धनबाद, 21 नवंबर 2025:आईआईटी आईएसएम धनबाद में “बिल्डिंग सेफर वर्कप्लेस: अंडरस्टैंडिंग द पोश एक्ट, 2013” विषय पर जागरूकता कार्यशाला आयोजित हुई। जीजेएलटी में शाम 4 से 6 बजे तक आयोजित इस कार्यक्रम में मुख्य संसाधक के रूप में शिक्षा मंत्रालय, भारत सरकार के डॉ. पंकज के. पी. श्रेयस्कर उपस्थित रहे। कार्यशाला में कर्मचारियों, छात्रों, शोधार्थियों व प्रोजेक्ट स्टाफ ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।
डॉ. श्रेयस्कर ने कार्यस्थल पर सम्मानजनक व्यवहार, लैंगिक संवेदनशीलता और आपसी भरोसे की महत्ता पर जोर देते हुए कहा कि संस्थान का सुचारू संचालन सिर्फ कानूनों से नहीं, बल्कि अच्छे प्रबंधन और नैतिक मूल्यों से सुनिश्चित होता है। उन्होंने कहा कि पोश एक्ट के तहत गठित समितियाँ अर्द्ध-न्यायिक होती हैं, इसलिए निर्णय प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों पर आधारित होने चाहिए।उन्होंने कहा कि “किसी भी मामले में बिना सुनवाई और बिना खुले मन से पहुंचा गया निष्कर्ष न्यायसंगत नहीं हो सकता। संस्थागत विवाद अक्सर आपसी भरोसा टूटने से पैदा होते हैं, इसलिए संवेदनशीलता और पारदर्शी व्यवहार आवश्यक है।”
कार्यशाला में प्रतिभागियों को पोश एक्ट की प्रक्रियाओं, शिकायत निवारण तंत्र, रोकथाम उपायों और संस्थागत जिम्मेदारियों की विस्तृत जानकारी दी गई।सत्र के दौरान सुरक्षित, समावेशी और सकारात्मक कार्य वातावरण को बढ़ावा देने पर विशेष बल दिया गया।कार्यक्रम की शुरुआत में प्रो. मृणालिनी पांडेय, प्रेसीडिंग ऑफिसर/आईसी, ने स्वागत संबोधन दिया। उप निदेशक प्रो. धीरज कुमार ने डॉ. श्रेयस्कर का सम्मान किया। इस अवसर पर रजिस्ट्रार प्रभोध पांडेय और डीन (एकेडमिक) प्रो. एम. के. सिंह समेत कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
संस्थान की ओर से कहा गया कि ऐसी कार्यशालाएँ कर्मचारियों एवं छात्रों को जागरूक बनाने और सुरक्षित कार्यस्थल हेतु आवश्यक प्रक्रियाओं को मजबूत करने में महत्वपूर्ण हैं।
















