जून 2025 में 12 दिन की जंग के दौरान ट्रम्प ने कहा था- ‘हमें पता है खामेनेई कहां हैं, लेकिन अभी नहीं मारेंगे।’ 22 जून को सीजफायर हो गया।
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आठ महीने बाद 28 फरवरी 2026 को वही खामेनेई एक सटीक हवाई हमले में मारे गए। जबकि इस दौरान दोनो देश डील पर लगातार बातचीत कर रहे थे।
अमेरिकी हमले के कौन से संकेत मिल रहे, फिर भी सुप्रीम लीडर को क्यों नहीं बचा सका ईरान; अमेरिकी धोखे की कहानी जानेंगे भास्कर एक्सप्लेनर में…
सवाल-1: खामेनेई पर हमले के कौन से संकेत मिल रहे थे?
जवाब: न्यूक्लियर डील पर बातचीत के बीच जनवरी 2025 से ही अमेरिका ने ईरान को घेरना शुरू कर दिया था। फरवरी में दूसरे हफ्ते से अमेरिकी कैरियर USS जेराल्ड फोर्ड और USS अब्राहम लिंकन भी पहुंच चुके थे। मिडिल ईस्ट में 2003 में इराक पर हमले के बाद से ये अमेरिका की सबसे बड़ी सैन्य तैनाती थी।
17 फरवरी को अमेरिका और ईरान के बीच डील पर जेनेवा में दूसरे दौर की बातचीत असफल हो गई। इसके बाद अमेरिका ने अपने करीब 150 फाइटर जेट्स, फ्यूल टैंकर विमान आदि तैनात करने शुरू कर दिए।
24 फरवरी को इजराइल के बेन गुरियन हवाई अड्डे और इजराइल के ओवदा एयरबेस पर 12 F-22 तैनात किए गए।

फरवरी 2026 को अमेरिका का USS जेराल्ड आर. फोर्ड ईरान के करीब पहुंच गया था।
ईरान अब तक डिफेंसिव ही था। ईरान ने UNSC को लिखे पत्र में कहा कि वह तनाव या युद्ध नहीं चाहता और पहले हमला नहीं करेगा। इस बीच 3 बड़े संकेत मिले कि खामेनेई पर हमला हो सकता है…
संकेत 1: ट्रम्प की खुली धमकी- ईरान की सत्ता बदलेंगे
- 13 फरवरी को नॉर्थ कैरोलिना में एक मिलिट्री इवेंट के दौरान ट्रम्प से पूछा गया कि क्या वह ईरान में सत्ता परिवर्तन चाहते हैं। ट्रम्प ने साफ तौर पर कहा, ‘ऐसा लगता है कि यही सबसे अच्छी चीज हो सकती है।’
- 24 फरवरी को ट्रम्प ने स्टेट ऑफ यूनियन के भाषण में कहा कि ईरान परमाणु हथियार बनाने की शैतानी कोशिश दोबारा शुरू कर रहा है। जबकि 2 दिन बाद ही जेनेवा में ओमान की मध्यस्थता में ईरान से तीसरे दौर की बातचीत होने वाली थी।
संकेत 2: मीडिया रिपोर्ट्स में सुप्रीम लीडर पर अटैक का जिक्र
- वॉल स्ट्रीट जर्नल में 19 फरवरी को एक रिपोर्ट छपी। इसमें कहा गया कि अमेरिका, ईरान की न्यूक्लियर और मिसाइल फैसिलिटीज पर हमले और ईरानी लीडरशिप को टारगेट करने के ऑप्शन पर विचार कर रहा है।
- प्रेसिडेंट ट्रम्प के पास फैसिलिटीज पर लिमिटेड एयर ऑपरेशन या ईरानी सत्ता परिवर्तन के लिए ईरानी नेताओं को मारने के लिए एक बड़ा ऑपरेशन चलाने के विकल्प रखे गए हैं।
- खामेनेई की मौत के बाद ईरान की सिक्योरिटी काउंसिल के चीफ अली लारीजानी ने भी ईरानी मीडिया से कहा कि ऑफिसर्स को आशंका थी कि खामेनेई को निशाना बनाया जाएगा।
संकेत 3: खामेनेई ने खुद कहा- हत्या की कोशिश के लिए तैयार रहें
- 22 फरवरी को छपी NYT की एक रिपोर्ट के मुताबिक, खामेनेई ने अपने टॉप सिक्योरिटी ऑफिसर्स और लीडरशिप को निर्देश दिए थे कि नेताओ की हत्या की कोशिश हो सकती है, इसके लिए तैयार रहें। उन्होंने हर लीडरशिप को अपने नीचे चार लेयर्स तक उत्तराधिकारियों को नॉमिनेट करने के लिए कहा था।

