रांची | झारखंड:15 नवंबर—यह तारीख सिर्फ़ कैलेंडर का एक दिन नहीं, बल्कि झारखंड की पहचान, संघर्ष और गौरव का प्रतीक है। महान जननायक धरती आबा बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती और झारखंड राज्य स्थापना दिवस की रजत जयंती (25 वर्ष) के अवसर पर आज रांची का बिरसा चौक राज्य की आत्मा का केंद्र बन गया।
सुबह राज्यपाल संतोष गंगवार, मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और गांडे विधायक श्रीमती कल्पना सोरेन ने बिरसा चौक स्थित धरती आबा की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर उन्हें नमन किया। यह सिर्फ़ श्रद्धांजलि का कार्यक्रम नहीं, बल्कि झारखंड की अस्मिता और संघर्ष की गौरवशाली परंपरा का प्रतीकात्मक प्रदर्शन रहा।
• नेतृत्व की एकता का संदेश-:राज्यपाल और मुख्यमंत्री का एक साथ श्रद्धांजलि देना झारखंड के समग्र विकास और जनता के हितों के लिए एकजुटता का मजबूत संदेश देता है। वहीं, विधायक कल्पना सोरेन की उपस्थिति यह दर्शाती है कि झारखंडी राजनीति में महिला नेतृत्व लगातार सशक्त भूमिका निभा रहा है।
• जनजातीय गौरव दिवस का राष्ट्रीय महत्व-:15 नवंबर को केंद्र द्वारा घोषित ‘जनजातीय गौरव दिवस’ के रूप में मनाया जाना, बिरसा मुंडा के संघर्ष और योगदान को राष्ट्रीय पहचान दिलाता है। इस समारोह में भी यह गौरव स्पष्ट रूप से झलकता है।
• उलगुलान की आज भी प्रासंगिकता-:धरती आबा का ऐतिहासिक ‘उलगुलान’ आज भी आदिवासी अधिकार, पर्यावरण संरक्षण और सशक्त स्थानीय शासन की दिशा में प्रेरणा का स्रोत बना हुआ है। 150 वर्ष बाद भी उनकी विचारधारा झारखंड के सामाजिक-सांस्कृतिक जीवन में जीवित है।
• स्थापना दिवस पर विकास का संकल्प-:राज्य स्थापना दिवस के 25 वर्ष पूरे होने पर राज्य नेतृत्व ने समग्र विकास, सामाजिक न्याय और जनता की आकांक्षाओं को पूरा करने के संकल्प को पुनः दोहराया। नया झारखंड—समृद्ध, सशक्त और समावेशी—यही आज की भावना रही।आज का यह ऐतिहासिक दिन झारखंड के अतीत की विरासत, वर्तमान की पहचान और भविष्य की दिशा—तीनों को एक साथ जोड़ता है।



















