अमेरिका ने ईरान के दो राजनयिकों को देश से निकाला, UN महासभा में शामिल होने पहुंचे थे न्यूयॉर्क

वाशिंगटन/न्यूयॉर्क। वंदे भारत न्यूज। संयुक्त राष्ट्र महासभा (UN General Assembly) के सत्र में भाग लेने के लिए अमेरिका पहुंचे ईरान के दो राजनयिकों को अमेरिकी सरकार ने देश से निष्कासित कर दिया है। यह कार्रवाई तब की गई जब दोनों राजनयिकों ने अमेरिकी अधिकारियों द्वारा दिए गए आदेश का पालन नहीं किया और निर्धारित समयसीमा समाप्त होने के बाद भी वे न्यूयॉर्क में रुके रहे। इस घटनाक्रम ने एक बार फिर से अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे कूटनीतिक तनाव को उजागर किया है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, ईरान के ये दोनों राजनयिक संयुक्त राष्ट्र महासभा के कार्यक्रम में शामिल होने के लिए न्यूयॉर्क आए थे। संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय न्यूयॉर्क में स्थित है और हर वर्ष विश्व के विभिन्न देशों के राष्ट्राध्यक्ष, सरकार प्रमुख और वरिष्ठ राजनयिक इस महासभा में हिस्सा लेने के लिए अमेरिका आते हैं। मेजबान देश होने के नाते अमेरिका इन प्रतिनिधिमंडलों को वीजा और यात्रा संबंधी सुविधाएं उपलब्ध कराता है। हालांकि, अमेरिकी विदेश विभाग के पास यह अधिकार सुरक्षित रहता है कि वह राष्ट्रीय सुरक्षा या अन्य कारणों से किसी भी विदेशी राजनयिक की गतिविधियों पर प्रतिबंध लगा सकता है या उसे देश छोड़ने का आदेश दे सकता है।
अमेरिकी प्रशासन ने ईरान के इन दोनों राजनयिकों को न्यूयॉर्क में रहने और उनकी गतिविधियों को लेकर कुछ निर्देश जारी किए थे। सूत्रों के मुताबिक, उन्हें एक निश्चित दायरे में ही रहने और कार्य करने की अनुमति दी गई थी। लेकिन जब इन राजनयिकों ने अमेरिकी अधिकारियों के आदेशों का उल्लंघन किया और उन्हें दी गई समयसीमा के बाद भी न्यूयॉर्क शहर में रुकने का फैसला किया, तो अमेरिकी प्रशासन ने सख्त रुख अपनाते हुए उन्हें देश से निष्कासित करने का आदेश जारी कर दिया। आदेश मिलने के बावजूद उनके न्यूयॉर्क में बने रहने को अमेरिकी नियमों के स्पष्ट उल्लंघन के रूप में देखा गया।
अमेरिका और ईरान के बीच कूटनीतिक संबंध वर्ष 1979 की इस्लामिक क्रांति के बाद से सामान्य नहीं रहे हैं। उसी वर्ष तेहरान में अमेरिकी दूतावास पर कब्जे और अमेरिकी कर्मियों को बंधक बनाए जाने की घटना के बाद दोनों देशों ने अपने औपचारिक कूटनीतिक संबंध तोड़ लिए थे। तब से लेकर अब तक दोनों देशों के बीच कोई सीधा राजनयिक मिशन मौजूद नहीं है। ऐसे में संयुक्त राष्ट्र जैसे बहुपक्षीय मंच ही वे स्थान होते हैं जहां दोनों देशों के अधिकारी आमने-सामने आते हैं। संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान ईरानी प्रतिनिधिमंडल का न्यूयॉर्क आना एक नियमित कूटनीतिक प्रक्रिया का हिस्सा है, लेकिन अमेरिका हमेशा ईरानी राजनयिकों की गतिविधियों पर कड़ी नजर रखता है।
संयुक्त राष्ट्र के मेजबान देश के रूप में अमेरिका की जिम्मेदारियां और अधिकार दोनों होते हैं। 1947 के संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय समझौते (UN Headquarters Agreement) के तहत अमेरिका को सदस्य देशों के प्रतिनिधियों को संयुक्त राष्ट्र की बैठकों में शामिल होने के लिए वीजा देने की आवश्यकता होती है। लेकिन इसके साथ ही अमेरिका को राष्ट्रीय सुरक्षा के आधार पर राजनयिकों की यात्राओं पर प्रतिबंध लगाने या उन्हें निष्कासित करने का विशेषाधिकार भी प्राप्त है। अतीत में भी अमेरिका कई बार ईरानी, रूसी, उत्तर कोरियाई और अन्य देशों के राजनयिकों को इसी प्रकार के कारणों से निष्कासित कर चुका है।
ईरान के दो राजनयिकों के निष्कासन की यह ताजा घटना ऐसे समय में हुई है जब मध्य पूर्व में भू-राजनीतिक स्थिति अत्यंत संवेदनशील बनी हुई है। ईरान के परमाणु कार्यक्रम, क्षेत्रीय गुटों को उसके समर्थन और अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों को लेकर अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से मतभेद चले आ रहे हैं। यद्यपि अमेरिकी प्रशासन ने इस निष्कासन को मुख्य रूप से वीजा शर्तों के उल्लंघन और आदेशों की अवहेलना से जोड़ा है, लेकिन कूटनीतिक जानकार इसे दोनों देशों के बीच व्यापक तनाव के संदर्भ में देख रहे हैं।
इस मामले में ईरान की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि ईरानी विदेश मंत्रालय इस निष्कासन को लेकर संयुक्त राष्ट्र या अमेरिका के समक्ष कोई औपचारिक विरोध दर्ज कराएगा या नहीं। वहीं, अमेरिकी विदेश विभाग ने भी राजनयिकों के नाम या उनके खिलाफ की गई कार्रवाई के बारे में अधिक विस्तृत जानकारी सार्वजनिक नहीं की है। अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक प्रोटोकॉल के तहत ऐसी कार्रवाइयों को अक्सर गोपनीय रखा जाता है, जब तक कि संबंधित देश खुद इसे सार्वजनिक न करें।
संयुक्त राष्ट्र महासभा का सत्र वैश्विक कूटनीति का सबसे बड़ा मंच माना जाता है। दुनिया भर के लगभग सभी देशों के नेता और वरिष्ठ अधिकारी इसमें हिस्सा लेते हैं। ऐसे में किसी भी देश के राजनयिकों का मेजबान देश द्वारा निष्कासित किया जाना एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक घटना होती है। ईरानी राजनयिकों के इस निष्कासन से भविष्य में संयुक्त राष्ट्र में ईरानी प्रतिनिधिमंडल की भागीदारी और अमेरिका-ईरान संबंधों पर क्या असर पड़ेगा, यह देखना बाकी है। फिलहाल, दोनों देशों के बीच कूटनीतिक स्तर पर तनाव बरकरार रहने की संभावना जताई जा रही है।

