाकात : सुब्रत दास

ये कौन हैं : नदिया दक्षिण यूथ तृणमूल कांग्रेस एक्सटेंडेड कमिटी के जिला सचिव

होटल प्रोजेक्ट के लिए जमीन खरीदने की बात कहकर हम सुब्रत से मिले…

रिपोर्टर: हमें करीब 5 बीघा जमीन चाहिए, फ्रंट अच्छा हो और मेन रोड पर हो

सुब्रत दास: कल्याणी मोड़ के पास एक जमीन है, करीब साढ़े छह बीघा, 80 फीट फ्रंट

रिपोर्टर: हम होटल-रिजॉर्ट बनाना चाहते हैं, बजट का कोई इश्यू नहीं

अन्य व्यक्ति: आप यहां होटल बनाएंगे तो AIIMS के डॉक्टर भी रुकेंगे, फायदा होगा

रिपोर्टर: यहां सिंडिकेट कैसे चलता है

सुब्रत दास: यहां भी बाहुबली और नेता मिलकर सिंडिकेट चलाते हैं

अन्य व्यक्ति: सुब्रत भैया जिले के यूथ सेक्रेटरी हैं, सब मैनेज हो जाएगा

सुब्रत दास: आपको कोई दिक्कत नहीं होगी, पॉलिटिकल और लोकल दोनों हम संभाल लेंगे

अन्य व्यक्ति: यहां जो माफिया राज है, सब भइया के अंडर है

सुब्रत दास: नेता और माफिया दोनों को मैं कंट्रोल करता हूं

जमीन दिखाने के बाद जब हमने कुल खर्च पूछा तो सिंडिकेट और नेताओं को देने वाली रकम का खुलासा हुआ

रिपोर्टर : जमीन की कीमत

सुब्रत दास: करीब 15 करोड़ 60 लाख

रिपोर्टर: सिंडिकेट का कितना

सुब्रत दास: नेता को 50 हजार प्रति कट्टा, माफिया को 30 हजार प्रति कट्टा

(करीब साढ़े छह बीघा जमीन पर यह रकम लगभग 1 करोड़ रुपए बैठती है, जो कैश में देनी होगी)

रिपोर्टर: माफिया का काम क्या होता है

सुब्रत दास: कोई डिस्टर्बेंस होगा तो माफिया संभालेगा, जरूरत पड़ी तो मारपीट भी

रिपोर्टर: नेताओं को क्यों देना पड़ेगा

सुब्रत दास: यह TMC का जमाना है, जो पावर में रहेगा उसे देना पड़ेगा। MLA, MP सब शामिल हैं

रिपोर्टर: अगर नहीं दें तो

सुब्रत दास: काम रुकवा देंगे, लेबर भगा देंगे, डिस्टर्बेंस करेंगे

रिपोर्टर: क्या हम अपना माल खुद ला सकते हैं

सुब्रत दास: नहीं, लोकल से ही लेना पड़ेगा। हम बताएंगे किससे लेना है

रिपोर्टर : पेमेंट कैसे होगा

सुब्रत दास: सब कैश में होगा। 50% रजिस्ट्रेशन के समय। बाकी काम शुरू होने पर

’10 लाख लूंगा, सारे झमेले संभालूंगा’

चौथी मुलाकात : एमडी जाकिर

ये कौन हैं : टीएमसी कार्यकर्ता और सिंडिकेट ऑपरेटर

जाकिर से उसके घर पर मुलाकात हुई। हमने होटल के लिए जमीन की बात छेड़ी। बातचीत में जाकिर सिंडिकेट से दूरी बनाता दिखा, लेकिन उसके साथी ने साफ कर दिया कि नेता और सिंडिकेट एक ही हैं।

एमडी जाकिर: इस एरिया में कोई प्रॉब्लम नहीं होगी

रिपोर्टर: नेता या सिंडिकेट

साथी: नेता और सिंडिकेट सब एक ही है

एमडी जाकिर: वो नेता भी है और सिंडिकेट भी

साथी: यहां का नेता भी जाकिर दा और सिंडिकेट भी वही है

रिपोर्टर: मतलब जाकिर दा खुद सिंडिकेट हैं

एमडी जाकिर: आपको प्रॉब्लम नहीं होगा

बाद में जाकिर ने जमीन से जुड़े किसी भी झमेले को संभालने के लिए 10 लाख रुपए मांगे।

