‘हमारे मुख्यमंत्री हमें पहचानते तक नहीं, हमें गालियां देते हैं। बांग्लादेश जाने को कहते हैं। हम बांग्लादेश के नहीं, असम के हैं। हमारे पास सारे कागज हैं, लेकिन क्या कर सकते हैं। वे मुख्यमंत्री हैं, बड़े आदमी हैं। हम तो कुछ भी नहीं’
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ये बेबसी असम के कामरूप जिले के सोंताली गांव में रहने वाले मोफिज अली की है। वे परिवार के साथ ब्रह्मपुत्र नदी के बीचों-बीच एक टापू पर रहते हैं। इस जगह को चर इलाका कहते हैं। यहां की लगभग पूरी आबादी बांग्ला बोलने वाले मुस्लिमों की है, जिन्हें असम में मियां मुस्लिम कहते हैं।
असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा अपने भाषणों में मियां मुस्लिमों को निशाने पर रखते हैं। पिछले कुछ भाषण और सोशल मीडिया पोस्ट में उन्होंने मियां मुस्लिमों पर ऐसे बयान दिए, जिससे मुख्यमंत्री और मियां मुस्लिम दोनों विवादों में आ गए।
असम की 126 सीटों पर 9 अप्रैल को वोटिंग होगी। हिमंता जलुकबाड़ी सीट से चुनाव लड़ रहे हैं। उन्होंने 20 मार्च को नामांकन दाखिल कर दिया है। BJP जीती तो वे दोबारा मुख्यमंत्री पद की शपथ ले सकते हैं। CM पद की शपथ लेते हुए उन्होंने कहा था, ‘मैं भारत के संविधान के प्रति सच्ची श्रद्धा और निष्ठा रखूंगा, भारत की संप्रभुता और अखंडता अक्षुण्ण रखूंगा, भय या पक्षपात, अनुराग या द्वेष के बिना, संविधान और विधि के अनुसार सभी लोगों के प्रति न्याय करूंगा’
हालांकि उनके बयान इस शपथ से मेल नहीं खाते। कभी वे कहते हैं कि मियां मुस्लिमों को इतना परेशान करो कि असम छोड़कर चले जाएं। कभी कहते हैं, मियां मुस्लिम किडनी दे देंगे, पर वोट नहीं देंगे।

आखिर क्या हो गया कि हिमंता एक समुदाय के बारे में आक्रामक बयान दे रहे हैं। यही समझने दैनिक भास्कर की टीम दूसरे पक्ष यानी मियां मुस्लिमों के पास पहुंची।
कामरूप का सोंताली गांव यहां 95% आबादी मियां मुस्लिम सबसे पहले हम गुवाहाटी से करीब 75 किलोमीटर दूर कामरूप जिले के सोंताली गांव पहुंचे। सोंताली समारिया विधानसभा सीट में है। समारिया विधानसभा क्षेत्र में करीब 1.3 लाख लोग रहते हैं, इनमें करीब 95% मियां मुस्लिम हैं।
सोंताली के बाजार में अशरफ से मिले। उम्र करीब 35 साल। अशरफ कहते हैं, ‘यहां माहौल अच्छा नहीं है। हमारे मुख्यमंत्री हिटलर और डोनाल्ड ट्रम्प की तरह शासन चला रहे हैं। सीधे बोलते हैं कि मुसलमानों को हटाओ और बांग्लादेश भेजो।’

साेंताली से करीब 5 किमी दूर ब्रह्मपुत्र नदी का किनारा है। मियां मुस्लिमों की कहानी इसी जगह से जुड़ी है। यहां के ज्यादातर मर्द लुंगी पहने नजर आएंगे। कुछ महिलाएं नथुनों के निचले हिस्से में नथ पहनती हैं। इनका मुख्य पेशा खेती, मछली पकड़ना और बेचना है।

