अकेलेपन से खड़ा हुआ हजारों करोड़ का कारोबार:चीन में साथ घूमने, खाने-पीने के लिए किराए पर मिल रहे साथी

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चीन में बढ़ते अकेलेपन के चलते युवा और शहरी उपभोक्ता अब केवल दोस्ती या रिश्तों के लिए नहीं, बल्कि रोजमर्रा की गतिविधियों में साथ देने के लिए भी लोगों को किराए पर ले रहे हैं। कोई ट्रैकिंग पर जाने, हॉटपॉट खाने, फिल्म देखने, शॉपिंग करने या शहर घूमने के लिए साथी बुक कर रहा है। ऑनलाइन प्लेटफॉर्म ऐसे लोगों को जोड़ रहे हैं जो कुछ घंटों के लिए भुगतान लेकर साथ निभाते हैं, लेकिन यह सेवा आमतौर पर रोमांटिक या यौन संबंधों से अलग रखी जाती है। इस प्रवृत्ति ने एक नए और तेजी से बढ़ती ‘कंपैनियनशिप इकोनॉमी’ को जन्म दिया है, जिसका आकार 70 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा हो चुका है। विशेषज्ञों के अनुसार, यह प्रवृत्ति चीन में बढ़ती एकल जीवनशैली, देर से विवाह, कम जन्मदर और सामाजिक अलगाव को दर्शाती है। कई युवा व्यस्त जीवन, काम के दबाव और सीमित सामाजिक दायरे के कारण अस्थायी साथ की तलाश कर रहे हैं। यह उद्योग आधुनिक चीन में बदलते सामाजिक संबंधों और भावनात्मक जरूरतों का एक नया आर्थिक रूप बनकर उभरा है। चीन के बड़े शहरों में युवा अब ट्रैकिंग, हॉटपॉट खाने, फिल्म देखने, शॉपिंग करने, संग्रहालय घूमने या किसी कार्यक्रम में जाने के लिए अस्थायी साथी बुक कर रहे हैं। दक्षिणी चीनी शहर गुइलिन के एक छात्र, 24 वर्षीय तांग जुनक्सिंग के मुताबिक कुछ माह पहले उसे पता चला कि लोगों के साथ यात्रा पर जाकर भी पैसे कमाए जा सकते हैं। तांग अब साथी बनकर आमतौर पर प्रति माह 50 से 70 हजार रुपए तक कमा लेता है। सामाजिक बदलाव के कारण यह ट्रेंड बढ़ रहा है? इसके पीछे कई सामाजिक बदलाव हैं। विवाह की औसत आयु बढ़ रही, जन्मदर घट रही है और अकेले रहने वाले लोगों की संख्या बढ़ रही है। बड़ी संख्या में युवा नौकरी या पढ़ाई के लिए अपने गृह नगरों से दूर रहते हैं। लंबे कामकाजी घंटे और सीमित सामाजिक दायरा भी भावनात्मक रूप से अलग-थलग महसूस कराता है। कुछ घंटों के लिए भी किसी का साथ मिलना कई लोगों के लिए मानसिक राहत का माध्यम बन रहा है।



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