रांची: झारखंड हाईकोर्ट ने मरीजों के हित में एक अहम और ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। अब राज्य में कोई भी अस्पताल या ब्लड बैंक मरीजों से खून के बदले खून (रिप्लेसमेंट डोनर) की मांग नहीं कर सकेगा। अदालत ने इस प्रथा को गैरकानूनी करार देते हुए स्पष्ट किया है कि इलाज के दौरान मरीज या उनके परिजनों पर खून की व्यवस्था का दबाव डालना मरीजों के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है।
हाईकोर्ट ने आदेश में कहा कि यदि कोई अस्पताल या ब्लड बैंक इस निर्देश का उल्लंघन करता है, तो उसके खिलाफ शिकायत दर्ज कराई जा सकती है और संबंधित संस्थान पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी। अदालत का यह निर्णय खासकर गंभीर रोगियों, जरूरतमंदों और गरीब परिवारों के लिए बड़ी राहत लेकर आया है, जिन्हें इलाज के दौरान खून की व्यवस्था को लेकर भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता था।
इस फैसले का स्वास्थ्य विशेषज्ञों और सामाजिक संगठनों ने स्वागत किया है। उनका कहना है कि इससे अस्पतालों की मनमानी पर रोक लगेगी और मरीजों को समय पर, बिना दबाव के आवश्यक चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध हो सकेंगी। यह निर्णय झारखंड में मरीजों के अधिकारों की सुरक्षा की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।















