Pahalgam Terrorist Hideout Revealed | NIA Charge Sheet Truth

12 Min Read


कश्मीर में पोनी यानी घोड़ा चलाने वाले बशीर अहमद और परवेज अहमद ने पहलगाम में हमला करने वालों को न सिर्फ अपने घर में रुकवाया, बल्कि लोकेशन की डिटेल भी दी। अपने ढोक यानी झोपड़ी में आतंकियों को चाय पिलाई, खाना खिलाया। पॉलिथीन में सब्जी-रोटी पैक करके दी। वे

.

NIA ने अपनी चार्जशीट में ये खुलासे किए हैं। जांच के दौरान NIA ने कुल 1,113 गवाहों के बयान दर्ज किए। 31 शॉल हॉकर, 543 ढोक यानी झोपड़ी में रहने वाले लोग, 117 पोनी चलाने वाले, 69 पशु मालिक, 42 फोटोग्राफर, 54 ढाबा-भेलपुरी और चाय बेचने वाले, 36 टिकट काउंटर-जिपलाइन वाले, 25 टैक्सी ड्राइवर, 19 दुकान मालिक, 23 दूसरे जिलों के संदिग्ध और अन्य 54 लोग शामिल थे।

चार्जशीट के मुताबिक, हमले की साजिश पाकिस्तान में बैठे साजिद सैफुल्लाह जट्ट उर्फ अली भाई ने रची, जो लश्कर-ए-तैयबा से जुड़ा है। NIA ने उस पर 10 लाख रुपए का इनाम घोषित किया है। उसने ही हमले के लिए लोकेशन बताई और कोर्डिनेट्स भेजे थे। तीन पाकिस्तानी आतंकी भारत में घुसे और हमला किया। पहलगाम हमले की पहली बरसी पर पढ़िए इनसाइड स्टोरी…

गवाह का खुलासा: बशीर को हथियारों से लैस लोगों के साथ जाते देखा

चार्जशीट में एक गवाह को X-1 नाम दिया गया है। उसने खुलासा किया, ‘मैं हिल पार्क के रास्ते घर लौट रहा था। मैंने बशीर अहमद जोठार को हथियारों से लैस तीन लोगों को इशारा करते देखा। फिर सभी को बशीर के भांजे परवेज अहमद की झोपड़ी में जाते देखा। मैं परवेज को भी जानता हूं।’

‘अगले दिन यानी 22 अप्रैल को मैं रूटीन काम के लिए बैसरन घाटी गया। अजान के वक्त के आसपास मैंने परवेज अहमद और बशीर अहमद जोठार को वहां टहलते देखा।’

हमले के वक्त X–1 मौके पर था। तीनों आतंकियों ने उसे भी रोका और कलमा पढ़ने को कहा। कलमा पढ़ने पर जाने दिया। दूर से उसने आतंकियों को गोली चलाते हुए देखा। X–1 ने तीनों आतंकियों की पहचान की है।

परवेज बोला- मामा अंदर आया और हमें चुप रहने को कहा

परवेज अहमद ने पूछताछ में बताया, ‘21 अप्रैल, 2025 को शाम 5 बजे मैं और पत्नी घर में चाय बनाने की तैयारी कर रहे थे। तभी मेरा मामा बशीर अहमद जोठार अंदर आया और हमें चुप रहने को कहा। वो बाहर गया और कुछ मिनट बाद वापस आया। उसके पीछे तीन लोग थे, जिनके हाथ में हथियार थे।’

‘वे अंदर आकर बैठ गए। पानी देने के लिए कहते हुए बोले कि वे बहुत दूर से आए हैं। थके और प्यासे हैं। पानी पीने के बाद उन्होंने कहा कि अल्लाह के रास्ते में लड़ने वाले और कश्मीरी मुसलमानों की आजादी के लिए जिहाद करने वालों को पानी पिलाने पर मुझे सवाब मिलेगा।’

‘वे उर्दू बोल रहे थे, जिसमें पंजाबी टच था। वे कश्मीरी नहीं लग रहे थे। मुझे अहसास हुआ कि वे मुजाहिद थे। उन्होंने मुझसे बैग और पाउच छिपाने के लिए कहा। मैंने उन्हें ढोक में पड़े कंबलों, बिस्तरों के नीचे छिपा दिया। पत्नी ताहिरा से सभी के लिए चाय बनाने को कहा। तीनों मुजाहिद ढोक की दीवार से टिककर बैठे थे। ‘