16 फरवरी को ईरानी सेना द्वारा जारी एक्सरसाइज के दौरान की तस्वीर।
सवाल 2: अमेरिका-इजराइल ने ईरान को कैसे चकमा दिया?
जवाब: CNN की रिपोर्ट के मुताबिक, नेतन्याहू ने 11 फरवरी को ट्रम्प से साथ मीटिंग की। उन्हें लग रहा था कि न्यूक्लियर डील पर बातचीत से कोई फायदा नहीं होगा, इसलिए वे ईरान पर हमला करना चाहते थे। तब ट्रम्प ने बातचीत जारी रखने पर जोर दिया।
इसके बाद 17 फरवरी और फिर 26 फरवरी को जेनेवा में ट्रम्प के दूत स्टीव विटकॉफ और दामाद जेरेड कुशनर ने न्यूक्लियर डील पर ईरानी टीम से तीसरे दौर की बातचीत की।
ईरानी विदेश मंत्री अराघची ने कहा, ‘समझौते तक पहुंचने का रास्ता शुरू हो चुका है। दोनों पक्ष सहमत हैं।’
मध्यस्थता कर रहे ओमान के विदेश मंत्री बदर अलबुसैदी ने भी कहा कि समझौते पर सहमति बनने में अब कोई रोड़ा नहीं है। डील के तकनीकी पहलुओं पर अगले हफ्ते जेनेवा में दोबारा बातचीत होनी थी।

ओमान के विदेश मंत्री बदर अलबुसैदी, जो ईरान और अमेरिका के बीच न्यूक्लियर डील की मध्यस्थता कर रहे थे।
यहूदी धर्म में शुक्रवार शब्बात का दिन होता है। यानी छुट्टी लेकर परिवार के साथ आराम और ईश्वर की प्रार्थना का दिन। खामेनेई की हत्या के बाद 1 मार्च को छपी टाइम्स ऑफ इजराइल की एक खबर के मुताबिक, 27 फरवरी को शुक्रवार की शाम इजराइली सैन्य ऑफिसर ने छुट्टी ली।
कोई बड़ा मिलिट्री एक्शन होने वाला हो, तो ऑफिसर्स मिलिट्री हेडक्वार्टर में मौजूद रहते हैं। लेकिन 27 की शाम IDF के चीफ ऑफ स्टाफ लेफ्टिनेंट जनरल इयाल जमीर और बाकी सीनियर ऑफिसर्स शब्बात को अपने घर चले गए और परिवार के साथ डिनर किया। ऐसा इसलिए किया गया ताकि ईरानी स्पाई नेटवर्क को सब कुछ सामान्य लगे और शक न हो कि कोई बड़ा ऑपरेशन होने वाला है।

IDF के चीफ ऑफ स्टाफ लेफ्टिनेंट जनरल इयाल जमीर
इसके अलावा अमेरिकी खुफिया एजेंसी CIA ने ऐन मौके पर ऐसा इनपुट दिया कि हमले की टाइमिंग रात के बजाय दिन में तय दी गई, जबकि दिन में खामेनेई खुद को सेफ महसूस कर रहे थे।
सवाल-3: CIA के इनपुट के बाद खामेनेई पर हमले की टाइमिंग कैसे बदली?
जवाब: NYT ने इस ऑपरेशन से जुड़े सोर्सेज के हवाले से 1 मार्च को खामेनेई की हत्या के बाद एक रिपोर्ट जारी की। इसमें कहा गया कि अमेरिकी एजेंसी CIA महीनों से खामेनेई पर गुपचुप नजर रख रही थी। वह खामेनेई की एक्टिविटी और उनके ठिकाने के बारे में जानकारी जुटा रही थी।
जून 2025 में ईरान-इजराइल के बीच 12 दिन तक चली जंग के दौरान CIA का नेटवर्क मजबूत हो गया था। उसे इसकी भी सटीक जानकारी मिल रही थी कि खामेनेई कहां रहते हैं, किससे मिलते हैं, कैसे बातचीत करते हैं और खतरे के हालात में वे कहां छिप सकते हैं।
आम तौर पर खामेनेई ईरान की राजधानी तेहरान में एक हाई सिक्योरिटी कैंपस में रहते थे। इसे ‘बेत-रहबरी’ यानी सर्वोच्च लीडर का घर कहा जाता है। वे बहुत कम ही बिल्डिंग से बाहर निकलते थे। उनका सारा कामकाज इसी बिल्डिंग से चलता था। यहीं सेना के कमांडर हफ्ते में एक बार मीटिंग के लिए आते थे।

