Thu, 08 Oct 20269:59 AM
Thu, Oct 8, 2026Updated 9:59 AM IST
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भोपाल: नीलम पार्क में शिक्षकों का आंदोलन तेज, CM मोहन यादव से संवाद और न्याय की मांग; बोले- दबाव नहीं टकराव भी नहीं चाहिए

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भोपाल। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के नीलम पार्क में शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) से जुड़ी मांगों को लेकर चल रहा आंदोलन अब निर्णायक दौर में प्रवेश कर चुका है। प्रदेश भर से आए हजारों शिक्षक अभ्यर्थी और चयनित उम्मीदवार मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से सीधे संवाद और अपनी समस्याओं के समाधान की उम्मीद लगाए बैठे हैं। आंदोलनकारी शिक्षकों ने स्पष्ट किया है कि वे सरकार के साथ किसी तरह का टकराव या अनावश्यक दबाव की स्थिति नहीं चाहते, बल्कि उनकी मांगों पर सार्थक संवाद और न्यायपूर्ण समाधान ही उनका एकमात्र लक्ष्य है। नीलम पार्क में जारी इस धरना-प्रदर्शन ने अब एक सामूहिक आवाज का रूप ले लिया है, जिसमें शिक्षकों का कहना है कि भोपाल से उठी उनकी यह पुकार अब सीधे मुख्यमंत्री तक पहुंचनी चाहिए और उस पर ठोस कार्रवाई होनी चाहिए।

आंदोलन के दौरान शिक्षकों द्वारा लगाए गए नारों में भी इसी भावना की प्रतिध्वनि सुनाई दे रही है। ‘दो इडली-एक डोसा, मोहन यादव पर ही भरोसा’ जैसे नारों के माध्यम से प्रदर्शनकारियों ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव पर अपने विश्वास को व्यक्त किया है। यह नारा केवल एक राजनीतिक समर्थन नहीं, बल्कि शिक्षक वर्ग की उस उम्मीद का प्रतीक है कि मौजूदा नेतृत्व उनकी व्यावहारिक कठिनाइयों को समझेगा और उन्हें दूर करने के लिए पहल करेगा। शिक्षकों का मानना है कि पिछले कुछ समय से TET से जुड़े मुद्दों पर जो अनिश्चितता बनी हुई है, उसका समाधान केवल सर्वोच्च स्तर पर हस्तक्षेप से ही संभव है। इसलिए उनकी पूरी आस अब मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से समाधान की दिशा में निकलने वाले किसी सकारात्मक संकेत पर टिकी हुई है।

नीलम पार्क में एकत्रित हुए शिक्षकों ने मीडिया से बातचीत में दोहराया कि उनका आंदोलन पूरी तरह से शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक मूल्यों के अनुरूप है। उन्होंने कहा, “हमें न दबाव चाहिए, न टकराव चाहिए; हमें तो बस अपनी मांगों पर संवाद और न्याय चाहिए।” यह बयान आंदोलन की प्रकृति और शिक्षकों की मानसिकता को स्पष्ट करता है। वे प्रशासन या पुलिस के साथ किसी प्रकार की झड़प या तनावपूर्ण स्थिति उत्पन्न करना नहीं चाहते, बल्कि वे एक ऐसे वातावरण की अपेक्षा कर रहे हैं जहां उनकी शिकायतों को गंभीरता से सुना जाए और तथ्यों के आधार पर निर्णय लिया जाए। शिक्षकों का कहना है कि वे वर्षों से कड़ी मेहनत कर परीक्षाओं में उत्तीर्ण हुए हैं और नियुक्ति की प्रक्रिया में देरी या विसंगतियों के कारण उनके करियर और जीवन पर गहरा असर पड़ रहा है।

