ऑल्टोस लैब खोज रही है जवान रहने का फॉर्मूला:अब बीमारी नहीं, बुढ़ापे का भी होगा इलाज

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कैलिफोर्निया की सिलिकॉन वैली। इंसान ने सदियों से अमृत की तलाश की है और विज्ञान की दुनिया में अब यह तलाश माइक्रोस्कोप के नीचे कोशिकाओं तक पहुंच गई है। इसी काम में लगी है ऑल्टोस लैब्स। हालांकि इसका लक्ष्य सिर्फ उम्र बढ़ाना नहीं, बुढ़ापे का उपचार करना भी है। असल में उम्र बढ़ना केवल जेनेटिक्स का खेल नहीं है। यह एपिजेनेटिक बदलावों का परिणाम है। सरल शब्दों में कहें तो हमारे शरीर की कोशिकाओं के पास एक बायोलॉजिकल सॉफ्टवेयर होता है। समय के साथ, प्रदूषण, तनाव और उम्र के कारण इस सॉफ्टवेयर में बग्स आ जाते हैं, जिससे कोशिकाएं अपना काम भूलने लगती हैं। ऑल्टोस लैब्स इसी सॉफ्टवेयर को रीसेट करने पर काम कर रही हैं। इसके केंद्र में हैं यामानाका फैक्टर्स। यानी वो जादुई प्रोटीन जो किसी बूढ़ी कोशिका को वापस उसकी युवा अवस्था में ले जा सकते हैं। हम कोशिकाओं की आंशिक रीप्रोग्रामिंग कर रहे हैं। यानी कोशिका की पहचान वही रहेगी, बस उसकी ऊर्जा और मरम्मत करने की क्षमता युवा जैसी हो जाएगी।

इस प्रोजेक्ट में बेजोस का धन और नोबेल विजेता वैज्ञानिकों का दिमाग ऑल्टोस लैब्स की ताकत दो स्तंभों पर टिकी है- पूंजी और नोबेल स्तर का ज्ञान। अमेजन के संस्थापक जेफ बेजोस और यूरी मिलनर जैसे अरबपतियों ने इसमें लगभग 25,000 करोड़ रुपए (3 अरब डॉलर) का निवेश किया है। यह इतिहास का सबसे बड़ा स्टार्टअप निवेश माना जाता है। जबकि लैब की कमान नोबेल विजेता वैज्ञानिक शिन्या यामानाका (कोशिका रीप्रोग्रामिंग के जनक) और स्टीव होर्वाथ (बायोलॉजिकल क्लॉक के विशेषज्ञ) जैसे दिग्गजों के हाथों में है। 80 साल की उम्र में कोशिकाओं में होगी 30 की उम्र जैसी ऊर्जा और क्षमता 2022 में शुरुआत के बाद से लैब ने प्रयोगों से साबित कर दिया है कि उम्र के संकेतों को पलटना संभव है। एआई अब कोशिकाओं के व्यवहार को ट्रैक कर रहा है, जिससे यह समझना आसान हो गया है कि कोशिकाएं कब थकती हैं। यदि ऑल्टोस लैब्स सफल होती है, तो हम लंबे समय तक जिएंगे ही नहीं, अंतिम सांस तक स्वस्थ भी रहेंगे। कैंसर, हृदय रोगों का इलाज करने के बजाय, डॉक्टर सीधे बुढ़ापे का इलाज करेंगे। खराब अंगों को बदलने के बजाय, शरीर उन्हें भीतर से खुद ठीक कर लेगा। हम ऐसे भविष्य की ओर जा रहे हैं, जहां 80 साल की उम्र में भी शरीर की कोशिकाएं 30 साल जैसी ऊर्जा से भरी होंगी। हम उम्र के साथ आने वाली कमजोरी को हराना चाहते हैं।



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