‘बेत-रहबरी’ में सभा के दौरान सुप्रीम लीडर खामेनेई
CIA को पता चला कि 28 फरवरी यानी शनिवार की सुबह तेहरान के इसी हाई सिक्योरिटी कैंपस की एक बिल्डिंग में टॉप ईरानी ऑफिसर्स की एक बैठक होने वाली है। सबसे खास बात ये पता चली कि खामेनेई भी इसमें शामिल होंगे।
अमेरिकी न्यूज चैनल CNN ने एक इजराइली सोर्स के हवाले से बताया कि खामेनेई दिन के उजाले में खुद को ज्यादा सुरक्षित महसूस करते थे। उन्होंने अपनी सतर्कता कम कर ली थी।
इसी कैंपस में ईरानी राष्ट्रपति का ऑफिस, खामेनेई का ऑफिस और ईरानी नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल का ऑफिस था। CIA ने अपनी ये हाई फिडेलिटी यानी ‘उच्च स्तर की सटीकता’ की जानकारी इजराइल को दी।
इस दौरान IDF चीफ इयाल जमीर, इजराइली मिलिट्री इंटेलिजेंस के चीफ मेजर जनरल श्लोमी बाइंडर और मोसाद के डायरेक्टर डेविड बर्निया वाशिंगटन में थे।
इस जानकारी के आधार पर अमेरिका और इजराइल ने अपने हमले का टाइम बदला। अमेरिका-इजराइल पहले शुक्रवार की रात में हमला करने वाले थे। फिर बदले हुए प्लान के मुताबिक, इजराइल के फाइटर जेट्स ने शनिवार सुबह करीब 6 बजे अपने ठिकानों से उड़ान भरी। इस हमले के लिए कम विमानों की जरूरत थी, लेकिन ये ज्यादा दूरी तक सटीक हमला करने वाले हथियारों से लैस थे।
उड़ान भरने के करीब 2 घंटे बाद तेहरान में सुबह करीब 9 बजकर 40 मिनट पर इजराइली मिसाइल्स का हमला हुआ। इस समय एक इमारत में इजराइली सैन्य ऑफिसर और दूसरी इमारत में खामेनेई मौजूद थे।
अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, CIA की डिटेल्ड एनालिसिस और AI सिस्टम की मदद से हमले की टाइमिंग और टारगेट तय किए गए। इन हमलों में सटीक हमला करने वाले प्रिसिशन गाइडेड बंकर बस्टर बम, लॉन्ग रेंज मिसाइल्स और एक तरफा अटैक करने वाले ड्रोन का इस्तेमाल किया गया।

सवाल-4: पिछले साल इजराइल के हमलों में खामेनेई कैसे बचे थे?
जवाब: 13 जून 2025 को इजराइल ने ईरान के न्यूक्लियर ठिकानों पर हमला शुरू किया। इसके बाद 15 जून को इजराइल ने अपनी सीमा से 2,300 किमी दूर पूर्वी ईरान के मशहद एयरपोर्ट को निशाना बनाया। इसे खामेनेई की सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा माना गया, जिसके बाद उन्हें तेहरान शहर से 343 किमी दूर उत्तर-पूर्वी लाविजान इलाके में बने एक बंकर में शिफ्ट किया गया।
इजराइल ने तेहरान में खामेनेई के कंपाउंड पर भी बम गिराए थे, लेकिन खामेनेई वहां मौजूद नहीं थे। खामेनेई की आधिकारिक वेबसाइट Khamenei.ir पर जारी किए गए उनके कुछ वीडियोज की एनालिसिस करके कई मीडिया रिपोर्ट्स में कहा गया कि ये किसी नई जगह से जारी किए गए लो-क्वालिटी वीडियो हैं। खामेनेई, अपने बेटे मोज्तबा खामेनेई और बाकी परिवार के साथ लाविजान के बंकर में रह रहे हैं।
अप्रैल और अक्टूबर 2024 में जब ईरान ने इजराइल पर एयरस्ट्राइक की थी, तब भी खामेनेई यहीं छिप गए थे। खामेनेई इसी बंकर से मैसेज जारी कर रहे थे। उनसे मिलने आने वाले वाले ऑफिसर्स को फोन का इस्तेमाल करने की मनाही थी। उन्हें आंखों पर पट्टी बांधकर खामेनेई के पास लेकर जाया जाता था।
ये बंकर जमीन से 200 फीट नीचे है। इतनी गहराई में बने बंकर को आम मिसाइल्स या बमों से तबाह करना मुश्किल होता है।
22 जून को अमेरिकी B2 बॉम्बर विमानों ने ईरान की न्यूक्लियर लैबोरेट्री पर बमबारी की, लेकिन ऐसी कोई खबर नहीं आई कि खामेनेई के ठिकानों पर हमले की कोशिश की गई है।
सवाल-5: फिर इस बार खामेनेई सीक्रेट बंकर में क्यों नहीं गए?
जवाब: अमेरिकी और ब्रिटिश खुफिया एजेंसियों के मुताबिक खामेनेई ने प्लान B तैयार किया था। कहा गया कि अगर ईरान में चल रहे विरोध प्रदर्शन काबू में नहीं आए, तो खामेनेई अपने बेटे और 20 अन्य करीबी लोगों के साथ रूस भाग जाएंगे। इजराइली इंटेलिजेंस ऑफिसर कह रहे थे कि खामेनेई के लिए रूस भागना ही आखिरी चारा है। सीरिया के तानाशाह बशर अल असद ने भी दिसंबर 2024 में रूस में शरण ली थी।
हालांकि ईरान के एक सीनियर ऑफिसर ने खामेनेई की मौत के बाद अमेरिकी वेबसाइट ड्रॉप साइट से कहा कि खामेनेई का ऐसा कोई प्लान नहीं था। ये सब ट्रम्प को ज्यादा प्रभावशाली दिखाने के लिए गढ़ा गया एक नाटक था। 17 फरवरी 2026 को खामेनेई सार्वजनिक रूप से तेहरान में आयोजित एक सभा में नजर आए। उन्होंने ईरान की हथियारों की जरूरत को लेकर भाषण भी दिया।
ऑफिसर के मुताबिक, ‘ईरान की नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल ने खामेनेई को सलाह दी थी कि वह अपने रहने और काम करने की जगह बदल दें, लेकिन खामेनेई का नजरिया बिल्कुल अलग था। वह सुरक्षा के उपाय बढ़ाने के बजाय बिना चीजों को जहां तक हो सके सामान्य रखने पर जोर दे रहे थे।’

