बिलासपुर: खेत में टूटकर गिरी LT लाइन, करंट लगने से कोटवार की मौत; 5 दिन बाद मरम्मत करने पहुंचे बिजली विभाग के कर्मचारी, शव खेत में मिला

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले से एक बेहद दुखद और चौंकाने वाली घटना सामने आई है, जिसमें बिजली विभाग की कथित लापरवाही का नतीजा एक ग्रामीण युवक ने अपनी जान देकर चुकाया है। बिलासपुर के सेवती गांव में खेत में टूटकर गिरे एलटी (LT) लाइन के करंट प्रवाहित तार की चपेट में आने से एक कोटवार की दर्दनाक मौत हो गई है। इस हादसे की सबसे भयावह बात यह रही कि घटना के बाद लगातार पांच दिनों तक युवक का शव खेत में ही पड़ा रहा और किसी को इसकी जानकारी नहीं हो सकी। स्रोत रिपोर्ट के अनुसार, बिजली विभाग के कर्मचारी घटना के पांच दिन बाद उस टूटी हुई लाइन की मरम्मत करने के लिए मौके पर पहुंचे, तब जाकर खेत में युवक का शव पड़ा हुआ मिला।
यह पूरा मामला बिलासपुर जिले के अंतर्गत आने वाले सेवती गांव का बताया जा रहा है। प्राप्त जानकारी के मुताबिक, सेवती गांव में एक एलटी लाइन का तार पहले से ही टूटा हुआ था और वह सीधे खेत में गिरा पड़ा था। इस टूटे हुए तार में बिजली का करंट प्रवाहित हो रहा था, लेकिन बिजली विभाग द्वारा इसे दुरुस्त करने या सुरक्षा के लिहाज से कोई कदम उठाने में पूरी तरह से देरी की गई। इसी खेत में काम करने वाले कोटवार की जब इस करंट प्रवाहित तार से अनजाने में चपेट में आ गया, तो उसे बचने का कोई मौका नहीं मिला और करंट लगने से उसकी मौके पर ही मौत हो गई। कोटवार गांवों में वन संसाधनों की रखवाली और देखभाल का जिम्मा संभालने वाला व्यक्ति होता है, जो आम तौर पर ग्रामीण इलाकों और खेतों-जंगलों के बीच अपने दैनिक कार्यों में व्यस्त रहता है।
इस घटना को और भी अधिक गंभीर बनाता है वह समय है, जो युवक की मौत के बाद बीत गया। स्रोत में दी गई जानकारी के अनुसार, हादसे के बाद युवक का शव पांच दिनों तक उसी खेत में पड़ा रहा। इन पांच दिनों में न तो बिजली विभाग के किसी अधिकारी या कर्मचारी ने उस क्षेत्र का निरीक्षण किया और न ही टूटी हुई लाइन को ठीक करने की कोई पहल की गई। इसके अलावा, पांच दिनों तक शव खेत में पड़े रहने के दौरान परिजनों या ग्रामीणों द्वारा युवक की खोजबीन क्यों नहीं की जा सकी, यह भी एक बड़ा सवाल है। हालांकि, स्रोत में इस बारे में कोई अतिरिक्त स्पष्टीकरण उपलब्ध नहीं कराया गया है कि युवक के परिजन कहाँ थे या उन्होंने गुमशुदगी की सूचना क्यों नहीं दी थी।
घटना का खुलासा तब हुआ, जब हादसे के ठीक पांच दिन बाद बिजली विभाग के कर्मचारी उस टूटी हुई एलटी लाइन की मरम्मत करने के लिए सेवती गांव के उस खेत में पहुंचे। मरम्मत कार्य के लिए जब कर्मचारियों ने खेत में प्रवेश किया, तब उन्हें वहां कोटवार का शव पड़ा हुआ दिखाई दिया। यह स्थिति बिजली विभाग की कार्यप्रणाली और उनकी जवाबदेही पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगाती है। यदि विभाग के कर्मचारी समय रहते यानी तार टूटने के तुरंत बाद या कुछ दिनों के भीतर मरम्मत के लिए पहुंच जाते, तो संभवतः इस युवक की जान बचाई जा सकती थी। लेकिन पांच दिन की यह देरी न केवल एक जीवन की हानि का कारण बनी, बल्कि एक शव को खेत में असहाय अवस्था में पड़े रहने देने का भी कारण बन गई।
ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली की लाइनों के रखरखाव को लेकर यह कोई पहला मामला नहीं है, लेकिन सेवती गांव की यह घटना विभागीय लापरवाही का एक बेहद दर्दनाक उदाहरण पेश करती है। एलटी लाइनें आमतौर पर कम वोल्टेज की होती हैं, लेकिन यदि वे टूटकर गीली जमीन या खेतों में गिर जाएं, तो उनमें प्रवाहित करंट किसी भी व्यक्ति के लिए घातक सिद्ध हो सकता है। किसानों, मजदूरों और कोटवार जैसे ग्रामीण कर्मचारियों का रोजमर्रा का जीवन खेतों और खुले मैदानों में ही बीतता है, ऐसे में बिजली विभाग की यह जिम्मेदारी बनती है कि वे नियमित रूप से लाइनों का निरीक्षण करें और किसी भी क्षतिग्रस्त तार को तत्काल प्रभाव से ठीक करें या वहां चेतावनी बोर्ड लगाएं।
स्रोत रिपोर्ट में फिलहाल यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि मृतक कोटवार की पहचान क्या है, उसकी आयु कितनी थी, या उसके परिवार में कौन-कौन सदस्य हैं। साथ ही, यह जानकारी भी उपलब्ध नहीं है कि शव मिलने के बाद स्थानीय पुलिस ने क्या कार्रवाई की है, पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूरी हुई है या नहीं, और बिजली विभाग के खिलाफ कोई प्राथमिकी दर्ज की गई है या नहीं। मृतक के परिजनों की ओर से अभी तक कोई बयान सामने नहीं आया है।
बहरहाल, बिलासपुर के सेवती गांव में हुई इस घटना ने एक बार फिर ग्रामीण बुनियादी ढांचे और बिजली विभाग की सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोलकर रख दी है। एक युवक की करंट से मौत होना और उसका शव पांच दिनों तक खेत में पड़े रहना, यह दर्शाता है कि प्रशासनिक तंत्र और विभागीय निगरानी में कितनी बड़ी खामियां मौजूद हैं। वंदे भारत न्यूज की ओर से यह रिपोर्ट उपलब्ध स्रोत सामग्री पर आधारित है। जैसे-जैसे इस मामले में स्थानीय प्रशासन, पुलिस या बिजली विभाग की तरफ से कोई आधिकारिक बयान या नई जानकारी सामने आएगी, इस खबर को अपडेट किया जाएगा। फिलहाल, यह घटना पूरे बिलासपुर जिले में चर्चा का विषय बनी हुई है और ग्रामीणों में विभाग के प्रति भारी रोष व्याप्त है।

