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Mon, Oct 5, 2026Updated 8:47 PM IST
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अमेरिका में नकली वजन घटाने वाली दवा ओजेम्पिक बेचने का मामला: दो भारतीय नागरिकों पर आरोप, दोषी पाए जाने पर 71 साल तक की हो सकती है सजा

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वाशिंगटन/नई दिल्ली। अमेरिका में वजन घटाने के लिए इस्तेमाल होने वाली लोकप्रिय दवा ओजेम्पिक (Ozempic) के नकली संस्करण को बेचने और उसके अवैध वितरण से जुड़े एक बड़े मामले में दो भारतीय नागरिकों के खिलाफ औपचारिक रूप से मुकदमा दर्ज किया गया है। इस गंभीर आपराधिक मामले में दोनों आरोपियों पर नकली दवाओं की तस्करी और उन्हें बाजार में खपाने के संगीन आरोप लगाए गए हैं। अमेरिकी कानूनी प्रक्रिया और अभियोजन पक्ष की तरफ से दी गई जानकारी के अनुसार, यदि जांच और अदालती कार्यवाही में ये दोनों भारतीय नागरिक दोषी साबित होते हैं, तो उन्हें अधिकतम 71 साल तक की जेल की सजा भुगतनी पड़ सकती है। यह मामला अमेरिका में स्वास्थ्य सेवाओं और दवा नियामक प्रणाली की सुरक्षा को लेकर उठाए जा रहे सवालों के बीच सामने आया है, जिसने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चिंता पैदा कर दी है।

प्राप्त जानकारी के मुताबिक, इस पूरे रैकेट का संचालन चीन से कच्चे माल या दवा के घटकों को मंगाकर किया जा रहा था। आरोप है कि ये दोनों भारतीय नागरिक चीन से वजन घटाने वाली दवा ओजेम्पिक के नकली संस्करण या उससे जुड़ी सामग्री अमेरिका मंगवाते थे। इसके बाद, इन नकली दवाओं को असली और प्रमाणित दवाओं के रूप में अमेरिकी बाजार में लोगों को बेचा जा रहा था। ओजेम्पिक वर्तमान समय में दुनिया भर में, विशेषकर अमेरिका में, वजन कम करने और टाइप-2 मधुमेह (डायबिटीज) के उपचार के लिए सबसे अधिक मांग वाली दवाओं में से एक है। इस दवा की भारी मांग और बाजार में इसकी लगातार बढ़ती लोकप्रियता का फायदा उठाते हुए, आरोपियों ने कथित तौर पर इस अवैध धंधे को अंजाम दिया। नकली दवाओं की बिक्री से न केवल आम जनता के स्वास्थ्य को गंभीर खतरा पैदा होता है, बल्कि यह अमेरिकी खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) और अन्य संबंधित कानून प्रवर्तन एजेंसियों के नियमों का भी सीधा उल्लंघन माना जाता है।

अमेरिका में नकली दवाओं के निर्माण, उनके आयात, वितरण और बिक्री को एक अत्यंत गंभीर संघीय अपराध की श्रेणी में रखा जाता है। अमेरिकी कानून के तहत, ऐसे मामलों में दोषी पाए जाने वाले व्यक्तियों को कई अलग-अलग धाराओं के तहत सजा का प्रावधान है। यही कारण है कि जब इन सभी धाराओं के तहत मिलने वाली अधिकतम सजाओं को जोड़ा जाता है, तो इन दोनों भारतीय नागरिकों को कुल मिलाकर 71 साल तक की कैद की सजा हो सकती है। हालांकि, यह स्पष्ट रूप से ध्यान रखना आवश्यक है कि 71 साल की यह अवधि कानूनी प्रावधानों के तहत संभावित अधिकतम सजा है। अदालत द्वारा अंतिम फैसला सुनाए जाने पर वास्तविक सजा इससे कम भी हो सकती है, जो पूरी तरह से मामले की सुनवाई, सबूतों की मजबूती और अदालती प्रक्रिया के निष्कर्ष पर निर्भर करेगी।

ओजेम्पिक दवा मुख्य रूप से सेमाग्लूटाइड (Semaglutide) नामक सक्रिय तत्व पर आधारित होती है। यह दवा शरीर में हार्मोनल स्तर पर काम करती है, जिससे भूख कम लगती है और वजन नियंत्रित करने में मदद मिलती है। पिछले कुछ वर्षों में, सोशल मीडिया और विभिन्न प्लेटफॉर्म पर इसके वजन घटाने वाले गुणों की व्यापक चर्चा के बाद, इसकी मांग में अभूतपूर्व वृद्धि देखी गई है। इसी भारी मांग के चलते कई बार असली दवा की वैश्विक आपूर्ति में कमी आ जाती है, जिसका लाभ उठाकर नकली दवा बनाने वाले गिरोह सक्रिय हो जाते हैं। चीन जैसे देशों से सस्ते में नकली या अनियमित रूप से तैयार किए गए उत्पादों को मंगवाकर उन्हें असली ब्रांड के नाम पर ऊंची कीमतों पर बेचना एक अत्यंत लाभकारी लेकिन खतरनाक अवैध कारोबार बन चुका है।

नकली दवाओं का सेवन करने वाले मरीजों को जान का भी खतरा हो सकता है, क्योंकि इनमें सही रासायनिक संरचना नहीं होती और इनमें हानिकारक तत्व मौजूद हो सकते हैं। अमेरिकी स्वास्थ्य अधिकारी और खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) समय-समय पर उपभोक्ताओं को चेतावनी देते रहे हैं कि वे दवाएं हमेशा लाइसेंस प्राप्त और अधिकृत मेडिकल स्टोर या फार्मेसी से ही खरीदें। इंटरनेट या अनजान स्रोतों से सस्ती दवाएं खरीदने से बचने की सलाह दी जाती है।

इस मामले में अभी अदालती कार्यवाही प्रारंभिक चरण में बताई जा रही है और दोनों आरोपियों पर लगे आरोपों को अभी अदालत में साबित किया जाना बाकी है। अमेरिकी न्याय प्रणाली में किसी भी व्यक्ति को दोषी ठहराए जाने से पहले निर्दोष माना जाता है, जब तक कि सबूतों के आधार पर उसकी दोषसिद्धि न हो जाए। इस पूरे प्रकरण ने भारत और अमेरिका के बीच दवा नियामक सहयोग और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नकली दवाओं की तस्करी को रोकने की आवश्यकता को एक बार फिर रेखांकित किया है। वैंदे भारत न्यूज़ इस मामले की आगे की कानूनी कार्यवाही और विकास पर लगातार नजर बनाए हुए है।