अली लारीजानी IRGC के शुरूआती नेताओं में से एक हैं।
अमेरिकी NGO फाउंडेशन फॉर डिफेंस डेमोक्रेसीज यानी FDD ने 19 फरवरी को लिखा कि खामेनेई का लहजा विनाशकारी हो गया था। वे उन ऐतिहासिक शिया धार्मिक नेताओं का हवाला दे रहे थे, जिन्होंने समझौते के बजाय शहादत चुनी। जब ट्रम्प ने ईरान को बिना शर्त समर्पण की चेतानवी दी, तो खामेनेई ने अपने बयान में कहा था, ‘तुम यह नहीं कर पाओगे।’
खामेनेई के गुरु और पूर्व सुप्रीम लीडर खोमैनी ने भी 1979 में अमेरिका को इसी तरह जवाब दिया था।

2 फरवरी 1979 को समर्थकों से मिलते हुए पूर्व सुप्रीम लीडर खोमैनी (ऊपर बाईं तरफ)
22 जनवरी को खामेनेई ने सभी ऑफिसर्स और नेताओं को चार लेयर तक अपने उत्तराधिकारी तय करने को भी कह दिया था। उन्होंने अपने बयान में कहा, ‘हम डरेंगे नहीं, अमेरिका को ऐसा झटका देंगे कि वो उठ न सके।’
24 फरवरी को फॉरेन पॉलिसी में एक एनालिसिस छपी। इसमें खामेनेई की ईरान पर हमले से पहले की सोच के बारे में लिखा गया।
रिपोर्ट के मुताबिक, ‘खामेनेई के यूनिवर्स में शहादत एक पवित्र और नैतिक जीत है और प्रतिरोध करते हुए मौत होना हार नहीं है। उनकी सोच थी कि समझौता कमजोरी का संकेत है। दबाव में पीछे हटने और दबाव बढ़ता है। वह खोमैनी के उस इतिहास को दोहराना नहीं चाहते थे, जब उन्होंने 1988 में इराक से जंग रोकने के लिए समझौता किया था।’
कार्नेगी एंडोमेंट फॉर इंटरनेशनल पीस के सीनियर फेलो करीम सजादपुर कहते हैं, ‘ईरानी रिजीम दुनिया की सबसे अकेली सत्ताओं में से एक है। ईरानी ऑफिसर्स के लिए कोई अच्छा एक्जिट प्लान नहीं है। दुनिया में बहुत कम ऐसी जगहें हैं, जहां वे निर्वासन में रह सकते हैं। इसीलिए उनमें से ज्यादातर मानते हैं कि उन्हें या तो मारना होगा या मरना होगा।’
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