अबोहर: संत नगर गोलीकांड मामले में आरोपी की गिरफ्तारी की मांग को लेकर वाल्मीकि समाज का धरना, आप नेता शिवलाल डोडा पर लगे संगीन आरोप

पंजाब के फाजिल्का जिले के अबोहर शहर में स्थित संत नगर क्षेत्र में हाल ही में हुई एक युवक पर फायरिंग की घटना ने स्थानीय स्तर पर भारी तनाव और आक्रोश पैदा कर दिया है। इस गोलीकांड के विरोध में और मुख्य आरोपी की तत्काल गिरफ्तारी की मांग को लेकर सोमवार को पीड़ित परिवार तथा वाल्मीकि समाज के सैकड़ों लोगों ने अबोहर के सदर बाजार में जोरदार धरना-प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने न केवल पुलिस प्रशासन के खिलाफ तीखे नारे लगाए, बल्कि कुछ समय के लिए यातायात को भी बाधित करते हुए चक्का जाम किया, जिससे शहर के मुख्य बाजार क्षेत्र में अफरा-तफरी का माहौल बना रहा।
संत नगर में हुई इस हिंसक वारदात में अजय कुमार नामक युवक पर जानलेवा हमला किया गया था। इस घटना के बाद से ही पीड़ित पक्ष और समुदाय के लोग न्याय की गुहार लगा रहे हैं। सोमवार को आयोजित इस विशाल धरने का उद्देश्य प्रशासन का ध्यान इस ओर आकर्षित करना था कि मामले में अभी तक वास्तविक दोषियों के खिलाफ ठोस कार्रवाई नहीं की गई है। प्रदर्शनकारियों का स्पष्ट कहना था कि जब तक सभी आरोपियों को गिरफ्तार नहीं किया जाता और पीड़ित परिवार को न्याय नहीं मिलता, उनका संघर्ष जारी रहेगा। वाल्मीकि समाज के प्रतिनिधियों ने इस दौरान पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल उठाए और आरोप लगाया कि दबाव के कारण मामले को दबाने या कमजोर करने का प्रयास किया जा रहा है, जिसे समाज किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं करेगा।
इस प्रदर्शन के दौरान एक राजनीतिक पहलू भी सामने आया, जिसने पूरे मामले को और अधिक संवेदनशील बना दिया है। धरने पर बैठे लोगों और वाल्मीकि समाज के सदस्यों ने आम आदमी पार्टी (आप) के स्थानीय नेता शिवलाल डोडा पर इस घटना में शामिल होने का सीधा आरोप लगाया है। प्रदर्शनकारियों ने मांग की कि शिवलाल डोडा की भूमिका की निष्पक्ष और उच्च स्तरीय जांच होनी चाहिए। उनका कहना था कि यदि कोई जनप्रतिनिधि या राजनीतिक व्यक्ति किसी अपराधिक घटना में लिप्त पाया जाता है, तो उसके खिलाफ कानून के अनुसार सख्त से सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। हालांकि, यह आरोप प्रदर्शनकारियों द्वारा लगाए गए हैं और इसकी स्वतंत्र पुष्टि या पुलिस द्वारा इस संबंध में किसी औपचारिक बयान की जानकारी वर्तमान में उपलब्ध स्रोतों से नहीं मिल सकी है। ऐसे में इन आरोपों को अभी तक केवल पक्षकारों के दावे के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
सदर बाजार में किए गए चक्का जाम के कारण आम जनजीवन भी प्रभावित हुआ। दुकानदारों और राहगीरों को काफी असुविधा का सामना करना पड़ा, लेकिन प्रदर्शनकारियों का कहना था कि उनकी मजबूरी इतनी बड़ी है कि उन्हें यह कदम उठाना पड़ा। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर जल्द सुनवाई नहीं हुई, तो वे आंदोलन को और तेज करेंगे और इसके परिणामों की जिम्मेदारी प्रशासन की होगी। मौके पर पहुंचे पुलिस अधिकारियों ने प्रदर्शनकारियों को शांत रहने और कानून व्यवस्था बनाए रखने की अपील की, साथ ही उन्हें आश्वासन दिया कि मामले की जांच पूरी निष्पक्षता से की जा रही है और दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा। पुलिस ने यह भी स्पष्ट किया कि जांच में जो भी तथ्य सामने आएंगे, उनके आधार पर ही आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।
अबोहर जैसे क्षेत्रों में सामाजिक न्याय और कानून व्यवस्था को लेकर समय-समय पर ऐसे तनाव उत्पन्न होते रहे हैं। संत नगर की यह घटना और उसके बाद का सामुदायिक आक्रोश यह दर्शाता है कि स्थानीय स्तर पर सुरक्षा और न्यायपालिका पर विश्वास बनाए रखना प्रशासन के लिए कितना चुनौतीपूर्ण है। वाल्मीकि समाज द्वारा अपने सदस्य की सुरक्षा और न्याय के लिए इस प्रकार एकजुट होना सामाजिक एकता का प्रतीक तो है ही, साथ ही यह प्रशासन के लिए एक संकेत भी है कि वे संवेदनशील मामलों में त्वरित और पारदर्शी कार्रवाई की अपेक्षा करते हैं।
फिलहाल, पुलिस प्रशासन ने मामले की जांच जारी रखी हुई है और आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए छापेमारी की जा रही है। शिवलाल डोडा पर लगे आरोपों के संबंध में भी पुलिस अपनी जांच प्रक्रिया के तहत ही तथ्यों की पड़ताल कर रही है। पीड़ित परिवार और वाल्मीकि समाज ने स्पष्ट कर दिया है कि वे महज आश्वासनों से संतुष्ट नहीं होंगे, बल्कि उन्हें ठोस कार्रवाई और न्याय चाहिए। अबोहर प्रशासन के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती कानून व्यवस्था को बनाए रखते हुए निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करना और सभी पक्षों का विश्वास जीतना है। आने वाले दिनों में इस मामले में होने वाली कार्रवाई ही यह तय करेगी कि स्थिति सामान्य होती है या आंदोलन और तेज होता है।

