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नई दिल्ली4 दिन पहले
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गौतम अडाणी का अडाणी ग्रुप अगले सात सालों (वित्त वर्ष 2032 तक) में इलेक्ट्रिसिटी प्रोडक्शन, रिन्यूएबल एनर्जी और ट्रांसमिशन-डिस्ट्रीब्यूशन में करीब 60 बिलियन डॉलर (लगभग 5.34 लाख करोड़ रुपए) निवेश करने का प्लान बना रहा है। इस निवेश का मकसद भारत की तेजी से बढ़ती इलेक्ट्रिसिटी डिमांड को पूरा करना और देश को एनर्जी सेक्टर में आत्मनिर्भर बनाने में मदद करना है।
रिन्यूएबल एनर्जी में ₹1.85 लाख करोड़ का निवेश होगा
अडाणी ग्रुप की कंपनी अडाणी ग्रीन एनर्जी लिमिटेड (AGEL) रिन्यूएबल एनर्जी पर फोकस कर रही है। कंपनी ने वित्त वर्ष 2030 तक अपनी रिन्यूएबल एनर्जी कैपेसिटी को मौजूदा 14.2 गीगावाट (GW) से बढ़ाकर 50 गीगावाट करने का टारगेट रखा है।
इसके लिए 21 बिलियन डॉलर (लगभग 1.85 लाख करोड़ रुपए) का निवेश किया जाएगा। AGEL सोलर और विंड एनर्जी प्रोजेक्ट्स बनाती, चलाती और मेंटेन करती है, जो बड़े पैमाने पर ग्रिड से जुड़े हुए हैं।

ट्रांसमिशन-डिस्ट्रीब्यूशन में ₹1.50 लाख करोड़ का निवेश
वहीं अडाणी एनर्जी सॉल्यूशंस लिमिटेड (AESL), बिजली के ट्रांसमिशन और डिस्ट्रीब्यूशन सेक्टर में 17 बिलियन डॉलर (लगभग 1.50 लाख करोड़ रुपए) का निवेश करेगी। कंपनी का टारगेट है कि वित्त वर्ष 2030 तक मौजूदा 19,200 किलोमीटर की ट्रांसमिशन लाइन्स को बढ़ाकर 30,000 किलोमीटर किया जाए।
AESL न केवल बिजली ट्रांसमिशन और डिस्ट्रीब्यूशन में काम करती है, बल्कि स्मार्ट मीटरिंग और कूलिंग सॉल्यूशंस जैसे सेक्टरों में भी अपनी मौजूदगी रखती है।
थर्मल पावर में ₹1.94 लाख करोड़ निवेश करेगी कंपनी
भारत की सबसे बड़ी प्राइवेट थर्मल पावर कंपनी अडाणी पावर, वित्त वर्ष 2032 तक अपनी कैपेसिटी को 17.6 गीगावाट से बढ़ाकर 41.9 गीगावाट करने के लिए 22 बिलियन डॉलर (लगभग 1.94 लाख करोड़ रुपए) का निवेश करेगी।
कंपनी का कारोबार गुजरात, महाराष्ट्र, कर्नाटक, राजस्थान, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, झारखंड और तमिलनाडु में फैला हुआ है। इसके अलावा गुजरात में कंपनी का 40 मेगावाट का सोलर पावर प्रोजेक्ट भी है।

भारत में इलेक्ट्रिसिटी सेक्टर की बढ़ती संभावनाएं
अडाणी ग्रुप का कहना है कि भारत दुनिया के सबसे तेजी से बढ़ते बिजली बाजारों में से एक है। वित्त वर्ष 2025 में भारत की टोटल इलेक्ट्रिसिटी प्रोडक्शन कैपेसिटी 475 गीगावाट है, जो 11% की सालाना ग्रोथ रेट के साथ 2032 तक 1,000 गीगावाट तक पहुंचने की उम्मीद है। इस सेक्टर में 500 बिलियन डॉलर यानी 44.08 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा की निवेश संभावनाएं हैं।
रिन्यूएबल एनर्जी: भारत रिन्यूएबल एनर्जी में दुनिया में चौथे नंबर पर है, जहां मौजूदा कैपेसिटी 172 गीगावाट है। 2032 तक इसे 571 गीगावाट तक ले जाने के लिए 300 बिलियन डॉलर (26.45 लाख करोड़ रुपए) की निवेश संभावनाएं हैं।
थर्मल पावर: थर्मल पावर की कैपेसिटी 2025 में 247 गीगावाट से बढ़कर 2032 तक 309 गीगावाट हो जाएगी। इसके लिए 80 गीगावाट एडिशनल कोल बेस्ड कैपेसिटी की जरूरत होगी, जिसमें 91 बिलियन डॉलर (8.02 लाख करोड़ रुपए) का निवेश होगा।
अडाणी पावर का कहना है कि कोयला भारत की बिजली सप्लाई का आधार बना रहेगा, जो बढ़ती डिमांड और रिन्यूएबल एनर्जी की अनिश्चितता को संभालने में अहम भूमिका निभाएगा।
ट्रांसमिशन नेटवर्क: भारत का ट्रांसमिशन नेटवर्क दुनिया के सबसे बड़े ग्रिड्स में से एक है। 2025 में 4,94,000 किलोमीटर के नेटवर्क को 2032 तक 6,48,000 किलोमीटर तक बढ़ाने का प्लान है, जिसमें 110 बिलियन डॉलर यानी 9.69 लाख करोड़ रुपए की निवेश संभावनाएं हैं।
अडाणी ग्रुप का यह बड़ा निवेश भारत के बिजली सेक्टर को नई ऊंचाइयों पर ले जाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। रिन्यूएबल एनर्जी, थर्मल पावर और ट्रांसमिशन नेटवर्क में निवेश के जरिए ग्रुप न केवल भारत की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में योगदान देगा, बल्कि देश को ग्लोबल एनर्जी मार्केट में भी मजबूत स्थिति दिलाएगा।
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