ज्यादातर मियां मुस्लिम खेती-बाड़ी का काम करते हैं। असम के बाजारों और घरों में पहुंचने वाली सब्जियां मियां मुस्लिम ही उगाते हैं।
हम नाव से एक आईलैंड पर पहुंचे। इसे बोको गांव कहते हैं। मियां मुस्लिम यहां रहकर खेती करते हैं। बाढ़ आती है, तब उसी बाजार की तरफ चले जाते हैं, जहां से हम यहां आए थे। ये मिट्टी वाला एरिया है। कुछ-कुछ दूरी पर झोपड़ियां बनी हैं। दोपहर हो चुकी थी। खेतों में काम करके थक चुकी कुछ महिलाएं और पुरुष ऊंचे चबूतरे पर बैठकर आराम कर रहे थे।

ये बोको गांव में रहने वाले मियां मुस्लिम हैं। आईलैंड पर खेती करते हैं। बारिश होने पर इन्हें अपनी घर और जमीन छोड़ने पड़ते हैं।
हमने इन लोगों से पूछा कि मुख्यमंत्री आपके बारे में बयान देते हैं, क्या आपने सुने हैं? जवाब कुद्दुस अली देते हैं। कहते हैं, ‘मुख्यमंत्री हमारे बारे में बहुत खराब बोलते हैं। वे पहले कांग्रेस में थे, तब यहां आते थे। तब हम भी उन्हें पसंद करते थे, लेकिन अब नहीं करते। BJP में जाने के बाद उन्होंने हिंदू-मुस्लिम की राजनीति शुरू कर दी है।’
‘असम में 60% हिंदू और 40% मुस्लिम आबादी है। हिंदू-मुस्लिम की राजनीति करने से उन्हें ज्यादा हिंदू वोट मिलेंगे और वे जीत सकते हैं। इसीलिए बांग्लादेश का मुद्दा उठा रहे हैं। हमारे पास आधार कार्ड, पैन कार्ड, वोटर आईडी सब है। फिर भी हमें बांग्लादेशी बता रहे हैं। वे बोलते हैं कि मियां हटाओ, देश बचाओ।’

सोर्स: www.census2011.co.in
महिलाएं बोलीं- CM ने पैसे दिए, लेकिन घर तोड़ दिया असम सरकार अरुणोदय योजना के तहत महिलाओं को हर महीने 1,450 रुपए देती है। मुफ्त राशन भी मिलता है। हमने योजना का फायदा लेने वाली मुस्लिम महिलाओं से बात की। वे अरुणोदय योजना के अलावा सेल्फ हेल्प ग्रुप को मिलने वाले 10 हजार रुपए से खुश हैं। वे कहती हैं कि मुख्यमंत्री अच्छे हैं। हालांकि, एक महिला शिकायती लहजे में बोलीं, ‘मुझे कुछ नहीं दिया, तो मैं उन्हें क्यों अच्छा कहूं। हमारा तो घर तोड़ दिया। वो मुझे बिल्कुल पसंद नहीं हैं।’
हिमंता कब और कैसे मियां मुस्लिमों के खिलाफ होते गए 1979 से 1985 के बीच असम में बांग्लादेश से आए घुसपैठियों के खिलाफ अखिल असम छात्र संघ के नेतृत्व में आंदोलन हुआ था। इस पर ‘इन्फिल्ट्रेशन-जेनेसिस ऑफ असम मूवमेंट’ किताब लिखने वाले प्रो. अब्दुल मन्नान बताते हैं कि पहले हिमंता इस तरह नहीं बोलते थे। वे कांग्रेस में थे, तब उन्होंने कहा था कि गुजरात में पानी के पाइप में मुस्लिमों का खून बहता है। और अब कहते हैं कि मुस्लिमों ने असम को बर्बाद कर दिया। वे सिर्फ सत्ता पाने के लिए ये सब कर रहे हैं।

