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updated: "2026-10-27T09:20:17+00:00"
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# बाराबंकी: सरस्वती शिशु मंदिर इंटर कॉलेज में चार साल की मासूम से कथित यौन उत्पीड़न का आरोप, कोर्ट के आदेश पर प्रिंसिपल समेत पांच के खिलाफ मुकदमा दर्ज

बाराबंकी: सरस्वती शिशु मंदिर इंटर कॉलेज में चार साल की मासूम से कथित यौन उत्पीड़न का आरोप, कोर्ट के आदेश पर प्रिंसिपल समेत पांच के खिलाफ मुकदमा दर्ज

खून से सनी मिली बच्ची की स्कूल ड्रेस, मां ने लगाए गंभीर आरोप; सीसीटीवी फुटेज न दिखाने और शिकायत पर समझौते का दबाव बनाने का भी दावा

फतेहपुर, बाराबंकी। बाराबंकी जिले के फतेहपुर कस्बे स्थित सरस्वती शिशु मंदिर इंटर कॉलेज में पढ़ने वाली चार साल की मासूम बच्ची से कथित यौन उत्पीड़न का गंभीर मामला सामने आया है। बच्ची की स्कूल ड्रेस खून से सनी मिलने के बाद परिवार में हड़कंप मच गया। बच्ची की मां ने स्कूल प्रबंधन पर घटना की जानकारी छिपाने, सीसीटीवी फुटेज नहीं दिखाने, गाली-गलौज और मारपीट करने के साथ जान से मारने की धमकी देने के आरोप लगाए हैं। परिवार का कहना है कि पुलिस से शिकायत करने के बावजूद शुरुआत में मुकदमा दर्ज नहीं हुआ, जिसके बाद उन्हें न्यायालय का दरवाजा खटखटाना पड़ा। न्यायालय के आदेश पर फतेहपुर पुलिस ने प्रधानाचार्य वीरेंद्र वर्मा समेत पांच लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

स्कूल से आया फोन, कपड़े लेकर पहुंचने को कहा

बच्ची की मां के मुताबिक, 5 अगस्त 2026 को उनकी चार वर्षीय बेटी रोज की तरह स्कूल गई थी। सुबह करीब 11:40 बजे उनके मोबाइल पर स्कूल से फोन आया और बच्ची के कपड़े लेकर पहुंचने को कहा गया। मां का दावा है कि उन्होंने फोन करने वाले से बच्ची की स्थिति के बारे में पूछने की कोशिश की, लेकिन फोन काट दिया गया।

इसके बाद वह कपड़े लेकर स्कूल पहुंचीं तो बच्ची की पैंट पर काफी खून लगा हुआ था। बेटी की हालत देखकर वह घबरा गईं और स्कूल में घटना के बारे में जानकारी लेने लगीं। मां के मुताबिक, कक्षा की शिक्षिका ने बताया कि बच्ची कक्षा में कुछ नहीं बोल रही थी और बाद में बाथरूम गई थी। हालांकि, बच्ची के साथ क्या हुआ और उसे चोट कैसे लगी, इसकी स्पष्ट जानकारी उन्हें नहीं दी गई।

परिवार का आरोप है कि स्कूल की ओर से बच्ची को अस्पताल ले जाने के लिए कहा गया, लेकिन घटना के संबंध में संतोषजनक जवाब नहीं मिला।

चिकित्सकीय जांच के बाद यौन उत्पीड़न की आशंका

बच्ची की मां के अनुसार, उन्होंने अपने पति को स्कूल बुलाया और बच्ची को चिकित्सक के पास ले गईं। मां का आरोप है कि चिकित्सकीय जांच के दौरान बच्ची के निजी अंगों में सूजन और अंदरूनी चोट के संकेत बताए गए। बच्ची की हालत देखकर परिवार को उसके साथ गलत हरकत किए जाने की आशंका हुई।

परिवार का कहना है कि बच्ची को लेकर वे दोबारा स्कूल पहुंचे और प्रधानाचार्य को डॉक्टर की जानकारी दी। मां के मुताबिक, प्रधानाचार्य की डॉक्टर से फोन पर बातचीत भी हुई थी। उन्होंने दावा किया कि बातचीत की रिकॉर्डिंग उनके मोबाइल में मौजूद है।

हालांकि, बच्ची के साथ वास्तव में क्या हुआ, चोट किन परिस्थितियों में लगी और इसके लिए कौन जिम्मेदार है, यह जांच और उपलब्ध चिकित्सकीय एवं अन्य साक्ष्यों से स्पष्ट होना बाकी है।

प्रधानाचार्य और शिक्षकों पर गाली-गलौज व मारपीट का आरोप

बच्ची की मां ने प्रधानाचार्य वीरेंद्र वर्मा, सहायक अध्यापक विपुल शर्मा, अनूप, अनिल शर्मा और महिला शिक्षिका संजू यादव पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि घटना के संबंध में सवाल पूछने और शिकायत करने पर उनके तथा उनके पति के साथ गाली-गलौज की गई। मां ने पति के साथ मारपीट करने और शिकायत करने पर जान से मारने की धमकी देने का भी आरोप लगाया है।

परिवार का दावा है कि उन्होंने स्कूल प्रबंधन से बच्ची के साथ हुई घटना की पूरी जानकारी देने और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की थी, लेकिन उन्हें संतोषजनक जवाब नहीं मिला।

सीसीटीवी फुटेज दिखाने की मांग, साक्ष्य मिटाने की आशंका

पीड़ित परिवार ने स्कूल परिसर में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज दिखाने की मांग की थी। मां का आरोप है कि स्कूल प्रबंधन ने फुटेज दिखाने से इनकार कर दिया। इसके बाद उन्होंने आशंका जताई कि कहीं घटना से जुड़े साक्ष्यों को मिटाने की कोशिश तो नहीं की गई।

