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Tue, Oct 6, 2026Updated 9:28 AM IST
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भोपाल मेट्रो ऑरेंज लाइन फेज-2 विवाद: शाही कब्रिस्तान पर निर्माण को लेकर कांग्रेस विधायक आतिफ अकील ने जताई आपत्ति, अधिकारियों से कहा- बाहर निकलो वरना बदतमीजी कर लूंगा

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भोपाल। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में मेट्रो रेल परियोजना के विस्तार को लेकर एक बार फिर विवाद सामने आया है। शहर के उत्तर क्षेत्र से कांग्रेस विधायक आतिफ अकील ने मेट्रो की ऑरेंज लाइन के फेज-2 के रूट पर चल रहे निर्माण कार्य पर कड़ी आपत्ति जताई है। यह विवाद शाही कब्रिस्तान स्थित प्रॉपर्टी के पास हो रहे काम को लेकर खड़ा हुआ है। विधायक का आरोप है कि जिस जगह पर निर्माण कार्य किया जा रहा है, वह शाही कब्रिस्तान की संपत्ति है और बिना उचित अनुमति के वहां कोई भी काम नहीं किया जाना चाहिए। इस दौरान विधायक ने मौके पर मौजूद मेट्रो और पुलिस अधिकारियों से तीखी नोकझोंक भी की और उन्हें चेतावनी देते हुए कहा कि चलो बाहर निकलो, वरना मैं बदतमीजी करने लगूंगा।

मिली जानकारी के अनुसार, भोपाल मेट्रो की ऑरेंज लाइन के फेज-2 का निर्माण कार्य विभिन्न हिस्सों में तेजी से आगे बढ़ाया जा रहा है। शहर में यातायात की सुविधाओं को बेहतर बनाने और लोगों को तेज, सुरक्षित एवं आधुनिक परिवहन उपलब्ध कराने के लिए मेट्रो परियोजना को अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हालांकि, जब निर्माण कार्य का दायरा शाही कब्रिस्तान के इलाके तक पहुंचा, तो स्थानीय स्तर पर इसका विरोध शुरू हो गया। उत्तर भोपाल से कांग्रेस विधायक आतिफ अकील ने इस मामले में सीधे हस्तक्षेप करते हुए निर्माण कार्य पर सवाल उठाए हैं। उनका स्पष्ट कहना है कि जिस भूमि पर मेट्रो के रूट का काम किया जा रहा है, वह शाही कब्रिस्तान की प्रॉपर्टी है। उन्होंने अधिकारियों से मांग की है कि पहले इस संबंध में उचित अनुमति ली जाए, उसके बाद ही किसी भी तरह का निर्माण कार्य आगे बढ़ाया जाए।

मौके पर पहुंचे विधायक आतिफ अकील ने निर्माण कार्य में जुड़े मेट्रो अधिकारियों और वहां तैनात पुलिस अधिकारियों से बातचीत की। इस दौरान बातचीत का रुख काफी तल्ख हो गया। विधायक ने अधिकारियों को संबोधित करते हुए कहा कि चलो बाहर निकलो, वरना मैं बदतमीजी करने लगूंगा। यह बयान दर्शाता है कि वे इस मुद्दे को लेकर कितने नाराज हैं और उनके अनुसार प्रशासन तथा मेट्रो प्रबंधन ने बिना स्थानीय संवेदनशीलताओं और धार्मिक भावनाओं का ध्यान रखे निर्माण कार्य शुरू कर दिया है। विधायक की ओर से दी गई इस चेतावनी के बाद मौके पर कुछ समय के लिए तनाव का माहौल बन गया था।

शाही कब्रिस्तान भोपाल का एक ऐतिहासिक और धार्मिक रूप से संवेदनशील स्थल है। इस कब्रिस्तान से जुड़ी भूमि और संपत्ति को लेकर हमेशा से सावधानी बरती जाती रही है। ऐसे में जब मेट्रो जैसी बड़ी परियोजना का रूट इस क्षेत्र से गुजरता है, तो स्वाभाविक रूप से स्थानीय जनप्रतिनिधियों और समाज के लोगों की चिंताएं बढ़ जाती हैं। विधायक आतिफ अकील ने इसी संवेदनशीलता का हवाला देते हुए प्रशासन से स्पष्टीकरण मांगा है कि क्या वाकई में इस जगह पर निर्माण कार्य के लिए सभी जरूरी अनुमतियां प्राप्त कर ली गई हैं या नहीं। उनका जोर इस बात पर है कि यदि यह जमीन शाही कब्रिस्तान की है, तो बिना पूर्व अनुमति के यहां खुदाई या अन्य निर्माण गतिविधियां करना पूरी तरह से अनुचित है।

इस पूरे घटनाक्रम में पुलिस की भूमिका भी अहम रही। चूंकि विधायक ने मौके पर पहुंचकर काम रुकवाने का प्रयास किया और अधिकारियों को बाहर निकलने की चेतावनी दी, इसलिए पुलिस बल को स्थिति को नियंत्रित करने और किसी भी तरह की अनहोनी या टकराव को रोकने के लिए सक्रिय रहना पड़ा। मेट्रो अधिकारियों और पुलिस अफसरों ने विधायक की बातों को सुना, लेकिन इस विवाद का तत्काल कोई ठोस हल निकलता नहीं दिख रहा है।

भोपाल मेट्रो परियोजना राज्य सरकार और केंद्र सरकार दोनों की महत्वाकांक्षी योजनाओं में शामिल है। इसके फेज-1 और फेज-2 के जरिए शहर के अलग-अलग हिस्सों को आपस में जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है। ऑरेंज लाइन का विस्तार शहर के कई प्रमुख क्षेत्रों से होकर गुजरता है। परियोजना को समय पर पूरा करने के लिए लगातार काम किया जा रहा है, लेकिन बीच-बीच में भूमि अधिग्रहण, रूट को लेकर आपत्तियां और स्थानीय संस्थाओं की अनुमतियों जैसे मुद्दे सामने आते रहे हैं। शाही कब्रिस्तान वाला मामला इन्हीं चुनौतियों का ताजा उदाहरण है।

फिलहाल, इस विवाद के बाद यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि मेट्रो प्रबंधन और जिला प्रशासन इस मुद्दे पर क्या रुख अपनाता है। क्या वे विधायक की मांग के अनुसार अपने दस्तावेज और अनुमतियां सार्वजनिक करेंगे, या फिर किसी वैकल्पिक समाधान की दिशा में कदम बढ़ाएंगे। कांग्रेस विधायक आतिफ अकील ने अपनी नाराजगी स्पष्ट रूप से जाहिर कर दी है और उन्होंने यह संदेश दे दिया है कि बिना उचित अनुमति के शाही कब्रिस्तान की प्रॉपर्टी पर होने वाले किसी भी निर्माण कार्य का वे पुरजोर विरोध करेंगे। इस पूरे मामले में अभी तक किसी भी पक्ष की ओर से कोई आधिकारिक लिखित बयान जारी नहीं किया गया है, जिससे यह स्पष्ट हो सके कि आगे की कार्रवाई किस दिशा में होगी। वंदे भारत न्यूज इस मामले में प्रशासन और मेट्रो अधिकारियों का पक्ष जानने का प्रयास कर रहा है।