1. मुस्लिम विवाह कानून रद्द किया असम सरकार ने 23 फरवरी, 2024 को करीब 89 साल पुराने असम मुस्लिम विवाह और तलाक पंजीकरण अधिनियम 1935 को रद्द कर दिया। तब हिमंता बिस्वा सरमा ने कहा था कि इस कानून में निकाह को रजिस्टर्ड करने की परमिशन देने वाले प्रावधान शामिल थे, भले ही दूल्हा और दुल्हन 18 और 21 साल की कानूनी उम्र तक न पहुंचे हों। इससे सरकार को बाल विवाह रोकने में मदद मिलेगी। 2. एक से ज्यादा शादी करने पर रोक असम विधानसभा ने बहुविवाह पर रोक लगाने के लिए 27 नवंबर, 2025 को विधेयक पारित किया। इस कानून के तहत एक पत्नी के रहते हुए दूसरी शादी करने पर 7 साल तक की सजा हो सकती है। असम में हिंदू विवाह अधिनियम, 1955 लागू है। इसके तहत हिंदू दो शादी नहीं कर सकते।
3. 1,281 मदरसे बंद किए हिमंता सरकार ने 27 जनवरी 2021 को असम मदरसा शिक्षा (प्रांतीयकरण) अधिनियम, 1995 और असम मदरसा शिक्षा (शिक्षकों की सेवाओं का प्रांतीयकरण और शैक्षणिक संस्थानों का पुनर्गठन) अधिनियम, 2018 को निरस्त कर दिया। इससे 1,281 मदरसों को मिडिल इंग्लिश यानी ME स्कूल में बदल दिया गया।
इसका असर अहमद की कहानी से समझिए। अहमद 8वीं में पढ़ता है। सरकारी मदरसा बंद होने के बाद उसे कुरान सीखने के लिए 150 किमी दूर दूसरे जिले होजाई जाता है। अहमद का मदरसा अब मिडिल स्कूल है। उसमें कुरान नहीं पढ़ाई जाती। इसलिए वह निजी मदरसे में जाता है।

इस मसले पर असमिया परिषद के जनरल सेक्रेटरी मुक्तार मंडल कहते हैं, ‘देश का कानून समान है, लेकिन हिमंता सरकार ने मुसलमानों को टारगेट करके कानून लागू किया है, ताकि मुस्लिम कोर्ट- कचहरी में दौड़ते रह जाएं।’
4. 5 समुदायों को असमिया मुस्लिम का दर्जा, मियां मुस्लिम इससे बाहर हिमंता 5 मुस्लिम समुदायों को खिलंजिया, यानी भूमि पुत्र बताते हैं। इसमें गोरिया, मोरिया, जोलहा, देशी और सैयद शामिल हैं। ये सभी असमिया भाषा बोलते हैं। गोरिया, मोरिया, जोलहा चाय बागानों के आसपास बसे हैं। देशी मुसलमान निचले असम में रहते हैं। सैयद को असमिया मुसलमान कहा जाता है।
एक फैसला चुनाव आयोग का बाकी राज्यों में SIR, लेकिन असम में SR देशभर में वोटर की पहचान के लिए स्पेशल इंसेंटिव रिवीजन, यानी SIR की प्रोसेस चल रही है। असम को इससे बाहर रखा गया। चुनाव आयोग ने कहा कि राज्य में चल रही NRC, यानी नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटीजन की प्रक्रिया अब तक पूरी नहीं हुई है। इसके बाद सिर्फ 10 दिन के अंदर 17 नवंबर 2025 को चुनाव आयोग ने असम में स्पेशल रिवीजन यानी SR कराने का आदेश जारी कर दिया।

