औरंगाबाद: धान आच्छादन में 95.06 फीसदी उपलब्धि हासिल, निजी नलकूप के लिए आए 2809 आवेदन; कृषि टास्क फोर्स की बैठक में योजनाओं की समीक्षा

औरंगाबाद। बिहार के औरंगाबाद जिले में कृषि कार्यों की प्रगति और विभिन्न सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन की समीक्षा के लिए कृषि टास्क फोर्स की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में जिले के कृषि क्षेत्र से जुड़े तमाम पहलुओं पर विस्तार से चर्चा हुई। बैठक में दी गई जानकारी के अनुसार, औरंगाबाद जिले ने धान आच्छादन (पैडी कवरेज) के लक्ष्य को प्राप्त करने में उल्लेखनीय सफलता हासिल की है। जिले में धान की खेती के लिए निर्धारित किए गए कुल लक्ष्य के सापेक्ष 95.06 प्रतिशत उपलब्धि दर्ज की गई है, जो जिले के किसानों की सक्रिय भागीदारी और कृषि विभाग के समन्वित प्रयासों को दर्शाता है। इसके अलावा, सिंचाई सुविधाओं को बेहतर बनाने के उद्देश्य से निजी नलकूप योजना के तहत किसानों द्वारा बड़ी संख्या में आवेदन किए गए हैं।
बता दें कि औरंगाबाद जिले में वर्तमान खरीफ सीजन में धान की खेती के लिए 1.76 लाख हेक्टेयर भूमि का लक्ष्य निर्धारित किया गया था। कृषि टास्क फोर्स की बैठक में प्रस्तुत आंकड़ों के मुताबिक, इस लक्ष्य के विरुद्ध जिले में कुल 1,67,309.23 हेक्टेयर भूमि में धान की रोपाई और खेती का कार्य पूर्ण किया गया है। यह आंकड़ा निर्धारित लक्ष्य का 95.06 प्रतिशत है। कृषि अधिकारियों ने इस उपलब्धि को जिले के कृषि परिदृश्य के लिए एक सकारात्मक संकेत बताया है। धान औरंगाबाद जिले की प्रमुख फसलों में से एक है और इसकी बेहतर पैदावार जिले की खाद्य सुरक्षा तथा किसानों की आर्थिक स्थिति सुधारने में अहम भूमिका निभाती है। मानसून की स्थिति, बीजों की उपलब्धता और किसानों को समय पर मिले मार्गदर्शन के कारण ही इस स्तर की उपलब्धि संभव हो पाई है।
धान आच्छादन की इस उपलब्धि के साथ-साथ बैठक में सिंचाई संसाधनों को मजबूत करने पर भी विशेष बल दिया गया। कृषि टास्क फोर्स की बैठक में बताया गया कि जिले में निजी नलकूप स्थापित करने के लिए किसानों की ओर से भारी रुझान देखा जा रहा है। अब तक कुल 2809 किसानों ने निजी नलकूप योजना के तहत अपने आवेदन जमा कराए हैं। यह संख्या इस बात का स्पष्ट संकेत है कि जिले के किसान वर्षा जल पर अपनी निर्भरता को कम करना चाहते हैं और सुनिश्चित सिंचाई के वैकल्पिक साधनों की ओर तेजी से बढ़ रहे हैं। निजी नलकूपों की स्थापना से न केवल धान बल्कि रबी सीजन की अन्य फसलों जैसे गेहूं, दलहन और तिलहन की खेती को भी लाभ पहुंचेगा। सिंचाई के पर्याप्त साधन होने से किसान साल में दो या उससे अधिक फसलें ले सकेंगे, जिससे उनकी कुल आय में वृद्धि होगी।
कृषि टास्क फोर्स की इस समीक्षा बैठक में इन 2809 आवेदनों की वर्तमान स्थिति और उनके शीघ्र निस्तारण की प्रक्रिया पर भी चर्चा की गई। अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि पात्र किसानों के आवेदनों को बिना किसी अनावश्यक देरी के मंजूरी प्रदान की जाए, ताकि वे समय रहते अपने खेतों में नलकूप स्थापित कर सकें। सरकार द्वारा संचालित विभिन्न कृषि योजनाओं का लाभ अंतिम किसान तक पहुंचाना इस टास्क फोर्स का मुख्य उद्देश्य है। बैठक में इस बात पर जोर दिया गया कि नलकूप योजना के तहत मिलने वाले अनुदान और सब्सिडी की जानकारी ग्रामीण स्तर पर सभी किसानों तक पहुंचनी चाहिए, ताकि जो किसान अभी तक आवेदन नहीं कर पाए हैं, वे भी इसका लाभ उठा सकें।
औरंगाबाद जिला ऐतिहासिक रूप से कृषि प्रधान क्षेत्र रहा है। यहां की अधिकांश ग्रामीण आबादी प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से खेती-बाड़ी पर ही निर्भर है। ऐसे में कृषि टास्क फोर्स की नियमित बैठकें और योजनाओं की जमीनी स्तर पर समीक्षा अत्यंत आवश्यक होती है। बैठक में जिले में चल रही अन्य कृषि संबंधी योजनाओं की भी समीक्षा की गई। अधिकारियों ने प्रखंड स्तर पर कार्यरत कृषि पदाधिकारियों और कृषि समन्वयकों को निर्देश दिए कि वे लगातार किसानों के संपर्क में रहें और उन्हें आधुनिक खेती के तरीकों, उन्नत बीजों के उपयोग तथा मिट्टी परीक्षण के महत्व के बारे में जागरूक करें।
बैठक में यह भी रेखांकित किया गया कि 1,67,309.23 हेक्टेयर भूमि में धान की खेती का कार्य पूरा हो जाने के बाद अब विभाग का ध्यान फसल की बेहतर देखभाल, कीट-पतंगों से बचाव और समय पर कटाई सुनिश्चित करने पर केंद्रित होना चाहिए। किसानों को फसल सुरक्षा से जुड़ी सटीक जानकारी उपलब्ध कराने के लिए कृषि विज्ञान केंद्रों और प्रसार सेवाओं की भूमिका को और अधिक प्रभावी बनाने पर सहमति व्यक्त की गई।
कुल मिलाकर, औरंगाबाद जिले में कृषि टास्क फोर्स की यह बैठक जिले के कृषि विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हुई। धान आच्छादन में 95.06 प्रतिशत की उपलब्धि और निजी नलकूप के लिए 2809 आवेदन आना यह दर्शाता है कि जिले में कृषि गतिविधियां तेजी से आगे बढ़ रही हैं। प्रशासन और कृषि विभाग के अधिकारी इन योजनाओं के सफल क्रियान्वयन के लिए प्रतिबद्ध हैं, ताकि औरंगाबाद जिले के किसानों को सरकारी योजनाओं का पूर्ण लाभ मिल सके और क्षेत्र का सर्वांगीण कृषि विकास सुनिश्चित हो सके। आने वाले समय में भी इसी प्रकार की नियमित समीक्षा बैठकें आयोजित की जाती रहेंगी, जिससे योजनाओं की प्रगति पर लगातार नजर रखी जा सके।