इस खुलासे के बाद बशीर अहमद जोठार से पूछताछ की गई। बशीर और परवेज को 22 जून, 2025 को गिरफ्तार किया गया।

बशीर का खुलासा: पेड़ों के पीछे से तीन हथियारबंद लोग आए

बशीर अहमद जोठार ने खुलासा किया कि 19 और 20 अप्रैल को बारिश की वजह से मैं बैसरन घाटी नहीं गया था। 21 अप्रैल को शाम 4 बजे के करीब अपने घोड़े को देखने जंगल गया। तभी पेड़ों के पीछे से तीन हथियारबंद व्यक्ति सामने आए। उन्होंने मुझे कहा कि हमें सुरक्षित जगह ले चलो और अल्लाह के नाम पर खाने का इंतजाम करो। यह सुनते ही मुझे अहसास हो गया था कि ये मुजाहिद हैं।

मैं उन्हें परवेज के ढोक के पास ले गया और कहा कि यहां रुककर मेरे सिग्नल का इंतजार करना। मैं परवेज के ढोक में अंदर घुसा और परवेज–ताहिरा को चुप रहने को कहा। आसपास नजर मारने के बाद मैंने उन्हें हाथों से इशारा किया। फिर वे मेरे पीछे-पीछे परवेज के ढोक में अंदर आए।

वे एक-दूसरे को भाईजान बोल रहे थे। ताहिरा ने सभी के लिए चाय बनाई। छोटे कद के एक मुजाहिद ने खाना बनाने के लिए कहा। मैंने ताहिरा को चावल और कच्चे टमाटर बनाने को कहा।

खाना खाते हुए उन्होंने मुझसे अमरनाथ यात्रा के बारे में बात की। सिक्योरिटी कैंप्स और एरिया में जवानों के मूवमेंट के बारे में पूछा। वे हमसे उर्दू और पंजाबी में बात कर रहे थे। आपस में पंजाबी में बात कर रहे थे। उनकी बातचीत में मैंने साजिद का नाम सुना। खाने के बाद उन्होंने ताहिरा को रोटी पैक करने को कहा।

हल्दी, मिर्ची और नमक भी लेकर गए थे

बशीर ने आगे बताया, ‘परवेज ने पुराने कपड़े के टुकड़े में 10 रोटी पैक कर दीं और एक पॉलिथीन में सब्जी रख दी। मुजाहिदों ने एक पॉलिथीन में हल्दी, मिर्ची और नमक भी ले लिया। उन्होंने परवेज के ढोक से एक पतीला और करछी भी ले ली। मैंने ढोक को पानी से बचाने के लिए जो बड़ी पॉलिथीन रखी थी, एक मुजाहिद ने वो भी ले ली।’

QuoteImage

उनके पास सिगरेट, टॉफी और खजूर भी थे। वे करीब 5 घंटे ढोक में रहे और रात 10 बजे एक-एक करके निकल गए। बाहर निकलते वक्त छोटे कद के मुजाहिद ने परवेज को 3 हजार रुपए दिए। मुजाहिदों के जाने के 5 मिनट के बाद मैं भी चला गया।

QuoteImage

‘22 अप्रैल को सुबह 10 बजे के आसपास मैं परवेज से हिल पार्क पोनी स्टेंड के पास मिला। हम अपने घोड़ों से दो टूरिस्ट को लेकर बैसरन घाटी पहुंचे। उन्हें मेन गेट पर छोड़ने के बाद परवेज और मैंने घोड़ों को मेन गेट के पास ही बांध दिया। हम पार्क में टहल रहे थे, तभी हमने उन्हीं तीन लोगों को पार्क की फेंसिंग के पास बैठे देखा।’

‘हम तुरंत मेन गेट की तरफ आए और जिन टूरिस्ट को लेकर गए थे, उनके आने का इंतजार करने लगे। 1 बजे के करीब पोनी स्टेंड से निकल गए। मैं पहलगाम मार्केट में था, तब मुझे एक पोनीवाले ने बताया कि बैसरन में आतंकी हमला हुआ है, जिसमें कई टूरिस्ट मारे गए हैं। हमले के बाद मैंने हिल पार्क वाला ढोक छोड़ दिया और खैय्यार में अपने घर में शिफ्ट हो गया। पकड़े जाने के डर से किसी से इस बारे में बात नहीं की।’

