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Mon, Oct 5, 2026Updated 8:46 PM IST
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भिलाई खुर्सीपार में 6 वर्षीय बच्ची से दुष्कर्म: आरोपी दिलावर यादव की गिरफ्तारी के बाद शिवसेना और स्थानीय लोगों ने बुलडोजर कार्रवाई की मांग

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भिलाई। छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले के भिलाई स्थित खुर्सीपार थाना क्षेत्र में एक 6 वर्षीय नाबालिग बच्ची के साथ हुए कथित दुष्कर्म और छेड़छाड़ के मामले में पुलिस द्वारा आरोपी मकान मालिक दिलावर यादव की गिरफ्तारी किए जाने के बाद अब इस प्रकरण में सख्त से सख्त कार्रवाई की मांग तेज हो गई है। सोमवार को छत्तीसगढ़ शिवसेना संगठन और खुर्सीपार क्षेत्र के आक्रोशित स्थानीय निवासियों ने पुलिस एवं जिला प्रशासन को अलग-अलग ज्ञापन सौंपकर आरोपी के विरुद्ध कड़ी कानूनी कार्रवाई करने की गुहार लगाई है। पीड़ित परिवार और स्थानीय समुदाय का कहना है कि इतनी छोटी उम्र की बच्ची के साथ हुई इस जघन्य वारदात ने पूरे क्षेत्र को स्तब्ध कर दिया है और ऐसे अपराधों पर लगाम लगाने के लिए प्रशासन को त्वरित और दृश्यमान कार्रवाई करनी चाहिए।

इस घटनाक्रम के संबंध में प्राप्त जानकारी के अनुसार, खुर्सीपार थाना क्षेत्र में रहने वाली एक 6 वर्षीय बच्ची के साथ उसके ही पड़ोस में रहने वाले मकान मालिक दिलावर यादव ने कथित तौर पर छेड़छाड़ और दुष्कर्म किया था। इस जघन्य अपराध की सूचना मिलने पर खुर्सीपार पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए आरोपी दिलावर यादव को गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस ने आरोपी के खिलाफ संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज कर उसे न्यायिक हिरासत में भेजने की कानूनी प्रक्रिया शुरू कर दी है। हालांकि, आरोपी की गिरफ्तारी के बावजूद स्थानीय लोगों और सामाजिक संगठनों का आक्रोश शांत नहीं हुआ है। उनका मानना है कि केवल गिरफ्तारी ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि ऐसे अपराधियों के खिलाफ ऐसा दंड दिया जाना चाहिए जो समाज में एक मिसाल बने और भविष्य में कोई भी व्यक्ति इस प्रकार के अपराध करने से पहले सौ बार सोचे।

सोमवार को छत्तीसगढ़ शिवसेना के प्रतिनिधिमंडल ने पुलिस अधीक्षक और जिला प्रशासन के अधिकारियों से मुलाकात कर विस्तृत ज्ञापन सौंपा। संगठन ने अपनी मांग में स्पष्ट रूप से कहा है कि आरोपी दिलावर यादव के अवैध निर्माण या संपत्ति पर बुलडोजर चलाया जाए। शिवसेना का तर्क है कि जब अपराधी किसी मासूम बच्ची की जिंदगी बर्बाद करता है, तो उसकी संपत्ति पर भी प्रशासनिक बुलडोजर चलना चाहिए ताकि समाज में कानून का भय बना रहे। इसके अलावा, संगठन ने यह भी मांग की है कि आरोपी को बीच चौराहे पर सजा सुनाई जाए और उसे फांसी की सजा दी जाए, ताकि महिलाओं और बच्चियों की सुरक्षा के प्रति प्रशासन की गंभीरता स्पष्ट हो सके। शिवसेना नेताओं ने चेतावनी दी है कि यदि प्रशासन ने उनकी मांगों पर समय सीमा में उचित कार्रवाई नहीं की, तो वे उग्र आंदोलन करने के लिए बाध्य होंगे।

उधर, खुर्सीपार क्षेत्र के स्थानीय निवासियों ने भी अपना अलग ज्ञापन सौंपकर न्याय की गुहार लगाई है। मोहल्ले के लोगों ने बताया कि जिस प्रकार से इस वारदात को अंजाम दिया गया, उससे पूरे इलाके में दहशत और असुरक्षा का माहौल है। स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि इस मामले की जांच फास्ट ट्रैक कोर्ट के माध्यम से कराई जाए और आरोपी को अधिकतम सजा दिलवाई जाए। ग्रामीणों और स्थानीय महिलाओं ने कहा कि 6 साल की बच्ची के साथ ऐसी हरकत करने वाला व्यक्ति समाज में रहने लायक नहीं है। उन्होंने पुलिस से यह भी अनुरोध किया कि पीड़ित परिवार को पूर्ण सुरक्षा प्रदान की जाए ताकि उन्हें किसी प्रकार का दबाव या धमकी न मिल सके। स्थानीय लोगों ने कहा कि वे चाहते हैं कि न्यायपालिका इस मामले में संज्ञान ले और पीड़िता को न्याय मिले।

प्रशासन और पुलिस अधिकारियों ने ज्ञापन प्राप्त करने के बाद आश्वासन दिया है कि इस मामले में कानून के अनुसार सबसे सख्त कार्रवाई की जाएगी। अधिकारियों ने बताया कि पोक्सो एक्ट (POCSO Act) के तहत मामला दर्ज किया गया है और जांच पूरी होने के बाद चार्जशीट यथाशीघ्र न्यायालय में पेश की जाएगी। प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया कि बुलडोजर कार्रवाई या संपत्ति जब्ती जैसे कदम कानूनी प्रक्रिया और न्यायालय के आदेशों के अधीन ही उठाए जा सकते हैं, लेकिन अपराधी के खिलाफ कानूनी लड़ाई में कोई ढिलाई नहीं बरती जाएगी। पुलिस ने स्थानीय लोगों से शांति बनाए रखने और कानून व्यवस्था को अपने हाथ में न लेने की अपील की है।

यह मामला छत्तीसगढ़ में महिलाओं और बच्चियों की सुरक्षा को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े करता है। राज्य में पिछले कुछ समय में नाबालिगों के साथ अपराधों के मामलों में बढ़ोतरी देखी गई है, जिसके बाद सरकार और प्रशासन पर दबाव बढ़ा है कि वे ऐसे अपराधों के प्रति जीरो टॉलरेंस नीति अपनाएं। खुर्सीपार की इस घटना ने न केवल स्थानीय स्तर पर बल्कि प्रदेश स्तर पर भी चिंता पैदा की है। सामाजिक कार्यकर्ताओं और बाल अधिकार विशेषज्ञों का कहना है कि केवल सख्त सजा ही समाधान नहीं है, बल्कि बच्चों की सुरक्षा के लिए सामुदायिक निगरानी और जागरूकता अभियानों की भी आवश्यकता है। फिलहाल, पूरा खुर्सीपार क्षेत्र और शिवसेना संगठन प्रशासन की अगली कार्रवाई का इंतजार कर रहा है और पीड़ित बच्ची को न्याय मिलने तक आंदोलन जारी रखने का संकल्प व्यक्त किया गया है।