TET विरोधी आंदोलन के पीछे मुख्य रूप से शिक्षक पात्रता परीक्षा की वैधता, अंक प्रक्रिया में पारदर्शिता और नियुक्ति प्रक्रिया में हो रही देरी जैसे मुद्दे शामिल हैं। कई अभ्यर्थियों का आरोप है कि परीक्षा परिणामों और काउंसलिंग प्रक्रिया में तकनीकी खामियों और प्रशासनिक उदासीनता के कारण योग्य उम्मीदवारों को अवसर से वंचित होना पड़ रहा है। नीलम पार्क में बैठे शिक्षकों का कहना है कि जब तक इन विशिष्ट शिकायतों पर मुख्यमंत्री स्तर से आश्वासन या लिखित समाधान नहीं मिलता, वे अपना आंदोलन जारी रखेंगे। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि सरकार की ओर से संवाद की पहल होती है, तो वे बातचीत के लिए हर समय तैयार हैं।

राजधानी भोपाल के केंद्र में स्थित नीलम पार्क इन दिनों शिक्षकों की मांगों का गवाह बना हुआ है। यहाँ दिन-रात धरना दे रहे शिक्षकों में महिलाएं और पुरुष दोनों शामिल हैं, जो अपनी पीड़ा और अपेक्षाओं को साझा कर रहे हैं। आंदोलनकारियों का कहना है कि नीलम पार्क से उठ रही यह आवाज केवल भोपाल तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पूरे मध्य प्रदेश के शिक्षक अभ्यर्थियों की सामूहिक वेदना है। उन्होंने उम्मीद जताई है कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, जो स्वयं शैक्षणिक पृष्ठभूमि से जुड़े रहे हैं, उनकी स्थिति की गंभीरता को समझेंगे। शिक्षकों ने कहा कि वे सरकार के खिलाफ नहीं हैं, बल्कि व्यवस्थागत खामियों के सुधार के लिए संघर्षरत हैं।

प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, पुलिस और जिला प्रशासन नीलम पार्क में आंदोलनकारी शिक्षकों पर निगरानी रखे हुए है ताकि कानून-व्यवस्था की स्थिति बनी रहे। अब तक आंदोलन शांतिपूर्ण ढंग से चल रहा है और किसी प्रकार की अप्रिय घटना की सूचना नहीं है। वहीं, शिक्षक संगठनों के प्रतिनिधि लगातार सरकार के संबंधित अधिकारियों से संपर्क साधने का प्रयास कर रहे हैं ताकि मुख्यमंत्री से मिलने का समय या कोई ठोस प्रस्ताव प्राप्त किया जा सके। आंदोलनकारी शिक्षकों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया, तो वे अपने आंदोलन को और तीव्र करने के लिए बाध्य होंगे, लेकिन उनकी प्राथमिकता हमेशा संवाद और समाधान ही रहेगी।

शिक्षकों का यह भी कहना है कि TET से जुड़े मुद्दों का समाधान केवल वर्तमान अभ्यर्थियों के लिए ही नहीं, बल्कि प्रदेश की भविष्य की शिक्षा व्यवस्था के लिए भी अनिवार्य है। यदि योग्य और मेधावी शिक्षकों की नियुक्ति में देरी होती रही, तो इसका सीधा असर सरकारी स्कूलों में शिक्षा की गुणवत्ता पर पड़ेगा। इसलिए वे अपनी मांगों को केवल व्यक्तिगत हित तक सीमित नहीं मानते, बल्कि इसे जनहित और प्रदेश के विकास से जुड़ा मुद्दा मानते हैं। नीलम पार्क में चल रहे इस आंदोलन ने एक बार फिर यह रेखांकित किया है कि मध्य प्रदेश में शिक्षक भर्ती और पात्रता परीक्षा से जुड़े मुद्दे कितने संवेदनशील और व्यापक हैं, और इनके समाधान के लिए राजनीतिक इच्छाशक्ति के साथ-साथ प्रशासनिक संवेदनशीलता की भी आवश्यकता है।