Wed, 07 Oct 20263:10 PM
Wed, Oct 7, 2026Updated 3:10 PM IST
होम › पंजाब

आनंदपुर साहिब मामले में SGPC की जांच रिपोर्ट सार्वजनिक: अध्यक्ष धामी ने कहा- सोशल मीडिया ट्रायल से संस्था को बदनाम करने का प्रयास

WhatsAppFacebookX

अमृतसर। शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC) के अध्यक्ष हरजिंदर सिंह धामी ने आनंदपुर साहिब मामले से संबंधित विस्तृत जांच रिपोर्ट को आज औपचारिक रूप से सार्वजनिक किया है। अमृतसर में आयोजित एक विशेष प्रेस वार्ता के दौरान उन्होंने इस रिपोर्ट की जानकारी देते हुए स्पष्ट किया कि यह दस्तावेज तथ्यों और निष्पक्ष जांच पर आधारित है। इस अवसर पर एसजीपीसी अध्यक्ष ने सोशल मीडिया पर चल रहे विवादों और अधूरी जानकारी के आधार पर बन रही राय पर गंभीर चिंता व्यक्त की। उन्होंने आरोप लगाया कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर ‘ट्रायल’ चलाकर सिखों की सर्वोच्च संस्था को जानबूझकर बदनाम करने और उसकी छवि धूमिल करने का सुनियोजित प्रयास किया जा रहा है।

हरजिंदर सिंह धामी ने बताया कि आनंदपुर साहिब घटनाक्रम की जांच पूरी तरह से निष्पक्षता और पारदर्शिता के साथ की गई है। उन्होंने कहा कि जांच समिति ने सभी पहलुओं की बारीकी से पड़ताल की है और रिपोर्ट में जो भी तथ्य सामने आए हैं, वे ठोस सबूतों पर आधारित हैं। अध्यक्ष ने स्पष्ट किया कि एसजीपीसी किसी भी प्रकार के दबाव या बाहरी प्रभाव में आए बिना अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करती है। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि संस्था की प्रतिष्ठा और सिख कौम के हितों की रक्षा करना उनका प्राथमिक कर्तव्य है, और इसी उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए इस रिपोर्ट को जनता के समक्ष लाया गया है ताकि सही तस्वीर सामने आ सके।

एसजीपीसी अध्यक्ष ने सोशल मीडिया पर फैलाई जा रही भ्रामक सूचनाओं पर विशेष रूप से आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि बिना पूर्ण जानकारी और संदर्भ के केवल चुनिंदा बातों को उछालकर संस्था के खिलाफ माहौल बनाया जा रहा है, जो न केवल अनुचित है बल्कि खतरनाक भी है। धामी ने कहा कि सोशल मीडिया पर कुछ वर्गों द्वारा जो ‘ट्रायल’ चलाया जा रहा है, उसका उद्देश्य सच्चाई सामने लाना नहीं, बल्कि संस्था को अस्थिर करना और लोगों के मन में संदेह पैदा करना है। उन्होंने सिख संगत और आम जनता से अपील की कि वे किसी भी प्रकार की अपुष्ट खबरों या एकतरफा प्रचार पर विश्वास करने के बजाय आधिकारिक दस्तावेजों और तथ्यात्मक रिपोर्टों का ही संज्ञान लें।

इस दौरान हरजिंदर सिंह धामी ने यह भी रेखांकित किया कि आनंदपुर साहिब जैसे संवेदनशील मामलों में जल्दबाजी में निष्कर्ष निकालना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि जांच प्रक्रिया एक विधिवत और समय लेने वाला कार्य है, जिसमें हर गवाही और दस्तावेज़ की पुष्टि आवश्यक होती है। जबकि सोशल मीडिया पर त्वरित प्रतिक्रियाओं और भावनात्मक टिप्पणियों का दौर चल रहा है, वहीं एसजीपीसी ने धैर्य और संयम के साथ पूरी प्रक्रिया को पूर्ण किया है। अध्यक्ष ने कहा कि रिपोर्ट का सार्वजनिक होना इस बात का प्रमाण है कि संस्था छिपाने के बजाय पारदर्शिता में विश्वास रखती है। उन्होंने उम्मीद जताई कि अब जब आधिकारिक रिपोर्ट उपलब्ध है, तो अफवाहों और भ्रम का वातावरण समाप्त होगा और सत्य स्थापित हो पाएगा।

प्रेस वार्ता में एसजीपीसी अध्यक्ष ने संस्था की आंतरिक कार्यप्रणाली और अनुशासनिक मानकों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि गुरुद्वारा प्रबंधन और धार्मिक अनुशासन से जुड़े मामलों में एसजीपीसी हमेशा गुरु मर्यादा और विधान के अनुसार ही निर्णय लेती है। आनंदपुर साहिब मामले में भी इन्हीं सिद्धांतों का पालन किया गया है। उन्होंने दोहराया कि संस्था को बदनाम करने वाले तत्वों के खिलाफ संगत को सतर्क रहने की आवश्यकता है, क्योंकि ऐसी साजिशें न केवल संस्था बल्कि पूरे पंथ की एकता को कमजोर कर सकती हैं। धामी ने कहा कि एसजीपीसी भविष्य में भी ऐसे किसी भी दुष्प्रचार का तथ्यात्मक और कानूनी रूप से मुकाबला करती रहेगी।

अंत में, हरजिंदर सिंह धामी ने मीडिया और संगत से सहयोग की अपील करते हुए कहा कि सकारात्मक और रचनात्मक आलोचना का स्वागत है, लेकिन तथ्यहीन आरोपों और व्यक्तिगत या संस्थागत चरित्र हनन को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि आनंदपुर साहिब जांच रिपोर्ट का प्रकाशन इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इस रिपोर्ट के सार्वजनिक होने के साथ ही एसजीपीसी ने अपना पक्ष स्पष्ट कर दिया है और अब अपेक्षा की जाती है कि बहस और चर्चाएं इसी दस्तावेज़ के दायरे में होंगी। अध्यक्ष ने विश्वास व्यक्त किया कि सच्चाई की जीत होगी और संस्था अपनी गरिमा एवं सेवाभाव के साथ अपने कार्यों को जारी रखेगी। यह रिपोर्ट अब सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध है और इसे संस्था की आधिकारिक वेबसाइट तथा कार्यालयों से प्राप्त किया जा सकता है।