एमडी जाकिर: टोटल साढ़े पांच बीघा लैंड है, 10 लाख लगेगा

रिपोर्टर: किसको देना है

एमडी जाकिर: मैं ही सब संभालूंगा

अब तक तीन ऐसे लोगों से मुलाकात हो चुकी थी, जो नेता भी हैं और सिंडिकेट का हिस्सा भी। इससे साफ हुआ कि यह सिस्टम बिना राजनीतिक संरक्षण के संभव नहीं।

‘थाना-विधायक सब को पैसा जाएगा’

पांचवी मुलाकात : बिभाकर प्रसाद उर्फ मोनू

ये कौन है : सिंडिकेट ऑपरेटर, स्थानीय विधायक से रिश्तेदारी का दावा किया

बिभाकर: होटल लाइन के लिए जमीन हो जाएगी

रिपोर्टर: रेट क्या है?

बिभाकर: 3 बीघा रेडी प्रॉपर्टी 10 करोड़

बिभाकर: खर्चा 50 लाख पड़ेगा

रिपोर्टर: किस बात का

बिभाकर: थाना, लोकल, एमएलए सब

रिपोर्टर: सिंडिकेट कौन देखता है

बिभाकर: हम ही

रिपोर्टर: पैसा कैसे देना होगा

बिभाकर: कैश में

रिपोर्टर: अगर अपना कॉन्ट्रैक्टर लाएं

बिभाकर: पूरे कंस्ट्रक्शन बजट का 10% देना पड़ेगा

रिपोर्टर: नहीं दिया तो

बिभाकर: डिस्टर्ब होगा… यहां 200 रुपए में मर्डर हो जाता है

बिभाकर ने यह भी दावा किया कि स्थानीय विधायक उसका रिश्तेदार है (भास्कर इसकी पुष्टि नहीं करता)

इसके बाद हम बामनगाछी पहुंचे, जहां हुसैन अली, मासूम अली और मफिजूल इस्लाम से मुलाकात हुई। ये तीनों सिंडिकेट ऑपरेटर हैं।

मासूम अली: लैंड सिंडिकेट का है

हुसैन अली: हम सिंडिकेट के मेम्बर हैं

रिपोर्टर: सिंडिकेट को क्या देना होगा

हुसैन अली: प्रोजेक्ट का 2%

रिपोर्टर: इसके अलावा

हुसैन अली: बालू, पत्थर, गिट्टी हमसे ही लेना होगा

रिपोर्टर: पैसा कैसे जाएगा

हुसैन अली: कैश में

रिपोर्टर: पैसा किसे जाता है

मफिजूल इस्लाम: छोटे से बड़े तक… एमएलए तक जाता है

रिपोर्टर: सिस्टम कैसे बना

मफिजूल इस्लाम: नेता लोग बनाया… सीधे नहीं ले सकते, सिंडिकेट से जाता है

मफिजूल के मुताबिक, कोई भी बड़ा प्रोजेक्ट शुरू करने से पहले सिंडिकेट से परमिशन जरूरी है। एक बार परमिशन मिल जाए तो पुलिस, प्रशासन या नेता कोई दखल नहीं देता।

जांच में यह भी सामने आया कि ये लोग भले आधिकारिक तौर पर पार्टी में पद पर न हों, लेकिन राजनीतिक गतिविधियों से जुड़े हैं।

सिंडिकेट से जुड़े सप्लायर्स से माल खरीदने का दबाव

कोलकाता के दमदम इलाके में प्रॉपर्टी डीलिंग का काम करने वाले एक प्रॉपर्टी डीलर कहते हैं, ‘सिंडिकेट सिस्टम केवल कोलकाता तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे पश्चिम बंगाल में अलग-अलग लेवल पर है।’