परिवार का कहना है कि सीसीटीवी रिकॉर्डिंग से घटना के समय बच्ची की गतिविधियों, स्कूल परिसर में मौजूद लोगों और घटनाक्रम से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी सामने आ सकती है। हालांकि, रिकॉर्डिंग हटाए जाने या साक्ष्य मिटाने के आरोप की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है।

थाने से एसपी तक लगाई गुहार, फिर न्यायालय पहुंचे परिजन

मां के मुताबिक, वह 5 अगस्त को खून से सनी स्कूल ड्रेस लेकर फतेहपुर थाने पहुंचीं और लिखित शिकायत दी। आरोप है कि पुलिस ने जांच के बाद रिपोर्ट दर्ज करने की बात कहकर उन्हें अगले दिन बुलाया। 6 अगस्त को दोबारा थाने पहुंचने पर भी उनकी शिकायत दर्ज नहीं की गई।

मां का कहना है कि 7 अगस्त को पुलिस के फोन के बाद वह बच्ची को लेकर थाने पहुंचीं, जहां से बच्ची का जिला अस्पताल बाराबंकी में चिकित्सकीय परीक्षण कराया गया। इसके बावजूद मुकदमा दर्ज नहीं होने पर उन्होंने 10 अगस्त 2026 को पुलिस अधीक्षक को शिकायती प्रार्थना पत्र दिया।

परिवार ने आरोप लगाया कि कार्रवाई करने के बजाय उन पर समझौते का दबाव बनाया गया। मां के मुताबिक, उन्हें बताया गया कि मामले में ऊपर से दबाव है। परिवार का कहना है कि जब उन्हें न्याय मिलने की उम्मीद नहीं दिखाई दी तो उन्होंने न्यायालय का दरवाजा खटखटाया और आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने की मांग की।

कोर्ट के आदेश पर प्रधानाचार्य समेत पांच के खिलाफ मुकदमा

पीड़ित परिवार की शिकायत पर न्यायालय ने आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया। इसके बाद फतेहपुर पुलिस ने प्रधानाचार्य वीरेंद्र वर्मा समेत पांच लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया।

उपलब्ध जानकारी के अनुसार, मुकदमे में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की चार धाराएं दर्ज बताई गई हैं:

1. धारा 115(2) — स्वेच्छा से चोट पहुंचाने से संबंधित प्रावधान।
 2. धारा 352 — जानबूझकर अपमान करने से संबंधित प्रावधान।
 3. धारा 351(3) — आपराधिक धमकी से संबंधित प्रावधान।
 4. धारा 3(5) — साझा आशय से किए गए आपराधिक कृत्य से संबंधित प्रावधान।

मामले में कथित यौन उत्पीड़न से संबंधित आरोपों की प्रकृति और लागू होने वाली अन्य कानूनी धाराओं की पुष्टि एफआईआर की प्रमाणित प्रति तथा पुलिस की विवेचना से की जानी चाहिए।

पुलिस बोली—जांच के बाद सामने आएगी सच्चाई

फतेहपुर के क्षेत्राधिकारी शक्ति सिंह के मुताबिक, न्यायालय के संज्ञान लेने के बाद मामले में मुकदमा दर्ज किया गया है। उन्होंने बताया कि मामले की जांच की जा रही है और जांच पूरी होने के बाद ही तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

जांच में बच्ची की चिकित्सकीय रिपोर्ट, संबंधित लोगों के बयान, स्कूल परिसर की सीसीटीवी रिकॉर्डिंग और परिवार के पास उपलब्ध अन्य साक्ष्य महत्वपूर्ण हो सकते हैं। पुलिस की जांच के बाद ही आरोपों की सत्यता और घटना से संबंधित परिस्थितियां स्पष्ट होंगी।

स्कूल प्रशासन ने समझौता होने का किया दावा

सरस्वती शिशु मंदिर इंटर कॉलेज के स्कूल प्रशासन का कहना है कि मामला 5 अगस्त का है। प्रशासन के मुताबिक, पुलिस ने अपने स्तर से पूछताछ की थी। इसके बाद दोनों पक्षों के बीच बातचीत हुई और आपसी सहमति से समझौता हो गया था।

दूसरी ओर, बच्ची की मां का कहना है कि मामले में उचित कार्रवाई नहीं होने के कारण उन्हें न्यायालय की शरण लेनी पड़ी। न्यायालय के आदेश के बाद मुकदमा दर्ज होने से अब मामले की जांच पुलिस की विवेचना के तहत आगे बढ़ेगी।

बच्चों की सुरक्षा और निष्पक्ष जांच पर टिकी निगाहें

चार साल की मासूम से जुड़े इस संवेदनशील मामले ने स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा, निगरानी व्यवस्था और शिकायतों पर समय से कार्रवाई किए जाने को लेकर सवाल खड़े किए हैं। पीड़ित परिवार निष्पक्ष जांच कराने और दोषी पाए जाने वाले लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग कर रहा है।

फिलहाल पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। अब चिकित्सकीय रिपोर्ट, उपलब्ध साक्ष्य और संबंधित लोगों के बयानों के आधार पर घटना की वास्तविक स्थिति सामने आने की उम्मीद है। मामले में लगाए गए आरोपों को जांच पूरी होने से पहले सिद्ध अपराध नहीं माना जा सकता।

विशेष सावधानी: नाबालिग बच्ची की पहचान उजागर करने वाली तस्वीर, नाम, पता या अन्य विवरण प्रकाशित न किए जाएं।
