भिंड: शासकीय संभागीय आईटीआई में प्रशिक्षण अधिकारी के निलंबन को लेकर स्टाफ ने किया प्रदर्शन, कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन

मध्य प्रदेश के भिंड जिले में स्थित शासकीय संभागीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान (आईटीआई) में प्राचार्य और संस्थागत स्टाफ के बीच पिछले कुछ समय से चला आ रहा विवाद अब खुलकर सार्वजनिक हो गया है। इस विवाद का मुख्य कारण संस्थान में कार्यरत प्रशिक्षण अधिकारी मुकेश कटारे का निलंबन बताया जा रहा है। उनके निलंबन के विरोध में मंगलवार को संस्थान के बड़ी संख्या में स्टाफ सदस्यों ने एकजुटता दिखाते हुए कलेक्ट्रेट परिसर पहुंचकर जोरदार प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि निलंबित प्रशिक्षण अधिकारी की तत्काल बहाली सुनिश्चित की जाए और मामले में उचित कार्रवाई हो। इसके साथ ही स्टाफ ने जिला कलेक्टर को एक विस्तृत ज्ञापन भी सौंपा, जिसमें पूरे घटनाक्रम और अपनी शिकायतों का उल्लेख किया गया है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, भिंड के शासकीय संभागीय आईटीआई में प्रशिक्षण अधिकारी के पद पर कार्यरत मुकेश कटारे को हाल ही में निलंबित कर दिया गया था। इस निलंबन की कार्रवाई के बाद से ही संस्थान के अन्य कर्मचारियों और शिक्षकों में भारी रोष व्याप्त हो गया। स्टाफ का मानना है कि यह निलंबन अनुचित तरीके से किया गया है। मंगलवार को इसी असंतोष को देखते हुए संस्थान का बड़ा हिस्सा कामकाज छोड़कर कलेक्ट्रेट की ओर निकल पड़ा। यहां पहुंचकर सभी कर्मचारियों ने नारेबाजी करते हुए अपना विरोध दर्ज कराया और प्रशासन का ध्यान इस गंभीर मामले की ओर आकर्षित करने का प्रयास किया।
प्रदर्शन के दौरान स्टाफ की ओर से संस्थान के प्राचार्य पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं। कर्मचारियों ने दावा किया है कि प्राचार्य द्वारा संस्थान के स्टाफ के साथ अभद्रतापूर्ण व्यवहार किया जाता है। स्टाफ का कहना है कि कार्यस्थल पर उनका लगातार अपमान होता है और प्रशासनिक पद का दुरुपयोग कर मनमाने फैसले लिए जा रहे हैं। प्रशिक्षण अधिकारी मुकेश कटारे का निलंबन भी इसी शृंखला का एक हिस्सा बताया जा रहा है। हालांकि, प्राचार्य की ओर से इन आरोपों पर अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया या स्पष्टीकरण सामने नहीं आया है। यह भी स्पष्ट नहीं हो सका है कि मुकेश कटारे को किस ठोस आधार या नियम के तहत निलंबित किया गया है, क्योंकि इस संबंध में प्रशासन की ओर से कोई विस्तृत कारण सार्वजनिक रूप से साझा नहीं किया गया है।
कलेक्ट्रेट में किए गए प्रदर्शन के बाद स्टाफ के प्रतिनिधिमंडल ने भिंड के जिला कलेक्टर से मुलाकात की और उन्हें एक लिखित ज्ञापन सौंपा। इस ज्ञापन में निलंबित प्रशिक्षण अधिकारी मुकेश कटारे के निलंबन आदेश को वापस लेने और उनकी सेवाओं में तत्काल बहाली की मांग की गई है। इसके अतिरिक्त, ज्ञापन में संस्थान के प्राचार्य के खिलाफ अभद्रता और कथित मनमानी के आरोपों की निष्पक्ष जांच कराने की भी गुजारिश की गई है। स्टाफ ने जिला प्रशासन से अनुरोध किया है कि वे इस पूरे मामले में हस्तक्षेप करें ताकि संस्थान का शैक्षणिक और प्रशासनिक माहौल सुधारा जा सके। कर्मचारियों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर समय रहते ध्यान नहीं दिया गया, तो वे भविष्य में और बड़े स्तर पर आंदोलन करने को बाध्य होंगे, जिससे संस्थान के नियमित कामकाज पर सीधा असर पड़ सकता है।
गौरतलब है कि शासकीय संभागीय आईटीआई जैसे तकनीकी संस्थानों में छात्रों को विभिन्न व्यावसायिक पाठ्यक्रमों में प्रशिक्षण दिया जाता है, ताकि वे रोजगार प्राप्त करने में सक्षम हो सकें। ऐसे में जब संस्थान के प्राचार्य और स्टाफ के बीच इस तरह का खुला विवाद सामने आता है, तो इसका सीधा असर वहां अध्ययनरत छात्रों की पढ़ाई और उनके प्रशिक्षण पर पड़ने की संभावना बन जाती है। स्टाफ के कलेक्ट्रेट पहुंचकर प्रदर्शन करने से यह स्पष्ट होता है कि संस्थान के भीतर असंतोष काफी समय से पनप रहा था, जो अब प्रशिक्षण अधिकारी के निलंबन के बाद चरम पर पहुंच गया है।
वहीं, दूसरी ओर जिला प्रशासन की तरफ से कलेक्टर को दिए गए ज्ञापन पर क्या रुख अपनाया जाएगा, यह अभी स्पष्ट नहीं है। प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, ज्ञापन मिलने के बाद इस मामले की समीक्षा की जाएगी। यदि आवश्यकता पड़ी तो जांच के लिए किसी अधिकारी को नियुक्त किया जा सकता है या फिर संबंधित विभाग से रिपोर्ट तलब की जा सकती है। फिलहाल, प्राचार्य और स्टाफ के बीच चल रहे इस टकराव ने भिंड जिले के शैक्षणिक और प्रशासनिक गलियारों में चर्चा का विषय बना दिया है। लोगों की निगाहें अब इस बात पर टिकी हैं कि जिला प्रशासन इस विवाद को सुलझाने के लिए क्या कदम उठाता है और प्रशिक्षण अधिकारी मुकेश कटारे के निलंबन का मामला किस दिशा में आगे बढ़ता है।
इस पूरे घटनाक्रम में सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि सरकारी संस्थानों में उच्च अधिकारियों और अधीनस्थ कर्मचारियों के बीच समन्वय की कमी किस प्रकार संस्थागत कार्यप्रणाली को बाधित कर सकती है। स्टाफ द्वारा लगाए गए अभद्रता के आरोपों की पुष्टि या खंडन अभी तक स्वतंत्र रूप से नहीं हो पाया है। इसलिए, इस मामले में पूरी सच्चाई सामने आने और प्रशासनिक स्तर पर कोई ठोस निर्णय लिए जाने तक अनिश्चितता बनी हुई है। वंदे भारत न्यूज की ओर से इस संबंध में संस्थान के प्राचार्य और जिला प्रशासन के अधिकारियों का पक्ष जानने का प्रयास किया जा रहा है, ताकि खबर को और अधिक संतुलित रूप से प्रस्तुत किया जा सके।

