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Thu, Oct 8, 2026Updated 7:46 AM IST
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अनंत सिंह की राजनीति में एंट्री: जज से कहा ‘शीशा नीचे कीजिए, अनंत सिंह का इलाका है’, मंत्री की बात चुभने पर हराया और सूरजभान से लिया बदला

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बिहार की राजनीति और अपराध के गठजोड़ की जब भी चर्चा होती है, तो पटना जिले के बाढ़ क्षेत्र से जुड़ा एक नाम सबसे पहले सामने आता है—अनंत सिंह। ‘बाढ़ का बहूबली’ के रूप में विख्यात अनंत सिंह की राजनीतिक यात्रा किसी साधारण कहानी की तरह नहीं रही है। उनकी राजनीति में एंट्री, उनका प्रभाव और उनके संघर्षों की कहानी बिहार के राजनीतिक इतिहास के कई उतार-चढ़ाव को अपने भीतर समेटे हुए है। साल 1990 के दशक का समय था, जब अनंत सिंह का खौफ और प्रभाव इस कदर बढ़ चुका था कि सरकारी अधिकारी भी उनके क्षेत्र में गुजरते वक्त सतर्क रहते थे। उसी दौर की एक घटना आज भी लोगों की स्मृति में दर्ज है, जो यह बताने के लिए काफी है कि अनंत सिंह ने अपने क्षेत्र में किस प्रकार की पकड़ बना ली थी।

साल 1990 का समय था। पटना में तैनात एक डिस्ट्रिक्ट जज किसी काम से पटना जिले के बाढ़ कस्बे के पास स्थित नदवां गांव जा रहे थे। जब जज साहब की गाड़ी उस इलाके से गुजर रही थी, तभी वहां मौजूद लोगों ने गाड़ी को रुकवा लिया या ध्यान आकर्षित किया। जज साहब से कहा गया, “जज साहब, शीशा नीचे कीजिए…अनंत सिंह का इलाका है।” यह वाक्य महज एक सूचना नहीं था, बल्कि उस समय बाढ़ और उसके आसपास के क्षेत्रों में अनंत सिंह के दबदबे का स्पष्ट प्रमाण था। एक जिला न्यायाधीश जैसे उच्च संवैधानिक पद पर आसीन व्यक्ति को भी उस इलाके में गुजरते वक्त यह अहसास कराया जा रहा था कि वह किसके प्रभाव क्षेत्र में हैं। यह घटना उस दौर के माहौल को दर्शाती है, जब बाढ़ क्षेत्र में अनंत सिंह का नाम ही काफी माना जाता था।

अनंत सिंह की राजनीति में प्रवेश की कहानी केवल दबदबे तक सीमित नहीं रही, बल्कि इसके पीछे कई राजनीतिक समीकरण और व्यक्तिगत संघर्ष भी शामिल थे। शुरुआती दौर में जब उन्हें राजनीतिक गलियारों में कुछ नेताओं द्वारा तरजीह नहीं दी गई, तो उन्होंने खुद अपना रास्ता बनाने का फैसला किया। बताया जाता है कि एक बार एक मंत्री द्वारा कही गई बात अनंत सिंह को इस कदर चुभ गई कि उन्होंने राजनीति में सक्रिय रूप से उतरकर उस मंत्री को ही हराने की ठान ली। यह जिद और बदले की भावना उनके राजनीतिक करियर का एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुई। मंत्री की उस बात ने उन्हें यह अहसास दिलाया कि समाज और राजनीति में असली ताकत हासिल करने के लिए सत्ता के गलियारों में अपनी सीधी पहुंच होना कितना जरूरी है। इसके बाद उन्होंने चुनावी राजनीति में कदम रखा और अपने विरोधियों को उनकी औकात बताने के लिए जनता के बीच गए।

अनंत सिंह के राजनीतिक संघर्ष में एक और बड़ा नाम जुड़ा हुआ है—सूरजभान सिंह। सूरजभान सिंह से अनंत सिंह की प्रतिद्वंद्विता बिहार की राजनीति के सबसे चर्चित अध्यायों में से एक रही है। दोनों के बीच की दुश्मनी और राजनीतिक टकराव ने बाढ़ की राजनीति को हमेशा के लिए बदल कर रख दिया। सूरजभान सिंह से बदला लेने की चाहत अनंत सिंह के राजनीतिक कदमों को दिशा देने वाले प्रमुख कारकों में से एक थी। इस प्रतिद्वंद्विता ने न केवल दोनों नेताओं के समर्थकों को आमने-सामने ला खड़ा किया, बल्कि पूरे पटना जिले की राजनीति को एक नया और आक्रामक आयाम दे दिया। अनंत सिंह ने अपने राजनीतिक प्रभाव का उपयोग करते हुए सूरजभान सिंह के वर्चस्व को सीधी चुनौती दी और इस संघर्ष में उन्होंने अपनी अलग पहचान स्थापित की।

बाढ़ क्षेत्र में अपराध और राजनीति के गठजोड़ की चर्चा हमेशा से होती रही है। अनंत सिंह पर कई आपराधिक मामले दर्ज हुए, लेकिन इन मामलों ने उनके राजनीतिक करियर को रोकने के बजाय उनके समर्थकों की नजर में उन्हें एक ऐसे नेता के रूप में स्थापित किया जो सिस्टम से लड़ सकता है। उनके समर्थक उन्हें ‘रॉबिनहुड’ की छवि में देखते थे, जबकि विरोधियों के लिए वे बाढ़ के बहूबली थे। चुनावी आयोग और प्रशासन के लिए भी अनंत सिंह का क्षेत्र हमेशा से संवेदनशील रहा है। हर चुनाव में बाढ़ विधानसभा क्षेत्र पर पूरे राज्य की निगाहें टिकी रहती थीं, क्योंकि यहां का मुकाबला केवल दो उम्मीदवारों के बीच नहीं, बल्कि दो बड़े दबंगों और उनके प्रभाव क्षेत्रों के बीच माना जाता था।

नदवां गांव में जज साहब से कही गई वह बात—’शीशा नीचे कीजिए, अनंत सिंह का इलाका है’—मात्र एक संवाद नहीं था। यह बिहार की उस दौर की राजनीतिक और सामाजिक स्थिति का आईना था, जहां बाहुबल और राजनीति एक-दूसरे से इस कदर गुंथे हुए थे कि इन्हें अलग करना लगभग असंभव था। मंत्री की बात का चुभना हो, सूरजभान सिंह से बदला लेने की जिद हो, या फिर बाढ़ क्षेत्र में अपना वर्चस्व स्थापित करने की लड़ाई, अनंत सिंह की पूरी राजनीतिक यात्रा इन घटनाओं के इर्द-गिर्द बुनी गई है। आज भी जब बिहार में अपराध और राजनीति के संबंधों पर बहस होती है, तो अनंत सिंह का नाम एक प्रमुख उदाहरण के तौर पर लिया जाता है, जिसने अपने क्षेत्र में एक ऐसा साम्राज्य खड़ा किया जो दशकों तक अजेय माना गया।