मुठभेड़ में ढेर हुए तीनों आतंकवादी

28 जुलाई, 2025 को श्रीनगर के डाचीगाम की महादेव हिल्स में सिक्योरिटी फोर्स और आतंकियों के बीच मुठभेड़ हुई। इसमें तीन आतंकवादी मारे गए। उनके पास मिले हथियारों की फॉरेंसिक जांच से पुष्टि हुई कि वही हथियार बैसरन में हुए हमले में इस्तेमाल किए गए थे।

इस मुठभेड़ के दौरान एक GoPro कैमरा मिला। मोबाइल डेटा के एनालिसिस से टेरेरिस्ट नेटवर्क से कनेक्शन साबित हुआ। जांच में पता चला कि 21 दिसंबर 2023 को सेना वाहन पर हमला, 4 मई 2024 को वायुसेना के वाहन पर हमला, 9 जून 2024 को शिव खोड़ी यात्री हमला, 20 अक्टूबर को APCO कंपनी पर हमला और 22 अप्रैल 2025 को बैसरन में हुए हमले में बरामद किए गए हथियार एक जैसे थे।

जांच में साबित हुआ कि तीनों टेरेरिस्ट को पाकिस्तान में बैठे लश्कर-ए-तैयबा के कमांडर साजिद जट्ट से इंस्ट्रक्शन मिल रहे थे। हमला सोची-समझी साजिश था, जिसे पाकिस्तान से ऑपरेट किया गया और लोकल लेवल पर मदद ली गई। साजिद जट्ट सीधे एक आतंकी सुलेमान के संपर्क में था। सुलेमान के फोन में alpine quest app डाउनलोड था। इस पर बिना इंटरनेट के किसी लोकेशन के कोऑर्डिनेट मिल जाते हैं। एप में पहले से बैसरन घाटी की लोकेशन सेट थी।

मौके से बरामद कंबल, सामान पर बशीर और परवेज का डीएनए मिला। मोबाइल फोन की जांच में पता चला कि आतंकियों के फोन पाकिस्तान में खरीदे गए थे और उनमें उनकी तस्वीरें भी थीं।

कॉल डिटेल रिकॉर्ड यानी CDR से यह भी साबित हुआ कि बशीर और परवेज घटना के समय उसी इलाके में मौजूद थे। दोनों स्थानीय आरोपियों के पहले से बड़ी मात्रा में राशन खरीदने के सबूत भी मिले। आशंका है कि वे पहले से ही आतंकियों को सपोर्ट देने की तैयारी में थे। हमले में लश्कर-ए-तैयबा और द रेसिस्टेंस फ्रंट शामिल थे। कश्मीर में डर का माहौल बनाना, टूरिज्म एक्टिविटी को रोकना और देश विरोधी एक्टिविटी को बढ़ाना इसका मकसद था।

केस अभी ट्रायल स्टेज में

NIA पुलिस स्टेशन जम्मू में FIR नंबर RC-02/2025/NIA/JMU के तहत 27 अप्रैल 2025 को केस रजिस्टर हुआ। यह केस NIA एक्ट 2008 के तहत जम्मू की स्पेशल कोर्ट में पेश किया गया है और चार्जशीट नंबर 03/2025 दाखिल हो चुकी है। केस ट्रायल स्टेज में है। इसके बाद आरोप तय किए जाएंगे और ट्रायल होगा, जिसमें गवाहों के बयान और सबूत पेश किए जाएंगे। सभी पक्षों को सुनने के बाद कोर्ट फैसला सुनाएगा।

……………………………. पहलगाम अटैक पर ये स्टोरी भी पढ़िए, ये हमले के 30 दिन पूरे होने पर की गई थी…

13 मिनट, 26 कत्ल; वीडियो में देखिए आतंकी कहां से आए, कहां गए

कश्मीर की हरी-भरी बायसरन घाटी, उसकी खूबसूरती को निहारते टूरिस्ट, गोलियां, चीखें, बचने-बचाने की कोशिशें और 26 कत्ल, 22 अप्रैल को हुए पहलगाम अटैक की कहानी बस इतनी ही है, लेकिन असर इतना बड़ा कि भारत-पाकिस्तान जंग के मुहाने पर खड़े हो गए। पहलगाम में तीन आतंकी आए और हमेशा का दर्द देकर चले गए। पढ़िए पूरी खबर…



Source link

Share This Article
Leave a Comment