बिहार बाढ़ संकट: सांसद पप्पू यादव ने मंत्री विजय चौधरी से मांगा इस्तीफा, 56 लाख लोगों के प्रभावित होने का दावा

पूर्णिया। बिहार में बाढ़ की भयावह स्थिति को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। पूर्णिया से सांसद पप्पू यादव ने राज्य सरकार पर जमकर हमला बोला है और बाढ़ प्रबंधन में कथित विफलता के लिए जल संसाधन मंत्री विजय चौधरी से तत्काल इस्तीफे की मांग की है। उन्होंने यह आरोप लगाया है कि बाढ़ से राज्य में करीब 56 लाख लोग प्रभावित हुए हैं। साथ ही उन्होंने कहा कि मंत्रियों, अधिकारियों और ठेकेदारों की आपसी मिलीभगत के कारण तटबंध टूटे हैं, जिससे जनता को भारी नुकसान उठाना पड़ा है।
पप्पू यादव ने सोमवार को अपने आवास पर एक प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित कर राज्य सरकार की बाढ़ नीतियों और राहत कार्यों पर सवाल उठाए। इस दौरान उन्होंने कहा कि बिहार हर साल बाढ़ की समस्या से जूझता है, लेकिन सरकार की ओर से कोई स्थायी समाधान नहीं निकाला जा रहा है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि मौजूदा बाढ़ संकट पूरी तरह से मानव निर्मित है और इसके पीछे सिस्टम में बैठे लोगों की लापरवाही तथा भ्रष्टाचार जिम्मेदार है। सांसद ने दावा किया कि बाढ़ की वजह से प्रदेश में लगभग 56 लाख लोग प्रभावित हुए हैं, जो राज्य के लिए एक अत्यंत गंभीर स्थिति है।
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान पप्पू यादव ने सीधे तौर पर जल संसाधन मंत्री विजय चौधरी पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि मंत्री विजय चौधरी को अपने पद पर बने रहने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है और उन्हें तुरंत इस्तीफा दे देना चाहिए। सांसद का कहना था कि तटबंधों का निर्माण और उनकी मरम्मत का काम गुणवत्तापूर्ण तरीके से नहीं किया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि तटबंधों के निर्माण और रखरखाव में मंत्री, संबंधित विभाग के अधिकारी और ठेकेदारों की एक गहरी मिलीभगत रही है। इसी सांठगांठ का नतीजा है कि बारिश के दबाव में तटबंध कमजोर पड़ गए और टूट गए, जिससे गांव-के-गांव पानी में डूब गए।
पूर्णिया सांसद ने बताया कि तटबंध टूटने से हजारों हेक्टेयर में खड़ी फसलें तबाह हो गई हैं। किसानों की मेहनत पानी में बह गई है और वे कर्ज के बोझ तले दब गए हैं। कई इलाकों में मवेशियों के बह जाने और घरों के क्षतिग्रस्त होने की सूचनाएं हैं। उन्होंने कहा कि प्रभावित क्षेत्रों में लोगों के पास पीने का साफ पानी नहीं है, खाने के लिए पर्याप्त भोजन नहीं है और सुरक्षित आश्रय की कमी है। ऐसे में सरकार का रवैया बेहद उदासीन नजर आ रहा है।
पप्पू यादव ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में राहत और बचाव कार्यों की धीमी गति पर भी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि बाढ़ प्रभावित इलाकों में एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीमें पर्याप्त संख्या में नहीं पहुंच पाई हैं। नावों की व्यवस्था दुरुस्त नहीं है, जिसके कारण कई गांवों में लोग फंसे हुए हैं और उन तक मदद नहीं पहुंच पा रही है। सांसद ने मांग की कि सरकार को तत्काल प्रभाव से राहत शिविरों की संख्या बढ़ानी चाहिए और प्रभावित परिवारों को उचित मुआवजा देने की घोषणा करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि मुआवजे की राशि इतनी होनी चाहिए कि पीड़ित परिवार अपना जीवन फिर से शुरू कर सकें।
इसके अलावा, पप्पू यादव ने पिछली बाढ़ समितियों की रिपोर्टों का हवाला देते हुए कहा कि विशेषज्ञों ने पहले ही चेतावनी दी थी कि तटबंधों की डिजाइन और मरम्मत में खामियां हैं। लेकिन इन रिपोर्टों और सुझावों को सरकार द्वारा अनदेखा किया गया। उन्होंने कहा कि अगर समय रहते तटबंधों की मजबूती पर ध्यान दिया जाता, तो आज 56 लाख लोगों को इस तरह का संकट नहीं झेलना पड़ता।
सांसद ने केंद्र सरकार से भी अपील की है कि वे बिहार में बाढ़ की स्थिति को राष्ट्रीय आपदा घोषित करें ताकि प्रभावित लोगों को केंद्रीय स्तर पर अधिक और तेजी से मदद मिल सके। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार अकेले इस विशाल संकट से निपटने में सक्षम नहीं दिख रही है, इसलिए केंद्र का हस्तक्षेप जरूरी है।
बता दें कि बिहार में बाढ़ एक पुरानी और गंभीर समस्या है। हर साल मानसून के दौरान उत्तर बिहार के कई जिले कोसी, गंडक, बागमती और महानंदा जैसी नदियों के उफान पर आने से जलमग्न हो जाते हैं। इस बार भी भारी बारिश और नदियों के जलस्तर में आई तेज वृद्धि ने स्थिति को बेहद विकट बना दिया है। हालांकि, राज्य सरकार की ओर से अभी तक पप्पू यादव द्वारा लगाए गए इन विशिष्ट आरोपों और मंत्री विजय चौधरी के इस्तीफे की मांग पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। सरकार का कहना रहा है कि राहत और बचाव कार्य युद्धस्तर पर जारी हैं।
पप्पू यादव ने अंत में कहा कि वे बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का दौरा करेंगे और पीड़ितों की आवाज को सदन के अंदर और बाहर दोनों जगह बुलंद करेंगे। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर सरकार ने जल्द ही ठोस कदम नहीं उठाए और जिम्मेदार अधिकारियों-मंत्री के खिलाफ कार्रवाई नहीं की, तो वे बड़े जनआंदोलन के लिए बाध्य होंगे। उनके इस बयान के बाद बिहार की राजनीति में बाढ़ को लेकर घमासान और तेज होने की संभावना जताई जा रही है।