एमनेस्टी इंटरनेशनल ने असम की बेदखली पर जारी रिपोर्ट में बताया था कि दरांग में 1,300, लखीमपुर में 500 और नगांव में 1 हजार से ज्यादा परिवार बेघर हुए। प्रभावितों में 90% से ज्यादा मियां मुस्लिम हैं।
कांग्रेस लीडर और गुवाहाटी हाईकोर्ट के सीनियर वकील हाफिज रशीद अहमद चौधरी इस पर सवाल उठाते हैं। वे कहते हैं, ‘राज्य में जहां-जहां सरकार ने अतिक्रमण हटाने के लिए अभियान चलाया है, वहां अब लोग नहीं रहते। घर टूटने की वजह से वे दूसरी जगह शिफ्ट हो गए। बीएलओ उनके वेरिफिकेशन के लिए जाएंगे, लेकिन वहां कोई नहीं मिलेगा। इससे सैकड़ों नाम कट सकते हैं।’
असमिया मुस्लिम बोले- मियां मुस्लिम हमारी जमीन हड़प रहे कामरूप जिले के सोयगांव में रहने वाले अबुल कासिम असमिया मुस्लिम हैं। वे कहते हैं, ‘हमारे गांव में बांग्लादेशी घुसपैठिए (मियां मुस्लिम) रहते हैं। उन लोगों ने हमारी जमीन हड़प ली। कोर्ट में केस चल रहा है। जमीनों का टैक्स हम भरते हैं, लेकिन रहते वे हैं। हम सब हिंदू-मुस्लिम गोरिया- मोरिया भाई-भाई हैं, लेकिन मियां मुस्लिम के साथ नहीं हैं।’
मंजू बीबी गोरिया मुस्लिम समुदाय से हैं। वे कहती हैं,
कुछ मियां लोगों की वजह से हमें परेशानी होती है। चोरी-डकैती की घटनाओं से डर का माहौल रहता है। खासकर लड़कियां असुरक्षित महसूस करती हैं।

हालांकि, मोहम्मद तमीज अली अबुल और मंजू बीबी से अलग राय रखते हैं। वे कहते हैं ‘मुख्यमंत्री सिर्फ दिखावा करते हैं। हमारे लिए कुछ नहीं करते। ये कई साल से चल रहा है। मुख्यमंत्री गोरिया मुस्लिम के साथ नहीं हैं। वे मियां के साथ हैं। हिमंता असमिया मुस्लिम के नाम पर राजनीति कर रहे हैं।’
‘मियां मुस्लिमों को सभी योजनाओं का फायदा क्यों मिलता है। वे बांग्लादेशी हैं तो उन्हें हमसे ज्यादा फायदा क्यों मिल रहा है। मुख्यमंत्री के बोलने से नहीं होगा, करना पड़ेगा। हम खिलंजिया (स्वदेशी) मुस्लिम, मियां मुस्लिम से अलग हैं। प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री हमारी जमीन लौटाएं और हमें बसाएं।’

‘मुस्लिमों को आपस में लड़ाने की कोशिश’ वहीं, प्रो. अब्दुल मन्नान कहते हैं, ‘मुस्लिमों को आपस में लड़ाने की कोशिश की जा रही है। गोरिया, मोरिया को कितना खिलंजिया माना गया है, इसका जवाब मुख्यमंत्री को देना होगा। हजारों खिलंजिया का नाम वोटर लिस्ट से काटा गया। ये BJP की स्ट्रैटजी है कि मियां मुस्लिम के खिलाफ दूसरे ग्रुप को खड़ा करे।’
‘हिमंता बिस्वा सरमा स्ट्रैटजी बनाने में माहिर हैं। उन्होंने पहले एजेंडा चलाया कि झारखंड में घुसपैठिए हैं। अगर BJP की सरकार आई, तो सबको भगा देंगे। दो महीने वहां खूंटा गाड़कर बैठे रहे, लेकिन क्या हुआ। वे कुछ समय तक कुछ लोगों को मूर्ख बना सकते हैं, लेकिन हमेशा नहीं बना सकते।’

कांग्रेस से BJP में आए हिमंता, असम में सरकार बनवाई


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असम से ये ग्राउंड रिपोर्ट भी पढ़ें क्या महिलाएं खोलेंगी BJP की जीत का रास्ता, स्कीम से मुस्लिम भी खुश

कामरूप जिले में एक महिला साइकिल पर बेटी को लेकर जा रही थी। हमने पूछा- सरकारी योजनाओं के पैसे मिले क्या? जवाब मिला- ‘हां, मिले हैं।’ हमने पूछा, अबकी बार किसकी सरकार? वे मुस्कुराकर बोलीं- ‘BJP की।’ असम में करीब हर चौक-चौराहे पर सरकारी योजनाओं और उनका फायदा लेने वालों की तस्वीरें हैं, जिनमें CM हिमंता बिस्वा सरमा महिलाओं को चेक देते दिख रहे हैं। इन योजनाओं से मुस्लिम महिलाएं भी खुश हैं। पढ़िए पूरी खबर…















