बिहार विश्वविद्यालय में एबीवीपी का अनिश्चितकालीन धरना शुरू: फ्री इंटर्नशिप, प्लेसमेंट सेल और फीस वापसी समेत छात्रों की कई मांगें

मुजफ्फरपुर। बिहार के मुजफ्फरपुर स्थित बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर बिहार विश्वविद्यालय (बीआरएबीयू) परिसर में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) ने मंगलवार से अनिश्चितकालीन धरना प्रदर्शन शुरू कर दिया है। संगठन द्वारा यह आंदोलन छात्रों से जुड़ी कई लंबित मांगों को लेकर किया जा रहा है। एबीवीपी ने स्पष्ट किया है कि जब तक विश्वविद्यालय प्रशासन उनकी मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं करता और लिखित आश्वासन नहीं देता, तब तक यह धरना जारी रहेगा। इस आंदोलन के कारण विश्वविद्यालय परिसर में तनावपूर्ण माहौल बना हुआ है और छात्रों की नियमित शैक्षणिक गतिविधियों पर असर पड़ने की संभावना जताई जा रही है।
एबीवीपी की ओर से उठाई गई प्रमुख मांगों में मुफ्त इंटर्नशिप की व्यवस्था सबसे अग्रिम है। छात्र संगठन का कहना है कि वर्तमान आर्थिक स्थिति में अधिकांश छात्र सशुल्क इंटर्नशिप वहन करने में असमर्थ हैं, जिससे उनके करियर और व्यावहारिक प्रशिक्षण पर नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है। संगठन ने मांग की है कि विश्वविद्यालय सभी पाठ्यक्रमों के लिए निःशुल्क इंटर्नशिप की सुनिश्चित व्यवस्था करे ताकि आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के छात्र भी बिना किसी भेदभाव के व्यावहारिक अनुभव प्राप्त कर सकें। इसके अलावा, एबीवीपी ने विश्वविद्यालय में एक सक्रिय और कारगर प्लेसमेंट सेल की स्थापना एवं संचालन की भी मांग रखी है। छात्रों का आरोप है कि मौजूदा प्लेसमेंट सेल नाममात्र का है और यह रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने में विफल रहा है। संगठन चाहता है कि प्लेसमेंट सेल को पुनर्गठित किया जाए और नियमित रूप से कैंपस इंटरव्यू व भर्ती प्रक्रियाएं आयोजित की जाएं ताकि स्नातक और स्नातकोत्तर छात्रों को रोजगार मिल सके।
आंदोलन का एक अन्य प्रमुख मुद्दा फीस वापसी से संबंधित है। एबीवीपी ने दावा किया है कि कई छात्रों से अतिरिक्त या अनुचित शुल्क लिया गया है, या फिर ऐसी सेवाओं के लिए शुल्क वसूला गया है जो उन्हें प्रदान नहीं की गईं। संगठन ने ऐसे सभी मामलों की जांच और पात्र छात्रों को फीस वापस करने की मांग की है। छात्रों का कहना है कि महंगाई के दौर में पहले से ही शिक्षा का खर्च वहन करना कठिन है, और यदि विश्वविद्यालय द्वारा ली गई फीस का सदुपयोग नहीं हो रहा है तो उसे वापस किया जाना चाहिए। इन मांगों के अलावा, एबीवीपी ने छात्र हितों से जुड़े अन्य लंबित मुद्दों को भी अपने ज्ञापन में शामिल किया है, हालांकि स्रोत सामग्री में उनका विस्तृत उल्लेख नहीं किया गया है।
अनिश्चितकालीन धरने की घोषणा करते हुए एबीवीपी नेताओं ने कहा कि उन्होंने पूर्व में भी विश्वविद्यालय प्रशासन को अपनी मांगों से अवगत कराया था, लेकिन कोई सकारात्मक पहल नहीं हुई। बार-बार आश्वासन दिए जाने के बावजूद जमीनी स्तर पर कोई बदलाव न देखने के बाद संगठन ने यह कड़ा कदम उठाने का निर्णय लिया है। धरना स्थल पर बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं मौजूद हैं जो नारेबाजी कर रहे हैं और प्रशासन के खिलाफ अपना रोष व्यक्त कर रहे हैं। एबीवीपी ने चेतावनी दी है कि यदि मांगें पूरी नहीं होती हैं तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा और इसमें अन्य छात्र संगठनों तथा आम छात्रों को भी शामिल किया जा सकता है।
विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से अभी तक इस आंदोलन पर कोई औपचारिक प्रतिक्रिया या लिखित बयान जारी नहीं किया गया है। यह स्पष्ट नहीं है कि प्रशासन ने एबीवीपी के प्रतिनिधिमंडल से वार्ता की है या नहीं। पिछले अनुभवों को देखते हुए, छात्र संगठनों और प्रशासन के बीच ऐसे टकराव अक्सर लंबे समय तक चलते हैं, जिससे शैक्षणिक कैलेंडर बाधित होता है। मुजफ्फरपुर में बीआरएबीयू उत्तर बिहार का एक प्रमुख उच्च शिक्षा संस्थान है, जहां हजारों छात्र विभिन्न संकायों में अध्ययनरत हैं। ऐसे में अनिश्चितकालीन धरने से परीक्षाओं, कक्षाओं और अन्य शैक्षणिक कार्यों पर असर पड़ने की आशंका बनी हुई है।
स्थानीय स्तर पर इस आंदोलन को लेकर मिश्रित प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। कुछ छात्र एबीवीपी की मांगों को जायज मानते हुए समर्थन दे रहे हैं, वहीं कुछ का मानना है कि अनिश्चितकालीन धरने से पढ़ाई का नुकसान होगा और समस्या का समाधान वार्ता से निकाला जाना चाहिए। फिलहाल, धरना शांतिपूर्ण ढंग से चल रहा है, लेकिन स्थिति की निगरानी की जा रही है। पुलिस और विश्वविद्यालय सुरक्षाकर्मी परिसर में मौजूद हैं ताकि किसी प्रकार की अप्रिय घटना से बचा जा सके। एबीवीपी ने स्पष्ट किया है कि उनका आंदोलन पूर्णतः छात्र हितों और शैक्षणिक सुधारों पर केंद्रित है, और वे हिंसा या अव्यवस्था फैलाने के पक्ष में नहीं हैं।
बिहार विश्वविद्यालय में छात्र आंदोलनों का इतिहास रहा है, और अक्सर फीस, परीक्षा, रिजल्ट व बुनियादी सुविधाओं को लेकर ऐसे विरोध प्रदर्शन होते रहे हैं। एबीवीपी का वर्तमान आंदोलन इसी श्रृंखला का हिस्सा है, लेकिन इसकी तीव्रता और अनिश्चितकालीन स्वरूप इसे पिछले कुछ समय के सबसे महत्वपूर्ण छात्र आंदोलनों में से एक बनाता है। अब यह देखना होगा कि विश्वविद्यालय प्रशासन कब और कैसे इन मांगों पर प्रतिक्रिया देता है, और क्या दोनों पक्षों के बीच वार्ता का कोई मार्ग निकल पाता है। जब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकलता, मुजफ्फरपुर के बीआरएबीयू परिसर में छात्र असंतोष और आंदोलन की स्थिति बनी रहने की संभावना है।