‘इस सिस्टम की वजह से बिल्डिंग कॉन्ट्रैक्टरों पर यह दबाव बनाया जाता है कि वे निर्माण सामग्री केवल सिंडिकेट से जुड़े सप्लायरों से ही खरीदें। अगर कोई कॉन्ट्रैक्टर ऐसा करने से इनकार करता है, तो उससे एकमुश्त बड़ी रकम देने के लिए कहा जाता है।’

‘इसलिए कॉन्ट्रैक्टर की लागत काफी बढ़ जाती है। फिर बिल्डर को प्रॉपर्टी की कीमत बढ़ानी पड़ती है, इसका असर खरीदारों पर पड़ता है।’

डीलर ने यह भी बताया कि ‘सिंडिकेट के इस पूरे तंत्र में किसी एक राजनीतिक दल का वर्चस्व नहीं होता बल्कि जिस इलाके में जिसका प्रभाव है, वहां उसका सिंडिकेट काम करता है।’

सिंडिकेट वाले नेता ही अब BJP में शामिल हो रहे

सीनियर जर्नलिस्ट गौतम लाहिरी कहते हैं कि, ‘जो भी सरकारी स्कीम्स हैं, जैसे प्रधानमंत्री आवास योजना इसका फायदा कोई तभी ले सकता है, जब वे लोकल सिंडिकेट के साथ मिलकर काम करे। वरना आपको स्कीम का फायदा ही नहीं मिल सकेगा। सिंडिकेट के लोग ही इलेक्शन के वक्त वोटर्स को बुलाने, बूथ पर हंगामा करने, कहीं–कहीं बोगस वोट डलवाने जैसे काम करते हैं।’

‘कई ऐसे नेता हैं, जिन पर सिंडिकेट राज के आरोप लगे और अब वो बीजेपी में शामिल हो गए। टीएमसी ने कई नेताओं पर एक्शन भी लिया है। जैसे, पार्थ चटर्जी को इस बार टिकट नहीं दिया। कोलकाता में छोटे व्यापारियों को भी लोकल लीडर्स को हफ्ता देना पड़ता है। सिंडिकेट में सीधे पैसा नहीं लिया जाता बल्कि सामान और सर्विस लेने के लिए मजबूर किया जाता है।’

एक लाख से ज्यादा कंपनियां बंगाल में रजिस्टर्ड हुईं

टीएमसी प्रवक्ता प्रदीप्त मुखर्जी कहते हैं कि, ‘2020 से पहले जिन नेताओं पर बीजेपी सिंडिकेट चलाने का आरोप लगाती थी, उनमें से कई आज खुद बीजेपी में शामिल हो चुके हैं। शुभेंदु अधिकारी इनमें बड़ा नाम हैं।’

‘कॉरपोरेट अफेयर्स मंत्रालय के मुताबिक, ममता बनर्जी के कार्यकाल में एक लाख से ज्यादा कंपनियां बंगाल में रजिस्टर्ड हुईं। अगर कोई केवल आरोप लगाना चाहता है तो वह अलग बात है, लेकिन जो लोग डेटा के आधार पर बात करना चाहते हैं, उन्हें सामने आना चाहिए।’

वहीं बीजेपी के मीडिया पैनलिस्ट सजल घोष कहते हैं, ‘आप घर में एक टॉयलेट बनाओ या एक प्रेयर रूम, अपनी मर्जी से ईंट, बालू, गिट्‌टी नहीं खरीद सकते। ममता दीदी कहती हैं, जो सिंडिकेट करेगा वो टीएमसी में नहीं रहेगा, लेकिन वही लोग विधायक, मेयर, चेयरमैन बन रहे हैं।’

कॉन्क्लूजन : भास्कर की पड़ताल में पता चलता है कि, पश्चिम बंगाल में जमीन खरीदनी हो, निर्माण करना हो या बिजनेस शुरू करना हो, सिंडिकेट का साथ जरूरी है। निर्माण सामग्री से लेकर सुरक्षा और काम रुकवाने-चलवाने तक पूरा सिस्टम इसी नेटवर्क के हाथ में है। सरकार सिंडिकेट सिस्टम खत्म करने की बात जरूर कहती है, लेकिन ग्राउंड रियल्टी इससे अलग है।

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